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जब 2007 वर्ल्ड कप में चिरकुट मानी जाने वाली बांग्लादेश टीम ने इंडियन टीम को हराया था

साल 2007. तारीख़ 17 मार्च. वेस्ट इंडीज़ का पोर्ट ऑफ स्पेन. साढ़े नौ हज़ार के करीब दर्शकों से भरा मैदान. मुक़ाबला था ग्रुप-बी की दो बिल्कुल ही अलग स्तर की टीमों का. भारत और बांग्लादेश.

टूर्नामेंट में दोनों ही टीमों का अपना-अपना ये पहला मैच था.
एक ओर जहां भारतीय टीम बड़े-बड़े, अनुभवी नामों से भरी पड़ी थी, तो वहीं दूसरी ओर बांग्लादेश में कप्तान हबीब-उल-बशर और मोहम्मद रफ़ीक को छोड़ सभी खिलाड़ी 20-25 साल के अंदर के थे. सब जानते थे मैच एक-तरफ़ा होना है. लोगों में किसी तरह का रोमांच नहीं था. हां, ये कयास ज़रूर लगाए जा रहे थे कि कुछ बड़े और धमाकेदार रिकॉर्ड बनेंगे आज. रिकॉर्ड तो ख़ैर बना. बहुत ज़्यादा बड़ा और धमाकेदार, मग़र बांग्लादेश के लिए.

आज ही के दिन भारतीय क्रिकेट प्रेमियों को वो तगड़ा झटका लगा था, जिसकी टीस आज भी चुभती है. वर्ल्ड कप 2007 में भारतीय टीम बांग्लादेश और श्रीलंका से हार कर ग्रुप स्टेज से ही बाहर हो गई थी. टीम ने केवल एक मैच जीता था. वो भी कमज़ोर बरमूडा के ख़िलाफ़.

दोनों टीमों की लाइन-अप कुछ इस तरह थी.
भारतीय टीम- सौरव गांगुली, सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़, वीरेंद्र सहवाग, रॉबिन उथप्पा, युवराज सिंह, महेंद्र सिंह धोनी, हरभजन सिंह, अजीत आगरकर, ज़हीर ख़ान और मुनाफ़ पटेल.

बांग्लादेश- शहरयार नफ़ीस, तमीम इक़बाल, आफ़ताब अहमद, शाकिब-अल-हसन, हबीब-उल-बशर, मोहम्मद अशरफुल, मुशफिकुर रहीम, मोहम्मद रफ़ीक, मशरफे मुर्तज़ा, सय्यद रसेल और अब्दुर रज़्ज़ाक.

टॉस जीत कर भारतीय कप्तान राहुल द्रविड़ ने पहले बल्लेबाज़ी चुनी. इरादा था बांग्लादेशी गेंदबाज़ों की जम के कुटाई करने का और तगड़ा टोटल स्कोर बोर्ड पे टांगने का. इसी उम्मीद में सहवाग और गांगुली की सलामी जोड़ी मैदान पर उतरी.

इरादे तो बुलंद थे मग़र थोड़ी ही देर में सबको समझ आ गया कि डगर कठिन है पनघट की. भारतीय टीम अभी छह रन ही बना सकी थी कि तीसरे ओवर की पहली ही गेंद पर सहवाग का विकेट गिर गया. मुर्तज़ा की बेहतरीन इन-कटर आई, सहवाग के बल्ले का अंदरूनी किनारा लिया, और सीधा विकेटों में जा लगी. केवल 2 रन बना कर सहवाग चलते बने. सहवाग की गिल्लियां बिखरने के साथ ही इतिहास लिखे जाने की शुरुआत हो चुकी थी. इस बड़े झटके के बाद विकेट पर आए युवा बल्लेबाज़ रॉबिन उथप्पा. बड़ी ज़िम्मेदारी थी, टीम को संभालना था. उथप्पा ने ठहर के खेलना शुरू किया. मग़र ये सावधानी भी ज़्यादा देर काम ना आई. 21 रन पर ही भारत ने अपना दूसरा विकेट भी खो दिया. ओवर था सातवां. एक बार फ़िर गेंद मुर्तज़ा के हाथ में थी. ओवर की चौथी गेंद पर उथप्पा आउट. बाहर जाती हुई गेंद ने बल्ले का किनारा लिया और जा पहुंची सीधा पॉइंट पे खड़े आफ़ताब अहमद के हाथों में. 9 रन बना कर उथप्पा भी चलते बने.

मैदान पर अब जो बल्लेबाज़ उतर रहा था उसका लंबी और बड़ी पारी खेलना बेहद ज़रूरी हो चला था. ये थे सचिन. लोगों में भी जोश बढ़ गया. सचिन-गांगुली की धमाकेदार जोड़ी मौजूद थी मैदान पर. जाने कितनी बार ये जोड़ी मैराथन परियां खेल चुकी थी. मग़र कुछ ओवरों के बाद ही ये जोश भी ठंडा पड़ गया. पंद्रहवें ओवर की आख़िरी गेंद फेंकी बाएं हाथ के स्पिनर अब्दुर रज़्ज़ाक ने. गेंद आई और सचिन के बल्ले का अंदरूनी हिस्सा चूम कर, विकेटकीपर रहीम के दस्तानों में जा बैठी. 7 रन बना कर सचिन आउट. केवल चालीस रन पर भारत के तीन बड़े बल्लेबाज़ पवेलियन लौट चुके थे.

अब बारी थी ‘द वॉल’ के नाम से मशहूर कप्तान राहुल द्रविड़ की. द्रविड़ कई बार ऐसी सिचुएशन से टीम को निकाल चुके थे. कोई ख़ास मुश्किल होनी नहीं चाहिये थी. मग़र आज तो बांग्लादेशी गेंदबाज़ों का दिन था. 25वां ओवर. मोहम्मद रफ़ीक की बायें हाथ से फेंकी गई पहली ही गेंद, द्रविड़ के बल्ले को चकमा देते हुए जा टकराई उनके पैड से. अपील हुई. अंपायर अलीम डार की उंगली उठी. और 14 रन बना कर द्रविड़ की पारी ख़त्म. इस दौरान टीम का कुल स्कोर था 72 रन.

भारत की लगभग आधी पारी बीत चुकी थी. मग़र स्कोर बोर्ड पर रन, दहाई के आकड़े को भी पार न कर पाए थे. वहीं 4 बल्लेबाज़ बाहर भी जा चुके थे. एक मात्र अच्छी बात ये थी कि ओपनर सौरव अभी भी मैदान पर डटे हुए थे.

ज़रूरत थी एक पार्टनरशिप की. इस ज़रूरत को कुछ हद तक पूरा किया युवराज सिंह ने. द्रविड के बाद खेलने उतरे युवराज ने गांगुली का पूरा साथ देने की कोशिश की. दोनों के बीच 85 रनों की पार्टनरशिप हो चुकी थी. युवराज तीन चौकों और एक छक्के के साथ 47 रनों पर खेल रहे थे. मग़र तभी 43वें ओवर की चौथी गेंद आई. गेंदबाज़ थे अब्दुर रज़्ज़ाक. स्लॉग स्वीप खेलने के चक्कर में, गेंद बल्ले का ऊपरी भाग छूते हुए फ़ाइन-लेग पर खड़े कप्तान हबीब-उल-बशर के हाथों में जा गिरी. युवराज भी पवेलियन की ओर चल दिए. अब टीम का कुल स्कोर था 157. विकेट गिर चुके थे 5.

अगले ही ओवर की दूसरी गेंद पर गांगुली भी आउट. शुरू से अकेले एक छोर को संभाले हुए गांगुली ने भी अब अपना संयम खो दिया था. रफ़ीक की गेंद पर बड़ा शॉट खेलने के चक्कर में गांगुली ने रज़्ज़ाक को कैच थमा दिया. 4 चौकों के साथ, 129 गेंदे खर्चते हुए 66 रनों की जुझारू मग़र बेहद धीमी पारी खेल कर सौरव भी चलते बने.

इसी ओवर में रफ़ीक ने बल्लेबाज़ी पर उतरे धोनी को भी अपना शिकार बनाकर, गगनचुम्बी शॉट्स देखने का इंतज़ार कर रहे लोगों के दिल तोड़ दिए. आख़िरी के ओवरों में सबकी निगाहें टिकी थी धाकड़ विकेटकीपर बल्लेबाज़ महेंद्र सिंह धोनी पे. लंबे-सुनहरे बालों में एम.एस. मैदान पर उतरे. मग़र इससे पहले की कुछ बड़े शॉट्स देखने को मिलते, केवल तीन गेंदे खेल कर बिना कोई रन बनाए धोनी आफ़ताब अहमद को कैच थमा चलते बने.

लगातार आठ गेंदों में तीन विकेट गंवाने के बाद स्कोर ठहर सा गया. 159 रन पर ही धोनी, हरभजन और आगरकर, तीनों के विकेट गिर चुके थे.  आख़िरी के ओवरों में ज़हीर और मुनाफ़ ने 32 रनों की पार्टनरशिप बना कर टीम का कुल स्कोर 191 पर पहुंचाया. भारतीय पारी का अंत किया मुर्तज़ा ने. 50वें ओवर की तीसरी गेंद पर मुनाफ़ को आउट करके.

मुर्तज़ा ने अपने 9.3 ओवरों के स्पेल में मात्र 38 रन खर्चे.  शानदार गेंदबाज़ी करते हुए, 2 ओवर मेडेन फेंक कर मशरफ़े ने 4 विकेट अपने नाम किये. इसके लिए उन्हें ‘मैन ऑफ द मैच’ का ख़िताब भी मिला. वहीं तीन-तीन विकेट रज़्ज़ाक और रफ़ीक के खाते में आए.

बांग्लादेश को जीतने के लिए निर्धारित 50 ओवरों में 192 रनों का मामूली स्कोर बनाना था. रनों का पीछा करने मैदान पर उतरी तमीम और नफ़ीस की जोड़ी. शुरू से ही तमीम ने अपने हाथ खोल दिए.

बांग्लादेश का स्कोर अभी 24 रन ही हुआ था कि पांचवे ओवर की दूसरी ही गेंद पर ज़हीर ने नफ़ीस को LBW आउट कर, पवेलियन का रास्ता दिखा दिया. 2 रन की निजी पारी खेल नफ़ीस चलते बने. नए बल्लेबाज़ आए मुश्फिक़ुर रहीम. दूसरी ओर तमीम के खेल में कोई बदलाव नहीं आया. ऑफ साइड पे शानदार शॉट, आगे बढ़ कर बाउंडरी लगाना, ये सब उनका जारी रहा. 12वें ओवर में ही तमीम ने अपना पचासा पूरा कर लिया.

हालांकि तमीम अपने पचास रनों की पारी को बड़ी पारी में बदलने से नाकाम रहे. मुनाफ़ पटेल के 14वें ओवर की दूसरी गेंद उछाल लेती हुई तमीम की ओर आई. बाहर जाती इस गेंद को छेड़ने के चक्कर में तमीम विकेटों के पीछे कीपर धोनी को अपना कैच थमा बैठे. 69 रनों पर बांग्लादेश का दूसरा विकेट गिर चुका था. 7 चौकों और 2 छक्कों की मदद से 53 गेंदों में 51 रन बना कर तमीम आउट हुए.

अभी दस ही रन और जुड़े थे कि टीम को एक और झटका लगा. मैदान पर उतरे नए बल्लेबाज़ आफ़ताब अहमद केवल आठ रन बना कर मुनाफ़ का दूसरा शिकार बने. 79 पर 2 खिलाड़ी आउट हो चुके थे.
रहीम का साथ देने उतरे बाएं हाथ के ज़बरदस्त बल्लेबाज़ शाकिब-अल-हसन. दोनों ने चौथे विकेट के लिए 84 रनों की पार्टनरशिप कर डाली. टीम को चौथा झटका लगा 163 रनों पर. सहवाग की गेंद पर धोनी ने शाकिब को स्टंप आउट कर दिया. 5 चौके और एक छक्के की बदौलत 53 रन बनाकर शाकिब आउट हुए.

मग़र तब तक काफ़ी देर हो चुकी थी. मैच भारत के हाथों से पूरी तरह निकल चुका था. अब बांग्लादेश को जीतने के लिए 72 गेंदों मे केवल 29 रनों की ही ज़रूरत बची थी. जबकि उसके 6 खिलाड़ी बाकी बचे थे. इसी बीच सहवाग ने कप्तान बशर को आउट करके मैच को थोड़ा रोमांचक बनाने की कोशिश ज़रूर की मग़र दूसरे छोर पर खेल रहे रहीम ने अपने पचासे की बदौलत बांग्लादेश को ऐतिहासिक जीत दिला दी.

रहीम ने तीन चौकों और दो छक्कों की मदद से 107 गेंदों में 56 रनों की नाबाद पारी खेली. बांग्लादेश ने 9 गेंदे और 5 खिलाडियों के बाकी रहते मैच जीत लिया था.

बांग्लादेश के लिए ये एक ऐतिहासिक जीत थी. मग़र 2007 का वर्ल्ड कप भारत के लिए किसी बुरे सपने से कम ना रहा. ख़ुद सचिन और धोनी भी कई बार इस बात को कह चुके हैं.

सही मायनों में साल 2007 क्रिकेट के लिए, ख़ासतौर से भारतीय क्रिकेट के लिए बहुत ही अनोखा रहा था. इसी टूर्नामेंट में पाकिस्तान की टीम भी आयरलैंड से हार कर ग्रुप स्टेज से बाहर हो गई थी. पाक टीम के कोच बॉब वूल्मर की संदिग्ध परिस्थितियों में टूर्नामेंट के ही दौरान वेस्ट इंडीज़ में मौत हो गई थी. हालांकि बाद में मौत की वजह हार्ट अटैक बताई गई थी. इसी साल द्रविड़ ने भारतीय टीम की कप्तानी छोड़ दी थी और इसी साल एम.एस. धोनी ने अपनी कप्तानी में भारत को साउथ अफ़्रीका में हुए पहले टी-20 विश्व कप का ख़िताब दिलाया था.

बात अगर विश्व कप की करें तो इस साल भारत-पाक जैसी दो बड़ी टीमों के इतनी जल्दी बाहर हो जाने से टूर्नामेंट की होने वाली कमाई में बहुत फ़र्क पड़ा था. इसका असर ये हुआ कि 2007 वर्ल्ड कप में 14 से बढ़ा कर 16 की गई टीमों की संख्या को, 2011 वर्ल्ड कप के समय वापिस 14 कर दिया गया. जिससे केवल दो ही पूल बनाये जा सके और बड़ी टीमों के एक-दो मैच हारने से बाहर होने की सम्भावना से बचा जा सके.

फ़िलहाल 2019 वर्ल्ड कप बिल्कुल पास आ चुका है. इस दौरान भारतीय टीम में 2007 का अग़र कोई नाम है तो केवल महेंद्र सिंह धोनी. वहीं दूसरी ओर बांग्लादेश की टीम को देखा जाए तो इस लिहाज़ से वो ज़्यादा अनुभवी नज़र आती है. 2007 की बांग्लादेश टीम के चार चेहरे इस बार भी टीम के साथ हैं. मशरफ़े, रहीम, शाकिब और तमीम.
मुमक़िन है कि धोनी सहित इन सबका भी ये आख़िरी वर्ल्ड कप ही होगा. देखना दिलचस्प रहेगा कि कौन-कौन अपनी टीमों के लिए क्या-क्या करता है.

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