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आगरा मेंटल अस्पताल: यहां ज़्यादातर अपनों द्वारा छले गए आते हैं…

लेखक: बसंत कुमार

यहां ज़्यादातर अपनों द्वारा छले गए आते हैं…

आगरा मेंटल अस्पताल जंगल के बीच बना हुआ है. बचपन से इसके बारे में सुनते आया था तो देखने का मन हुआ.

10 अक्टूबर को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस था तो सोचा कि अस्पताल से स्टोरी भी कर लूंगा. जिस रोज मैं वहां पहुंचा 2 अक्टूबर होने के कारण इमरजेंसी वार्ड छोड़ सबकुछ बन्द था. हालांकि अस्पताल के सीनियर डॉक्टर ने इंटरव्यू के लिए वक़्त दे दिया. इंटरव्यू करने के बाद वहां काम करने वाले एक गार्ड से अस्पताल दिखाने की गुजारिश किया. बहुत कोशिश करने के बाद वो उधर ले जाने को राजी हुआ जहां लोगों को रखा जाता है.

जिस जगह पर मानसिक रोग से पीड़ित लोग रहते हैं उधर जाते वक्त तीन लोग पैदल और उनके पीछे-पीछे एक व्यक्ति साइकिल से जाता नजर आया. मैंने पूछा ये कौन है. गार्ड ने कहा- जो पैदल चल रहे हैं वे मानिसक रोगी हैं और उनके पीछे चल रहा साइकिल वाला गार्ड है. जो इनके देख रेख के लिए पीछे-पीछे चल रहा है. अक्सर ही ये लोग जंगल की तरफ भागकर अंदर छुप जाते हैं. बाहर तो नहीं भाग सकते, लेकिन जंगल में भी इन्हें ढूढने में वक़्त लगता है.

इसके कुछ देर बाद हम एक कमरे के बाहर थे. कमरे में ज़्यादातर लोग बुजुर्ग ही थे. एकबार को मुझे वो कमरा वृद्ध आश्रम लगा. कमरे में बेतरतीब तरीके से बैठे लोग चाय पी रहे थे. इसमें से कोई दस साल से तो कोई बारह साल से यहां पर रह रहा है. कुछ लोग ठीक भी हो गए है, लेकिन उन्हें कोई लेने नहीं आया तो यहीं रहने को मजबूर हैं.

उस कमरे की देख रेख करने वाले व्यक्ति ने बताया कि इनके बच्चों ने इन्हें छोड़ दिया है. इन्हें कोई लेने नहीं आता. पड़े हुए हैं सब.. अस्पताल ठीक हो जाने के बाद भी किसी व्यक्ति को अकेले नहीं छोड़ सकता है.

बातचीत के दौरान एक हमउम्र लड़का बाल्टी लिए सामने से गुजरा. उसका कपड़ा मानसिक रोगियों वाला ही था. सफेद जो कि गंदा होने के कारण अजीब रंग का लग रहा था. मैंने कहा- ये लड़का तो सही लग रहा है?

केयरटेकर ने कहा इसकी कहानी तो और भी तकलीफ वाली है. ये अब बिलकुल ठीक है, लेकिन कोई इसे ले जाने वाला नहीं है. इसकी बहन ने गलत पता भरकर इसे भर्ती कराया था. जब ये ठीक हुआ तो हम उस पते पर गए. वहां कोई नहीं था. इसने बताया कि ये ओल्ड फरीदाबाद का रहने वाला है. हम वहां गए तो बहन घर बेंचकर गायब हो गई है. इसकी शादी भी हुई थी. लेकिन पत्नी भी किसी दूसरे से शादी कर ली है. जब बाहर इसका कोई नहीं मिला तो अब यही रहकर मरीजों की मदद करता है.

एक सवाल जो मेरे मन में बहुत लम्बे समय से था और मैंने मौका देखते हुए पूछा. या कोई है जो प्रेम में मिली असफलता के बाद आया हो? केयरटेकर ने कहा, ज्यादातर नए लड़के यहां दो ही कारणों से आते हैं. पहला नशा और दूसरा प्रेम में मिली असफलता. उन्होंने एक लड़के की तरफ इशारा करते हुए कहा, इसकी शादी टूट गई. प्रेमिका से ही शादी होने वाली थी. दोनों पक्ष के परिजनों के बीच कुछ विवाद हुआ और शादी टूट गई.. पिछले पांच महीने से यहां हैं. अब ठीक हो गया है. एकाध महीने में चला जाएगा. इसके घर वाले आते रहते हैं..

अब हम महिलाओं के वार्ड में थे. जहां कई महिलाएं बैठी हुई थीं. जो महिलाएं ठीक हो चुकी हैं और उनका कोई अपना नहीं है उन्हें मेस में काम दिया गया है. मेस में लगभग दस महिलाएं मिलकर रोटी बना रही थीं जिसमें से चार वो महिलाएं थीं जो अब ठीक हो चुकी हैं. उसमें से एक बरेली की रहने वाली थीं. उनके चेहरे पर उदासी और चिंता नजर आ रही थी. मैंने नमस्ते करते हुए पूछा, कैसी हैं? एकदम धीमी आवाज़ में बोलीं, ‘‘ठीक हूं’’..

हम अब वहां से निकल रहे थे. रास्ते में गार्ड ने कहा- जानते हैं सर, यहां ज्यादातर लोग वहीं आते है जिन्हें अपनों ने धोखा दिया हो या जिन्हें लगा हो कि उनका कोई अपना छल कर रहा है. शक हुआ होगा. ये सब अपनों द्वारा छले गए लोग हो. अपनों का साथ हो तो कोई पागल थोड़े होगा सर…

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