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कार दौड़ाने में अपने मंत्रियों से पिछड़ गए हैं हरियाणा के सीएम खट्टर !

फिल्म ‘खिलाड़ी 786’ में सिंगर मीका सिंह का एक गाना है,

लॅान्ग ड्राइव पे चल चल, लॅान्ग ड्राइव पे चल चल मेरे नाल सोणिए….

ये गाना तो आपने सुना ही होगा. इस गाने को जिन लोगों से प्रेरित होकर लिखा गया था, उन लोगों को एक सज्जन ने आरटीआई की मदद से खोज निकाला है. वो खास लोग हैं हरियाणा सरकार के मंत्री. जी हां, चौंकिए मत.. बिल्कुल सच्ची खबर है. हरियाणा के तीन मंत्री हर रोज अपनी सरकारी गाड़ी से 700 किलोमीटर से ज्यादा लॅान्ग ड्राइव पर जाते हैं. ये बात हरियाणा सरकार ने ही अपने जवाब में बताई है.

आखिर ये लॅान्ग ड्राइव वाला लफड़ा है क्या ?

गुड़गांव के एक आरटीआई कार्यकर्ता हैं जगजीत सिंह वालिया. वालिया आरटीआई में एक सवाल पूछ बैठे कि बताइए हरियाणा सरकार के मंत्रियों की गाड़ियां कितनी दौड़ लगा रही हैं? इस सवाल का जवाब आया तो पता लगा कि सरकार के दो मंत्रियों – शिक्षा मंत्री रामविलास शर्मा और सहकारिता राज्य मंत्री मनीष ग्रोवर – की गाड़ियां हर रोज 700 किलोमीटर से ज़्यादा दौड़ती हैं.

हरियाणा के सीएम एक और विंटेज कार के साथ. सीएम साहब के पास पांच सरकारी गाड़ियां हैं. (फोटोःट्विटर)
हरियाणा के सीएम एक और विंटेज कार के साथ. सीएम साहब के पास पांच सरकारी गाड़ियां हैं. (फोटोःट्विटर)

क्या कहते हैं गाड़ियों के मीटर ?

हरियाणा सरकार में कार अनुभाग है. सरकार के मंत्रियों को मिलने वाली गाड़ियों का सारा लेखा-जोखा यहीं रहता है. यहां से जो जवाब आया है, उससे पता लगा कि ये मंत्री अपनी गाड़ियां सूबे के मुख्यमंत्री से भी ज्यादा दौड़ा रहे हैं. मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर के पास पांच गाड़ियां हैं. पिछले 14 महीनों के दौरान ये पांचों गाड़ियां कुल मिलाकर 6450 किलोमीटर चलीं (हर महीने). इस हिसाब से सीएम साहब की गाड़ियां हर रोज 215 किलोमीटर चलती हैं.

लेकिन इतना सफर करने के बाद भी सीएम साहब अपने मंत्रियों से पीछे हैं. गाड़ी दौड़ाने में टॉप किया है सहकारिता राज्य मंत्री मनीष ग्रोवर ने. उनकी गाड़ी हर दिन 724 किलोमीटर चलती है और ये मुकाम हासिल करने के लिए उनकी चार गाड़ियों ने जी तोड़ मेहनत की है. सूबे के शिक्षा मंत्री राम बिलास शर्मा थोड़े से किलोमीटरों के चलते ही दूसरे नंबर पर खिसक गए हैं. पिछले 14 महीनों में उनकी दो गाड़ियां 3.40 लाख किलोमीटर का सफर तय कर चुकी हैं. इस हिसाब से मंत्रीसाहब रोजाना औसतन 709 किलोमीटर का सफर तय करते हैं. उनकी कार हर रोज करीब 2000 रुपए का डीजल गटकने के हिसाब से महीने में करीब 60 हजार रुपए से ज्यादा के सरकारी डीजल की खुराक पाती है.

हरियाणा में कैबिनेट मंत्री और भाजपा नेता मनीश ग्रोवर गाड़ी दौड़ाने में पहला नंबर पाने पर सम्मानित होते हुए. (पन इंटेंडेड, फोटोःफेसबुक)
हरियाणा में कैबिनेट मंत्री और भाजपा नेता मनीश ग्रोवर गाड़ी दौड़ाने में पहला नंबर पाने पर सम्मानित होते हुए. (पन इंटेंडेड, फोटोःफेसबुक)

‘कि चंडीगढ़ बहुत दूर है’

रामविलास शर्मा से जब इन आंकड़ों के बारे में पूछा गया तो उनका जवाब था कि उनका विधानसभा क्षेत्र राजधानी चंडीगढ़ से बहुत दूर है. इसीलिए उनकी गाड़ियों को ज़्यादा मेहनत करनी पड़ती है. अब उन्हें जानने वाले बताते हैं कि वो हफ्ते में तीन से चार दिन चंडीगढ़ में ही रहते हैं. तो मंत्री जी का जवाब समझ से बाहर रहता है. इसी सवाल पर स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज का जवाब था कि उनकी गाड़ी का हिसाब-किताब उनके ड्राइवर के पास रहता है न कि उनके पास. वैसे रामविलास और विज अकेले नहीं हैं. न गाड़ियां दौड़ाने में और न ही बहाने बनाने में. कार अनुभाग ने जो आंकड़े दिए हैं उसके मुताबिक सूबे के लगभग मंत्रियों की गाड़ियां औसतन 500 किलोमीटर तक रोज़ चल रही हैं.

हरियाणा के शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा
हरियाणा के शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा

मंत्री जी की गाड़ी का टार्ज़न कनेक्शन!

ये बात सही है कि कार अनुभाग के दिए आंकड़े बड़े इसलिए हैं कि मंत्रियों के पास दो या उससे अधिक गाड़ियां हैं. लेकिन उतना ही सही ये बात भी है कि मंत्री जी कितने ही कर्मठ हों, वो एक बार में एक ही गाड़ी में चल सकते हैं. दूसरी गाड़ी का चक्का ऐसे समय कायदे से रुक जाना चाहिए (ये गाड़ियां अजय देवगन वाली ‘टार्ज़न’ से प्रेरित नहीं हैं तो). एक और बात है. वो ये कि अगर मंत्री जी सचमुच 500 से 700 किलोमीटर चलते हैं तो उनके 8 से 10 घंटे रोज़ अपनी गाड़ियों में ही बीतते हैं. अब उनके पास बचते हैं 12-16 घंटे. इसमें वो अपनी जनता को कितना मोटिवेशन दे पाते होंगे वे ही जानें. ये सवाल इसलिए भी ज़रूरी हैं कि पिछले साल जगजीत सिंह वालिया की ही लगाई आरटीआई में बिलकुल इसी तरह के आंकड़े सामने आए थे. तब भी मंत्रियों की गाड़ियां सीएम साहब से ज़्यादा चलती थीं और तब भी रामविलास शर्मा का नाम आया था.

मंत्रियों की दौड़-धूप देखकर हरियाणा की सड़कों से धूल की जगह एक शायरी उठी है,

चलती है गाड़ी, फुंकता है सरकारी डीज़ल और उड़ती है धूल 
इलेक्शन में खर्च हुआ पैसा, हमारे नेता करते हैं ऐसे ही वसूल

😛

ओके सॉरी. 

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