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रिपोर्ट

नजीब की मां को अब बेटों के साथ-साथ बेटियां भी मिल गई हैं !

तारीख 15 अक्टूबर दोपहर के तीन बज रहे हैं। दिल्ली के मंडी हाउस मेट्रो स्टेशन के पास वाले चौक से खुलने वाले बाराखंबा रोड के किनारे पर सैकड़ों लोग इक्कठा हुए हैं। लोगों के हाथ में बैनर हैं जिनमें लिखा है ‘Where is Najeeb’, ‘Justice for Najeeb’। सैकड़ों लोगों के बीच बेबस निगाहों से लोगों को ताक रही आशियाना गुजरात के भुज से चलकर पहली बार दिल्ली आई हैं। जब तक वह गुजरात में थीं तब तक उन्हें ऐसा लग रहा था कि वह अकेली ऐसी औरत हैं जो अपने शौहर (पति) के लिए इस सरकार के ख़िलाफ़ लड़ रही हैं। लेकिन जैसे ही वह दिल्ली पहुंची तो उनको नजीब अहमद के केस के बारे में पता लगा और उनको एहसास हुआ कि वह अकेली नहीं हैं बल्कि और भी माँएं अपने बच्चों के लिए कई सालों से सरकार के खिलाफ लड़ रही हैं। आज आशियाना ऐसी ही एक मां का साथ देने के लिए दिल्ली आई हैं जिनका बेटा नजीब अहमद पिछले दो साल से लापता हो गया था। नजीब की मां ने अपने बेटे को खोजने के लिए सरकारी तंत्र का हर दरवाज़ा खटखटाया। मोदी सरकार से गुहार लगाई। कई मंत्रियों और नेताओं से भी बातचीत की। अपने बेटे को खोजने के लिए हर संभव रास्ता अपना चुकी इस मां का नाम है फ़ातिमा नफ़ीस।

दिल्ली के मंडी हाउस मेट्रो स्टेशन के पास विरोध प्रदर्शन

फ़ातिमा नफ़ीस को इंसाफ दिलवाने के लिए जेएनयू के छात्रों ने उनका लगातार साथ दिया है। साथ छोड़ा है तो सिर्फ इस मामले में जांच कर रही सीबीआई ने। सीबीआई के अधिकारियों का कहना है कि नजीब अहमद को खोजने की हर कोशिश विफल होने के बाद उन्होंने केस बंद करने का फ़ैसला किया है। सीबीआई ने दिल्ली हाईकोर्ट की अनुमति के बाद ही पटियाला हाउस कोर्ट में इस केस को बंद करने की अपील की है।

नजीब अहमद जेएनयू में बायो टेक्नॉलजी की पढ़ाई कर रहे थे। दो साल पहले अक्टूबर की रात जेएनयू के माही मांडवी हॉस्टल में एबीवीपी से जुड़े छात्रों ने नजीब की पिटाई की जिसके बाद से ही नजीब गायब है। नजीब के लापता होने पर पुलिस ने आईपीसी की धारा के तहत मामला दर्ज कर लिया था और इस मामले को में दिल्ली हाई कोर्ट ने सीबीआई को सौंप दिया था।

सीबीआई और सरकार द्वारा नजीब के मामले को बंद करने के ख़िलाफ़ ही आज मंडी हाउस से खुलने वाले बाराखंबा रोड के मुहाने पर फ़ातिमा नफ़ीस को इंसाफ दिलाने के लिए लोग इक्कठा हुए हैं। ज़्यादातर लोग नौजवान हैं जो जेएनयू के छात्र हैं और कई लोग यूनाइटेड अगेंस्ट हेट एवं अन्य कई संगठनों से जुड़े हुए हैं।

प्रोटेस्ट में शामिल छात्र

करीब साढ़े तीन बजे मार्च जंतर-मंतर की तरफ बढ़ता है। मार्च की पहली कतार में का पोस्टर पकड़े फ़ातिमा नफ़ीस और कई ऐसी माँएं उनके साथ चल रही हैं जिन्होंने अपने बच्चों को खोया है। रोहित वेमुला की मां राधिका वेमुला जुनैद की अम्मी और माजिद की पत्नी आशियाना उनके साथ चल रही हैं। इन औरतों को उनके पीछे चल रहे युवाओं के अंग्रेज़ी नारे बेशक समझ न आ रहे हों लेकिन उन्हें इस बात का पता ज़रूर है कि ये नौजवान चिल्ला चिल्लाकर सरकार से उनके लिए इंसाफ मांग रहे हैं।

मार्च के दौरान ही जब कुछ पत्रकारों ने फ़ातिमा से पूछा कि अब वह क्या करेंगी तो रुंधे गले से फ़ातिमा बोल उठीं,

“सीबीआई हमारे साथ नाइंसाफी कर रही है। हम किसी भी हालत में अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। पिछले दो साल से मेरे साथ खड़े ये सभी लड़के-लड़कियां मेरे बेटा-बेटी ही हैं। अब जो भी ये कहेंगे मैं वही करूंगी। चाहे सुप्रीम कोर्ट हो या कहीं भी जाना हो मैं अपने बेटे के लिए हर दरवाज़ा खटखटाने के लिए तैयार हूँ।”

इतना कहकर फ़ातिमा मार्च कर रहे लोगों के साथ कदमताल कर आगे बढ़ जाती हैं। उनके पीछे डफलियों की ताल पर नौजवान नारे लगा रहे हैं।

प्रोटेस्ट में शामिल जेएनयू के छात्र

इन्हीं नौजवानों में शामिल जेएनयू के एक छात्र ने बताया, “इस मार्च में कई ऐसे लोग भी शामिल हैं जिन्होंने उस रात नजीब को एबीवीपी के गुंडों से बचाया था। इतना ही नहीं कई सिक्योरिटी गार्ड भी उसे बचाने में शामिल थे। और अब सीबीआई सरासर झूठ बोल रही है और इस मामले को बंद करना चाहती है। सीबीआई ने एक भी आरोपी से पूछताछ तक नहीं की। सबको पता है कि यह किसको बचाने के लिए किसके इशारे पर हो रहा है।”

नौजवान बड़े गुस्से में अपनी बात ख़त्म कर नारों में सुर मिलाने लग पड़ा। जंतर-मंतर तक मार्च निकालने के बाद सभी लोग वहां लगे स्टेज के सामने बैठ जाते हैं। बैठने के कुछ देर बाद ही एक-एक करके उन पीड़ित माओं को बोलने के लिए बुलाया जाता है जिन्होंने अपने बच्चे खोए हैं। जुनैद की अम्मी ने बड़ी तल्खी से मोदी सरकार को डांट लगाई और अपने जुनैद की मौत का हिसाब मांगा। माजिद की पत्नी आशियाना ने भी अपने पति के गुम हो जाने की कहानी के साथ गुजरात मॉडल का भांडा फोड़ दिया। रोहित वेमुला की मां राधिका वेमुला ने सभी दलित पिछड़ों आदिवासियों अल्पसंख्यकों और अमन पसन्द लोगों को में मोदी और भाजपा को वोट न देने की अपील की। बीच-बीच में कई छात्र नेताओं और विपक्षी दलों के नेताओं ने भी फ़ातिमा का पूरा समर्थन करते हुए मोदी सरकार की कार्यप्रणाली पर निशाना साधा।

सबसे आख़िर में फ़ातिमा नफ़ीस ने दुखी होकर माइक संभाला। दुखी आवाज़ में उनका कहना था मैं आप सभी लोगों की बड़ी एहसानमंद हूँ क्योंकि आप मेरी हिम्मत हैं और आप लोगों ने मेरा हर जगह साथ दिया है। आप लोगों ने मुझे मां मान लिया है इसलिए मुझे पूरा यकीन है कि आप लोग अपने भाई नजीब को ढूंढकर ही रहेंगे चाहे कुछ भी हो जाए। मैं अकेली नहीं हूँ मेरे साथ और भी माँएं बैठी हैं। सीबीआई ने जो कुछ किया है वो इस हुकूमत के इशारे पर किया है। उसने ये केस खोला ही कब था कि वो इसे बंद कर रही है। आप लोग मेरे साथ हैं तो हमें ज़रूर इंसाफ मिलेगा।”

बोलते बोलते फ़ातिमा भावुक हो गई थीं। उन्होंने सभी का शुक्रिया अदा करते हुए बोलना बंद कर दिया। थोड़ी देर बाद ही नारे लगने लगते हैं अम्मी तुम संघर्ष करो हम तुम्हारे साथ हैं।

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