लोकवाणी

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#जीवनसंवाद: आत्महत्या के विरुद्ध होना क्यों जरूरी!

सुशांत सिंह के साथ खड़े होने से बचिए! हमें आत्महत्या के विरुद्ध होना है. उसके साथ नहीं.हमारी समस्या यह है कि हम जीवित व्यक्ति के साथ कभी समय पर खड़े नहीं होते, लेकिन मातम के वक्त समय पर पहुंच जाते…

बेटा-बेटी, जवांई, नाती क्या, एक कुनबा काम न आएगा..

वशीम अली माइकल जैक्सन 150 साल जीना चाहता था। किसी से साथ हाथ मिलाने से पहले दस्ताने पहनता था! लोगों के बीच में जाने से पहले मुंह पर मास्क लगाता था ! अपनी देखरेख करने के लिए उसने अपने घर…

बिल चुकाने के लिए पैसा नहीं बचा तो अस्पताल ने 80 वर्षीय मरीज बिस्तर से बांध दिया

बिल चुकाने के लिए पैसा नहीं बचा तो अस्पताल ने 80 वर्षीय मरीज बिस्तर से बांध दिया. इन्हें मध्य प्रदेश के शाजापुर सिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया था. पांच दिन भर्ती रहे. परिजनों ने दो बार में 11 हजार…

नागरिक को अर्द्ध नागरिक में बदलता समय

चंदन श्रीवास्तव लॉकडाऊन के सवा दो माह गुजरने के बाद जब कोई सवाल ये पूछे तो कि देश ने क्या खोया-क्या पाया तो एक खस्ताहाल आम नागरिक का और क्या जवाब होगा भला सिवाय मी’र के इस शे’र के कि…

लॉकडाउन के दौरान बेरोजगार हुए 10 करोड़ लोगों को सरकार ने राम भरोसे छोड़ दिया

महामारी एक है। जर्मनी और अमरीका एक नहीं हैं। रोज़गार और बेरोज़गारी को लेकर दोनों की नीति अलग है। जर्मनी ने सारे नियोक्ताओं यानि कंपनियों दफ्तरों और दुकानों के मालिकों से कहा कि उनके पे-रोल में जितने भी लोग हैं,…

श्रमिक ट्रेनों में अब तक 80 लोगों की मौत, श्रमिक एक्सप्रेस के भूखे यात्रियों से लुटती दुकानों को देख घबराए वेंडर

श्रमिक ट्रेनों में अब तक 80 लोगों की जान जा चुकी है! -लल्लनटॉप, श्रमिक ट्रेनों में सफर करने वाले 80 मज़दूरों की अब तक जान जा चुकी है. 9 से 27 मई के बीच. ये जानकारी मिली है रेलवे प्रोटेक्शन…

देवांगना व नताशा की गिरफ्तारी: देश की होनहार, पढ़ी-लिखी, लड़ाकू लड़कियां जेलों में भरी जा रही हैं

जया निगम इमरजेंसी में कितने लोग जेल में डाले गए थे, हिसाब है किसी के पास? पर एंटी सीएए प्रोटेस्ट वाली लिस्ट बढ़ती जा रही है. लॉक डाउन से पहले पूरे देश से 3000 लोग गिरफ्तार कर लिए गए और…

हम अंतिम दिनों वाले गांधी को याद करने से क्यों डरते हैं?

प्रोफेसर अपूर्वानंद 30 जनवरी को गांधी की शहादत का दिन कहा जाता है. बेहतर इसे गांधी की हत्या का दिन ही कहा जाना होता. लेकिन शायद हत्या को नकारात्मक और शहादत को सकारात्मक मानकर ही दूसरे शब्द को कबूल किया…

क्या दीपक चौरसिया को रोकना पत्रकारिता पर हमला है?

दिलीप खान दीपक चौरसिया को रोका गया. उसके चैनल ने दिखाया पीटा गया. लोगों ने लिखा पत्रकारिता पर हमला हो गया. शाहीन बाग़ में बीते महीने भर से तमाम पत्रकार गए और रिपोर्टिंग करके लौटे. सब अलग-अलग विचारधारा के लोग…