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रिपोर्ट

रिपब्लिक टीवी से झड़प के बाद AMU के 14 छात्रों पर हिंदू मोर्चे की शिकायत पर देशद्रोह का मुकदमा

Simin Akhter ‎(سیمیں اختر)‎

अलीगढ़ मुस्लिम युनिवर्सिटी के 14 छात्रों के विरुद्ध, भाजपा समर्थित हिन्दू युवा मोर्चा के सदस्यों द्वारा की गई शिकायत पर, जिस तरह ‘सिडीशन’ या ‘राष्ट्रद्रोह’ का आरोप लगाया गया है, ए.एम.यू और मुस्लिम समुदाय के सियासी विक्टिमाइज़ेशन और उत्पीड़न का एक शर्मनाक उदाहरण है।
इन छात्रों में मौजूदा छात्र संघ अध्यक्ष सलमान इम्तियाज़, सचिव हुज़ैफ़ा आमिर, उपाध्यक्ष हम्ज़ा सुफ़ियान, नवेद आलम, पूर्व अध्यक्ष मशकूर अहमद उस्मानी, पूर्व उपाध्यक्ष नदीम अंसारी, मोहम्मद आमिर, ज़की, पूर्व कैबिनेट सदस्य फ़रहान जुबैरी, ज़ैद शेरवानी, नजमुस शाक़िब के साथ कुल 14 छात्रों के नाम एफ़आईआर दर्ज की गई है.


हिंदू युवा मोर्चा के नेता मुकेश कुमार लोधी के नाम से दर्ज कराई गई रिपोर्ट में इन छात्रों के ख़िलाफ़ 147, 148, 392, 307, 323, 504, 124-A, 153-A और 153-B धाराएं लगाई गई हैं. नीचे तस्वीर में इस संगठन के एक सदस्य के हाथ में हथियार साफ़ देखा जा सकता है जबकि पुलिस द्वारा चार्जशीट युनिवर्सिटी के छात्रों के विरुद्ध दायर की गयी है। ग़ालिबन इसलिए कि उन्होंने विश्वव्द्यालय में मुस्लिम समुदाय के सियासी और आर्थिक हाशियाकरण पर चर्चा रखने की जुर्रत की।

पिछले साल भूतपूर्व उप-राष्ट्रपति हामिद अंसारी पर किये गये हमले से ले कर, विश्वविद्यालय परिसर में सामुदायिक द्वेष फैलाने की मंशा से निकाली गई तिरंगा यात्रा और अब हुए तमाशे तक, ए.एम.यू लगातार भाजपा और संघ व इनके सहयोगी संगठनों के निशाने पर है। इस से ज़्यादा शर्म और अफ़सोस की बात क्या हो सकती है कि देश के ऐसे नामी ऐतिहासिक विश्वविद्यालय को चुनावों पर नज़र रखते हुए इस तरह की घिनौनी सियासत का निशाना बनाया जाये।

आरोप लगाया गया है कि छात्रों ने ‘हिन्दुस्तान मुर्दाबाद/पाकिस्तान ज़िन्दाबाद’ के नारे लगाये, मगर शिकायत करने वालों के पास इस बात का कोई प्रमाण या साक्ष्य नहीं है। सवाल यह है कि एक 150 साल पुरानी संस्था में, जहाँ कभी ऐसा नहीं हुआ, जिसने देश को अनगिनत कलेक्टर, कमीश्नर, शिक्षक, लेखक, कलाकार, पत्रकार, राजनेता और सैनिक दिये, वहाँ छात्र ऐसा क्यूं करेंगे! वह सवाल जिसका ज़ाहिर जवाब इस सवाल में छिपा है कि ऐसा किये जाने से किसका सियासी मक़सद सधता है ..

ए.एम.यू या जामिया मिल्लिया जैसे विश्वविद्यालयों पर इस तरह की साज़िशें, देश भर में अकादमिक समुदाय की वैचारिक आज़ादी पर और शिक्षा के प्रजातांत्रिक चरित्र पर हमला है। ज़रूरी है कि हम न सिर्फ़ इस वाक़ये की निन्दा करें बल्की देश भर में तमाम प्रगतिशील ताक़तें, लोग और संगठन साथ आ कर दक्षिण-पंथी ताक़तों के इन मनसूबों का खुलकर, मिलकर और डटकर विरोध करें। शिक्षक होने के नाते भी, छात्र समुदाय के साथ होने वाले अन्याय के ख़िलाफ़ लड़ना-बोलना हमारा मूलभूत दायित्वों में से है।

एफ़आईआर में बताया गया है कि जब वह कलेक्ट्रेट ऑफ़िस किसी काम से गए थे तभी उनकी गाड़ी पर बीजेपी का झंडा लगा देख छात्रों ने उनके साथ मारपीट की. एफ़आईआर में ये भी लिखा गया है कि छात्र वापस लौटते हुए ‘पाकिस्तान ज़िन्दाबाद’ और ‘भारत मुर्दाबाद’ के नारे लगा रहे थे.

सिमिन अख्तर दिल्ली विश्वविद्यालय के जाकिर हुसैन दिल्ली कॉलेज में अर्थशास्त्र पढ़ाते हैं

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