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बंगाल में अमित शाह के अगले शिकार हैं वामपंथी !

2016 बंगाल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और लेफ्ट साथ थे. इस चुनाव में TMC को पूर्ण बहुमत मिला था. TMC को लगभग 45 प्रतिशत वोट मिले थे. लेफ्ट को 27 और कांग्रेस को 12 प्रतिशत वोट मिले थे. वहीं बीजेपी को 10 प्रतिशत वोट मिले थे. इससे पहले अगर 2014 के लोकसभा चुनावों पर नजर डालें तो राज्य में TMC को 39 प्रतिशत वोट मिले. कांग्रेस को 10 प्रतिशत और लेफ्ट को 30 प्रतिशत वोट मिले. वहीं मोदी लहर के बीच बीजेपी को 16 प्रतिशत वोट मिले.

ध्यान देने की बात है कि इन दोनों चुनावों में लेफ्ट के वोट में 10 से 13 प्रतिशत की कमी आई है. कांग्रेस के वोट में ज्यादा कुछ बदलाव नहीं हुआ है. लेफ्ट का वोट छिटककर TMC और BJP को पास गया है. बड़ा हिस्सा TMC के पास और छोटा हिस्सा BJP के पास.

बंगाल के बारे में कहा जाता है कि यह जो सोचता है वो हिंदुस्तान सोचता है. बंगाल में जो परिवर्तन होता है वो बहुत ही कंक्रीट और लंबे समय तक टिकने वाला होता है. यही कारण रहा कि बंगाल में लगातार 35 साल तक लेफ्ट का शासन बना रहा. अब थोड़े वर्षों तक यहां TMC टिकी रहेगी. बीजेपी भी यहां आएगी, लेकिन उसमें अभी काफी समय है.

जाहिर है कि आने वाले लोकसभा चुनाव में लेफ्ट का वोट प्रतिशत और घटेगा. ऐसे में अगर कांग्रेस और लेफ्ट मिलकर चुनाव लड़ते हैं तो उनमें इतना तो दमखम है कि वो बीजेपी को 5 से 6 लोकसभा सीटों पर रोक सकते हैं. लेकिन लेफ्ट और कांग्रेस का गठबंधन होता हुआ दिख नहीं रहा है. लेफ्ट किसी भी तरह से ममता बनर्जी का समर्थन करने के लिए राजी नहीं है. वहीं कांग्रेस ममता को लेकर काफी लीनियंट है.

बहुत संभावना है कि कांग्रेस ममता के साथ गठबंधन कर ले. ऐसे में लेफ्ट के वोट प्रतिशत में और कमी आएगी. ऐसे में बीजेपी यही चाहेगी कि लेफ्ट से छिटका हुआ 5 से 7 प्रतिशत वोट पूरा का पूरा उसकी झोली में आ जाए. इस स्थिति में उसकी लोकसभा सीटों में 3 से 4 तक की बढ़ोतरी हो सकती है. यह बहुत संभव है. तो बंगाल में इसलिए ही बीजेपी अपना पूरा दमखम लगाए हुए है. वो बंगाल में लेफ्ट का स्थान लेना चाहती है. मुख्य विपक्षी पार्टी बनना चाहती है. इसलिए ही तो अमित शाह कह रहे हैं कि ममता से अच्छी वामपंथियों की सरकार थी. यह एक लांग टर्म आडियोलॉजिकल इन्वेस्टमेंट है

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