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बिकाऊ पत्रकारिता के रिंग मास्टर अमित शाह गोदी मीडिया को अब क्यों हंटर मार रहे हैं?

इमरजेंसी के दिनों के बारे में आडवाणी ने कभी अखबारों के विषय में कहा था कि ‘उन्होंने झुकने का कहा तो आपने रेंगना शुरू कर दिया है.’ लेकिन 2019 में आज जिस तरह की अघोषित इमरजेंसी है, उसमें मीडिया के बारे में कहा जा सकता है कि उन्होंने झुकने को कहा तो आप न सिर्फ रेंग रहे हो बल्कि आपने तलवे भी चाटने शुरू कर दिए हैं।

दो दिन पहले ही कोलकाता में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के रोड शो के दौरान भाजपा और तृणमूल कार्यकर्ताओं के बीच हिंसक झड़प हुई और हिंसा के दौरान ईश्वरचंद विद्यासागर प्रतिमा तोड़ी गयी। जिसमें भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई है

लगभग सभी अखबारों में ‘बंगाल में अमित शाह के रोड शो में हिंसा और आगजनी’ जैसे ही हेडिंग लगाई गई हैं। सभी न्यूज़ चैनलों ने इस घटना को जैसे का तैसा ही प्रस्तुत किया है। लेकिन उसके बावजूद अमित शाह एबीपी न्यूज़ पर सवाल उठा रहे हैं। जबकि एक अरसे से एबीपी न्यूज़ चैनल बीजेपी के पक्ष में खुलकर बैटिंग कर रहा है। एबीपी न्यूज के एंकर सुमित अवस्थी और रुबिका लियाकत ने मोदी जी का जो इंटरव्यू लिया उसमें उन्होंने रेंग कर तलवे चाटने के पिछले सारे रिकार्ड को ध्वस्त कर दिये हैं। लेकिन उसके बाद भी बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को एबीपी न्यूज़ से ही शिकायत है।

अमित शाह कहते हैं, ‘मीडिया का एटीट्यूड देखिए. अभी मेरी रैली पर हमला हुआ तो एबीपी ने टाइटल क्या लगाया, मैं नाम के साथ कहता हूं एबीपी न्यूज़… टाइटल क्या बनाया कि अमित शाह की रैली में हिंसा हो गई, जैसे हमने हिंसा कर दी. टाइटल होना चाहिए था कि अमित शाह की रैली पर तृणमूल के गुंडों ने हमला किया, ये भ्रांति फैलाते हैं.’

बताइये अब अमित शाह इतने बेखौफ हो गए हैं कि ओपन पब्लिक के सामने बता रहे है की क्या हैडिंग दें और कैसे लिखें? वैसे टुकड़ेखोर दलाल पत्रकार हैं भी इसी लायक।

अमित शाह अब बिकाऊ पत्रकारिता के रिंग मास्टर बन गए हैं और मोदी राज में गोदी में बैठी पत्रकारिता सर्कस की शेर है, जो बीजेपी के विरोधियों पर गुर्राना नहीं भूलती। लेकिन रिंग मास्टर के इशारे पर दो टांगो पर भी चलने को तैयार है। तब भी रिंग मास्टर हंटर फटकारने से बाज नहीं आ रहा।

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