लोकवाणी

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Tribhuvan

बाबा साहब भीमराव अंबेडकर अगर आज होते तो देश के राजनीतिक दलों के हालात पर क्या कहते?

128 साल पहले जन्मे बाबा साहब भीमराव अंबेडकर ने भारतीय संविधान के निर्माण में असाधारण योगदान नहीं दिया होता तो आज इस देश के 20 करोड़ दलितों और 10 करोड़ आदिवासियों के हालात अमानुषिक होते। देश गृह युद्ध के दौर…

‘केसरी’ का कोहराम, सिख इतिहास का कत्ल और अक्षय कुमार का देशभक्त बनना!

उर्दू की मशहूर शायर परवीन शाक़िर का एक बहुत सुंदर शेर है : अपने क़ातिल की ज़ेहानत से परेशान हूँ मैं, रोज़ इक मौत नए तर्ज़ की ईजाद करे। कुछ ऐसा ही आजकल इस कालखंड में चल रहा है। अभी…

मनोहर पर्रिकर : वह दमदार संघी जिसने गोमांस का विरोध करने वालों को सबक सिखाया

गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर चले गए। उनके जाने पर जिस तरह की प्रतिक्रियाएं भाजपा और संघ की विचारधारा से इत्तिफ़ाक़ न रखने वाले लोगों तक ने व्यक्त कीं, वे उसके पात्र भी थे। कम लोग होते हैं, जो अपने…

मंटो का ख़त: जब मंटो ने नेहरू को लिखा, “मैं आपका पंडित भाई हूँ, मुझे बुला लीजिए”

देश के पहले प्रधानमंत्री और कांग्रेस के नेता पंडित जवाहरलाल नेहरू इस समय बहस के केंद्र में हैं। कुछ लोग उन्हें खलनायक साबित करने पर आमादा हैं तो कुछ उनका महिमा गान गा रहे हैं। पंडित नेहरू का व्यक्तित्व बेहद…

शीला तो राजनीति में दीक्षित हैं, लेकिन पत्रकारिता में दीक्षित क्यों कांग्रेस की शीला होने को आतुर हैं?

 इस समय कांग्रेस की नेता शीला दीक्षित कुछ ऐसे पत्रकारों के निशाने पर आ चुकी हैं, जो भाजपा-आरएसएस या नरेंद्र मोदी विरोधी हैं। वजह है उनका एक इंटरव्यू, जिसमें उन्होंने कह दिया, “मनमोहन सिंह… शायद मोदी जैसे मज़बूत और दृढ़…

क्या इस लिए हमारे जीनियस भारतीय पुलिस सेवा में जाते हैं?

भारतीय पुलिस सेवा का अपना इतिहास है। यह एक गर्वीली सेवा है। मैंने अपने पत्रकारिता के 35 साल के जीवन में अनेक मौक़ों पर आईपीएस अफ़सरों को सेना से भी अधिक सुयोग्य देखा है। लेकिन ताज़ा घटनाक्रम बताता है कि…