लोकवाणी

मुख़्तलिफ़ आवाज़, निगाह और विचार

Shyam Meera Singh

देश की जनता को उलझाने के लिए बीजेपी का अगला दाँव है जनसंख्या नियंत्रण कानून

‘देशभक्ति सिलेबस का ‘जनसंख्या कानून’ एक ऐसा चैप्टर है जिससे अच्छे से अच्छा मोहित हो जाए. विपक्ष के पास भी इसके विरोध में खास तर्क नहीं हैं. ये ऐसा इकतरफा मुद्दा है जिसमें मोदी-शाह की इकतरफा जीत तय है. लेकिन…

टीवी में जो दिखाया जा रहा है उसके इतर, जेनएयू पर हुए सरकारी हमले की इस क्रोनोलॉजी को पढ़िए

टीवी में जो दिखाया जा रहा है उसके इतर, जेनएयू पर हुए सरकारी हमले की इस क्रोनोलॉजी को पढ़ लीजिए… जेनएयू में असल में क्या हुआ है, ये सारी बातें आपको मोदी मीडिया नहीं बताएगा, क्योंकि जो एंकर आपके सामने…

इस नंगी पीठ को देख लीजिए, ये नंगी पीठ ही असल में भारत का नक्शा है!

इस नंगी पीठ को देख लीजिए। ये नंगी पीठ ही असल में भारत का नक्शा है। जामिया का ये लड़का नंगा बदन लिए हुए विश्वविद्यालय के गेट पर बैठा हुआ है। लड़के का कहना है कि “पुलिस और सरकार उन्हें…

मुर्शिदाबाद ट्रिपल मर्डर केस: RSS नहीं पैसों के कारण हुई थी हत्या? सीआईडी ने सुलझाई गुत्थी

बंगाल में आरएसएस कार्यकर्ता की हत्या का मामला सुलझ गया है. सीआईडी ने इस मामले की जांच में कुछ खुलासे किए हैं जिनसे ये कुछ बातें सामने आई हैं- 1.सीआईडी को बन्धु पाल के यहां एक डायरी मिली जिसमें उत्पल…

एक फोटो के कारण स्मृति इरानी के चरणों में लोटना या स्त्रीवाद का सुनहरा अध्याय बताना कितना सही?

जब आप किसी पार्टी या विचारधारा से जुड़े हुए होते हैं तो उसके फलस्वरूप आने वाले परिणामों के भी आप कहीं न कहीं जिम्मेदार माने जाते हैं। दक्षिणपंथ की जिस हिंदूवादी धारा का भाजपा नेतृत्व करती है उस विचारधारा ने सती प्रथा के समर्थन में राजा राममोहन राय के ऊपर पत्थर फेंके हैं। उस विचारधारा ने स्त्री शिक्षा की पहली नायिका सावित्रीबाई फुले पर फब्तियां कसी हैं। जिसने महिलाओं को शिक्षा देने की बात करने वाले ईश्वरचन्द्र विधा सागर की मूर्तियां तोड़ी हैं।

तेजबहादुर से डरकर मोदी ने अमित शाह से कहा, ‘रोको इस तेजबहादुर को, पूरा खेल बिगाड़ देगा!’

तेजबहादुर यादव के नामाकंन को रद्द करने के लिए जिन छुटमुट कारणों को गिनाया जा रहा है वह दिखाता है कि देश का लोकतंत्र अभी भी शैशव अवस्था में है, तेजबहादुर पर तो हमारी नजर गई है लेकिन बनारस में…

कन्हैया ने अखबारों में विज्ञापन देकर ऐसा क्या जुर्म कर दिया है जो सभी पानी पी-पीकर कोस रहे हैं?

बेगूसराय के स्थानीय अखबारों के मुख्य पेज पर आए कन्हैया कुमार के विज्ञापन पर खासा तंज किया जा रहा है जिसमें आलोचकों का मुख्य तर्क है कि क्या इस तरह कन्हैया कुमार पूंजीवाद से लड़ेंगे? लेकिन इस एक विज्ञापन के…

क्या नरेंद्र मोदी भी नेपोलियन की तरह जनता को युद्ध में झोंककर सत्ता में बने रहना चाहते हैं!

देश को युद्ध में डालकर अपने समर्थन में भीड़ जुटाना एक पुरानी रची और मंझी हुई टेक्निक है, नेपोलियन बोनापार्ट की आर्थिक नीतियां जब फेल होने लगीं तो उसकी लोकप्रियता में कमीं आने लगी, जनता का एक बड़ा हिस्सा नेपोलियन…