लोकवाणी

मुख़्तलिफ़ आवाज़, निगाह और विचार

रिपोर्ट

मोदी जी कहाँ है मेरा पति? आप जवाब क्यों नहीं देते?

गुजरात के भुज शहर में जी तोड़ मेहनत के बदले कम पग़ार पाने वाले लोगों की एक बस्ती है, जिसका नाम है संजोग नगर। तारीख 19 जुलाई, साल 2018। इसी बस्ती में रहने वाला माज़िद रात के साढ़े नौ बजे अपनी बीवी, भाई, भाभी और तीन भतीजे-भतीजियों के साथ खाना खा रहा था। माज़िद हर रोज़ की तरह आज भी दिनभर छकड़ा गाड़ी(बोझा ढ़ोने वाला रिक्शानुमा साधन) चलाकर कुछ पैसे कमाने के बाद घर लौटा था। अभी उन्होंने खाना शुरू ही किया था कि दरवाजे पर पुलिस के तीन जवानों ने दस्तक दे दिया। घर में घुसते ही दो पुलिस वालों ने माज़िद को गले से पकड़ लिया और पूछा, “क्या तुम माज़िद हो?” जैसे ही माज़िद ने पुलिसवालों के सवाल के जवाब में हामी भरी, ठीक उसी वक़्त दोनों ने उसे बुरी तरह पीटना शुरू कर दिया। माज़िद को पुलिस वालों की मार से बचाने के लिए उनके भाई ग़ुलाम आगे बढ़े तो तीसरे पुलिस वाले ने उन्हें भी जोर-जोर से कई थप्पड़ मारे।

माज़िद की एलबम तस्वीर

गुलाम की मानसिक हालत ठीक नहीं है। माज़िद की पत्नी और उनकी भतीजी जब पुलिस वालों के आगे हाथ जोड़कर माज़िद को छोड़ देने के लिए कहने लगीं तो तीसरे पुलिस वाले ने उनकी पत्नी और भतीजी को भी पीटना शुरू कर दिया। जब पुलिसवाले माज़िद को पीट रहे थे तो वह रोते हुए बार-बार कह रहा था, “मैंने किया क्या है साहब? मुझे क्यों मार रहे हो?” जब माज़िद की पत्नी अपने पति को छुड़वाने की कोशिश करने लगीं तो तीसरे पुलिस वाले ने उनके पेट में लात मार दी। पेट पर लात लगते ही माज़िद की पत्नी दर्द से कहारने लगी। माज़िद की पत्नी पेट से (गर्भवती)थीं, फिर भी पुलिसवाले ने बिना सोचे-समझे उनके पेट में ही लात मारी। पुलिस माज़िद को उठाकर थाने ले गई और दर्द से कराह रही पत्नी को उनकी भतीजी संजोगनगर के पास पड़ने वाले सिविल अस्पताल में। अस्पताल वालों के पास पुलिस वालों का फ़ोन आने के बाद डॉक्टरों ने माज़िद की पत्नी को रात के दो बजे ही डिस्चार्ज़ कर वहां से जाने को कहा। अस्पताल से बाहर कदम रखते ही उनको पुलिस वाले थाने उठा लाए और मारपीट करने लगे। सुबह माज़िद की पत्नी को छोड़ दिया गया। पूरा दिन बीतने के बाद जब माज़िद के घरवाले थाने में उनके बारे में पूछने गए तो पुलिस वालों ने उन्हें यह कहकर भगा दिया कि पुलिस ने माज़िद को कभी पकड़ा ही नहीं। उस दिन के बाद लगातार माज़िद की पत्नी अपने शौहर(पति) को खोजने के लिए दिन रात लगी हुई है, लेकिन अभी तक उनका कोई शुराग नहीं मिला है। इसलिए 15 अक्टूबर को केंद्र सरकार से माज़िद के बारे में पूछने के लिए उनकी पत्नी दिल्ली आई हैं। अपने पति के लिए पुलिस से लेकर हर सरकारी तंत्र से लड़ते-लड़ते भुज से दिल्ली तक का सफर तय करने वाली इस हिम्मती औरत और माज़िद की पत्नी का नाम है आशियाना।

माज़िद का घर में उसकी पत्नी आशियाना

दिल्ली में आशियाना पिछले दो साल से लापता जेएनयू के छात्र नजीब अहमद के लिए मंडी हाउस से जंतर-मंतर तक निकाले जा रहे इंसाफ मार्च में शामिल होने आई हैं। जहां उनकी मुलाकात ऐसी ही एक मां के साथ हुई है जिनका बेटा नजीब अहमद पिछले दो साल से लापता है। उसकी तरह नजीब की मां भी अपने बेटे को खोजने के लिए मोदी सरकार से गुहार लगाने और कई मंत्रियों-नेताओं से भी बातचीत से लेकर हर संभव रास्ता अपना चुकी हैं। लेकिन, अभी तक दोनों को कोई भी इंसाफ नहीं मिला है। आशियाना के साथ ही एक पोस्टर लेकर मोसिन हिंगोर्ज़ा खड़े हुए हैं। इस पोस्टर पर लिखा हुआ है, “Where is Majid of Gujrat”

दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के दौरान आशियाना

आशियाना को भुज से दिल्ली लेकर आने वाले मोसिन हिंगोर्ज़ा भुज में एक एनजीओ चलाते हैं। आशियाना के दिल्ली आने के बारे में मोसिन बताते हैं, ” मैं भुज में अल्पसंख्यकों के मानवाधिकारों को लेकर काम करता हूँ। मेरी मुलाकात आशियाना से माज़िद के गायब हो जाने के दो-तीन दिन के बाद ही हो गई थी। जैसे ही मुझे इस मामले की जानकारी हुई थी, मैंने तुरन्त ही समाज के कुछ बुजुर्गों और समझदार लोगों के साथ भुज के एसपी को लिखित जानकारी के साथ-साथ बातचीत भी की थी। लेकिन, उन्होंने हमें आश्वासन के सिवाए कुछ नहीं दिया। जिसके बाद हमने गुजरात हाइकोर्ट में बंदीप्रत्यक्षीकरण याचिका (habeas corpus petition) दायर की। इसके बाद कोर्ट ने पुलिस को माज़िद को पेश करने के लिए भी कहा, लेकिन पुलिस ने ऐसा नहीं किया। अब पता नहीं पुलिस ने माज़िद के साथ क्या किया है। हम दिल्ली में लोगों को गुजरात में चल रहे पुलिस के गुंडाराज के बारे में बताने और सरकार से मदद मांगने आए हैं, ताकि आशियाना को जल्द से जल्द माज़िद मिल सके।”

दिल्ली के मंडी हाउस मेट्रो स्टेशन के पास विरोध प्रदर्शन

इतना बताकर मोसिन मार्च के साथ चल पड़ा। मार्च जंतर-मंतर पर पहुंचने के बाद लोग स्टेज के सामने बैठ जाते हैं। लोगों के बैठ जाने के बाद एक-एक करके उन पीड़ित माताओं को बोलने के लिए बुलाया जाता है, जिन्होंने अपने बच्चे खोए हैं। सबसे पहले जुनैद की अम्मी अपना दर्द सुनाते हुए बड़ी तल्खी से मोदी सरकार को डांट लगाती हैं। उसके बाद आशियाना को स्टेज पर बुलाया जाता है। डरी हुई आशियाना स्टेज से बताती हैं, “मैं भुज से चलकर पहली बार दिल्ली आई हूँ। जब तक मैं गुजरात में थीं तब तक मुझे ऐसा लग रहा था कि मैं अकेली ही अपने शौहर (पति) के लिए इस सरकार के ख़िलाफ़ लड़ रही हूँ। लेकिन, मैं दिल्ली पहुंची तो मुझे नजीब के बारे में पता लगा और फिर मुझे लगा कि मैं अकेली नहीं हूँ बल्कि और भी माँएं अपने बच्चों के लिए कई सालों से सरकार के खिलाफ़ लड़ रही हैं। जब एक बेटा माँ से अलग कर दिया जाता है या किसी का पति उससे अलग किया जाता है तो उसके दिल पर क्या बीतती है? यह उनके दिल से पूछो। जब वे रात को खाना खाती है तो क्या उनको अपना बेटा याद नहीं आता? क्या उनको उनका पति याद नहीं आता? मैं मोदी जी से पूछना चाहती हूँ, वो तो गुजरात से हैं। आज गुजरात में ऐसा किस्सा हुआ है। कहाँ है वो लोग? क्यों आज माज़िद के बारे में नहीं पूछ रहे? क्यों आज उसे ढूंढकर नहीं ला रहे? पहले तो आप कच्छ में दो बार आते थे। लेकिन, जब से दिल्ली आए हो, एक बार भी वहां के लोगों के बारे में नहीं पूछा है कि वे किस हाल में हैं।  मैं गर्भवती हूँ इसलिए उन सभी माओं का दर्द समझ सकती हूँ, जिन्होंने अपने बेटे खोए हैं।

अरे मोदी जी एक मां की बददुआ से तो खुदा भी डरता है। एक मां को और एक बीवी को आप इस तरह रुला रहे हो। आपको शर्म नहीं आती? आज हमें लड़ने के लिए इतना आगे आना पड़ा है। मैंने कभी दिल्ली नहीं देखा था। लेकिन मुझे अपने पति के लिए यहां तक आना पड़ा है।

बोलते-बोलते आशियाना की आंखों की कोर से आंसू छूटकर ज़मीन पर गिरने लगते हैं। उनकी आवाज़ डगमगा जाती है। लेकिन, वह रुकती नहीं और आगे बताती हैं, “जब आप वोट मांगने आते हो तो ऐसा लगता है कि किसी के आगे भीख मांग रहे हो। लेकिन मैं आज पूछती हूँ कहाँ है मेरा पति? …मेरे पति को मेरी आंखों के सामने से गायब किया गया है। मेरी आंखों के सामने उसे पीटा गया है। क्या देश का संविधान आपको ये हक़ देता है कि किसी को मारो, किसी के बच्चे को मारो? आपकी सरकार को ये हक़ किसने दिया है कि औरतों को मारो। मोदी जी, मैं आपसे पूछना चाहती हूँ, कहाँ है मेरा पति? आप जवाब क्यों नहीं देते?” इतना कहकर आशियाना रोते हुए सुबकियां लेने लगती हैं और पीछे जाकर बैठ जाती हैं। आशियाना के सवाल का जवाब देने वाला कोई नहीं था। शायद जिसे जवाब देना चाहिए, वह चुप्पी साधे बैठा है।

(स्टोरी को आशियाना औऱ मोसिन से बातचीत के आधार पर लिखा गया है। हमने भुज पुलिस थाने में भी बातचीत करने की कोशिश की थी लेकिन, उनका कोई जवाब नहीं मिला है। गुजरात पुलिस का जवाब आते ही स्टोरी को अपडेट कर दिया जाएगा।)

LEAVE A RESPONSE

Your email address will not be published. Required fields are marked *