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रिपोर्ट

सुनो सरकार: साफ पानी न मिलने से हर साल दो लाख लोग मरते हैं

कृष्णकांत

लगभग पूरे देश में पानी का संकट बढ़ रहा है। जहां 10-12 फ़ीट की गहराई में पानी निकल आता था वहां भी जलस्तर नीचे जा रहा है। विदर्भ, बुंदेलखंड जैसे सूखाग्रस्त इलाकों का हाल तो और भी खराब है। तमाम इलाकों में पानी के चलते पलायन हो रहा है।

फरवरी में नीति आयोग के हवाले से वायर में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, ‘भारत अपने इतिहास के सबसे गंभीर जल संकट का सामना कर रहा है. देश में करीब 60 करोड़ लोग पानी की गंभीर किल्लत का सामना कर रहे हैं. करीब दो लाख लोग स्वच्छ पानी न मिलने के चलते हर साल जान गंवा देते हैं.’

जल संसाधन मंत्री नितिन गडकरी द्वारा जारी की गई इस रिपोर्ट में कहा गया कि यह संकट आगे और गंभीर होने जा रहा है. ‘2030 तक देश में पानी की मांग उपलब्ध जल वितरण की दोगुनी हो जाएगी. जिसका मतलब है कि करोड़ों लोगों के लिए पानी का गंभीर संकट पैदा हो जाएगा और देश की जीडीपी में छह प्रतिशत की कमी देखी जाएगी.’

रिपोर्ट कहती है कि करीब 70 प्रतिशत प्रदूषित पानी के साथ भारत जल गुणवत्ता सूचकांक में 122 देशों में 120वें पायदान पर है. अभी 60 करोड़ भारतीय गंभीर से गंभीरतम जल संकट का सामना कर रहे हैं और दो लाख लोग स्वच्छ पानी तक पर्याप्त पहुंच न होने के चलते हर साल अपनी जान गंवा देते हैं.

गौर करने लायक बात है कि अन्य संसाधनों की तरह जल संसाधन का भी बंटवारा असमान है। अमीर लोग पानी का भरपूर इस्तेमाल करते हैं और सरकार उन्हें बिना रोकटोक सप्लाई भी करती है। गर्मी के दिन हैं और तमाम गगनचुंबी सोसाइटीज में दिन भर है घास और फूल की सिंचाई होती है। इसी देश मे कहीं लोग 5 किलोमीटर पैदल चलकर पानी लाते हैं तब प्यास बुझती है, और इसी देश मे अमीर उद्योगपति लोग धरती से पानी निकाल कर 50 रुपये लीटर तक बेचते हैं। क्या हवा पानी पर सबका समान हक नहीं होना चाहिए। क्या जलाशयों में पानी एकत्र करने और बचाने पर ध्यान नहीं दिया जाना चाहिए? गांवों में कुआं, छोटे बड़े तालाब सब पाट दिये गए हैं। जिन इलाकों में खूब बाग और जंगल थे, उन इलाकों को पेड़ काटकर वीरान कर दिया गया है। इसमे हम सबका बराबर योगदान है। सरकार भी इस संकट से विमुख है।

क्या कुछ वर्षों में हम प्यासे मरेंगे? पिछली सरकारों ने पानी के स्रोत और जलाशयों को खत्म होने दिया। मोदी सरकार भी उसी राह पर है। यह सरकार तो अपनी सपनीली गंगा योजना को ही आगे नहीं बढ़ा सकी। ऐसा होता तो भारत की जीवन रेखा गंगा ही पुनर्जीवित हो जाती। यह संकट अगर बढ़ता गया तो सिर्फ हम आप नहीं, पूरी मानवता पर संकट खड़ा होगा।

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