लोकवाणी

मुख़्तलिफ़ आवाज़, निगाह और विचार

Month: May 2019

चौटाला परिवार ने महाभारत से प्रेरणा ले अपना भट्टा बैठा लिया!

ओमप्रकाश चौटाला परिवार के टूटने के बाद अजय चौटाला व अभय चौटाला परिवार खुद को कौरव, पांडव, द्रौपदी और महाभारत की चुटकुलानुमा बयानबाज़ी में फंसा बैठा। चौटाला की दोनों ब्रांचों में यह होड़ सी हो गयी थी कि कौन ज्यादा…

मोदी को मिले जनादेश के साथ ‘प्रचंड’ विशेषण जुड़ना कोई कामयाबी है या चिंता?

हेमंत कुमार झा विश्व इतिहास के कई अध्याय हमें सचेत करते हैं कि हर जनादेश स्वागत के लायक नहीं होता, भले ही लोकतांत्रिक विवशताओं और मर्यादाओं के तहत आप सिर झुका कर उसे स्वीकार करें। ऐसे जनादेश के साथ अगर…

अतिशी या दीपेंदर हूडा जैसे प्रत्यशियों की हार और प्रज्ञा ठाकुर की जीत से क्या साबित हुआ?

श्याम मीरा सिंह पिछले दो लोकसभा चुनावों से साफ हो चुका है कि आम चुनावों में विचारधाराएं महत्वपूर्ण हो चली हैं। जहां प्रत्याशी गौण होता जा रहा है। यही कारण है कि आतिशी हारती हैं और प्रज्ञा भारती और साक्षी…

क्या 2019 के चुनाव में मैं भी हार गया हूं?

रवीश कुमार 23 मई 2019 के दिन जब नतीजे आ रहे थे, मेरे व्हाट्स एप पर तीन तरह के मेसेज आ रहे थे। अभी दो तरह के मेसेज की बात करूंगा और आख़िर में तीसरे प्रकार के मेसेज की। बहुत…

साध्वी प्रज्ञा की जीत पर आप लोग हैरान क्यों हो रहे हैं?

राहुल कोटियाल साध्वी प्रज्ञा की जीत पर आप लोग हैरान क्यों हो रहे हैं? वो गोडसे को देशभक्त मानती हैं और गांधी को गाली देती हैं इसलिए??? लेकिन इसमें नया क्या है? भाजपा-आरएसएस के अधिकतर कार्यकर्ता भी बिलकुल यही मानते…

2002 का ‘घृणा का नायक’, 2014 का ‘सबका साथ-सबका विकास’ और अब ‘डिवाइडर इन चीफ’

मनीष सिंह मीडिया का फैसला वही हैं, जिनकी उम्मीद थी। मीडिया के ताजे इतिहास को देखते हुए एग्जिट पोल के ऐसे आंकड़े अचम्भे की बात नहीं है। सवाल तो अब भी मौजूं है कि 23 को मोदी सरकार रीपीट होगी…

अगर ईवीएम से चुनाव परिणाम प्रभावित हुए तो दोष भाजपा का नहीं, बल्कि विपक्षी दलों का है

न न! इस बार ईवीएम पर कुछ भी नहीं लिखूंगा चाहे कुछ भी परिणाम आए! कैसे भी तथ्य सामने आएंं! ऐसा नहीं है कि मैं यह मानने लगा हूँ कि ईवीएम पवित्र है और ईवीएम में छेड़छाड़ नहीं हो सकती,…

जीवाणुओं से नफ़रत का जो ऑब्सेशन बाज़ार बेच रहा है, इससे बाहर निकलिए, बच्चों को धूल में खेलने दीजिए

जीवाणुओं से नफ़रत का जो ऑब्सेशन बाज़ार आपको बेच रहा है, इससे बाहर निकलिए। बच्चों को धूल में खेलने दीजिए, घर को ताजमहल न बनाइए। सफ़ाई की अति भी बुरी है, जिस तरह गन्दगी बुरी है। बैक्टीरिया के बीच जो…

एग्जिट पोल: मीडिया 5 सालों से टुकड़ों पर पल रहा है तो कैसे रिजल्ट से पहले ही गुर्राने लगे?

ये एग्जिट पोल है, पोस्ट पोल सर्वे नहीं है. पोस्ट पोल हमेशा मतदान के अगले दिन या फिर एक-दो दिन बाद होते हैं। इसके माध्यम से वोटर की राय जानने की कोशिश की जाती है। कहा जाता है कि पोस्ट…

शिव का अनादर है प्रधानमंत्री का लाल कालीन पर चलकर उन तक जाना

रवीश कुमार सब कुछ ड्रामा जैसा लगता है। सारा ड्रामा इस यक़ीन पर आधारित है कि जनता मूर्ख है। उसे किसी बादशाह पर बनी फिल्म दिखाओ या ऐसा कुछ करो कि जनता को लगे कि वह किसी बादशाह को देख…