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रिपोर्ट

बाबा/लाला रामदेव का ज़मीन कब्जाने का खेल

कल बिजनेस स्टैंडर्ड में पत्रकार नितिन सेठी और कुमार संभव ने पतंजलि की बेनामी ज़मीन का बड़ा खुलासा किया है. इन पत्रकारों ने अपनी रिपोर्टिंग में यह तथ्य खोज निकाला कि पतंजलि समूह ने हरियाणा के फरीदाबाद में अरावली क्षेत्र में 400 एकड़ से ज्यादा की जमीन का अधिग्रहण किया है जबकि कायदे कानून के हिसाब से ऐसी जमीन को अधिग्रहित ही नहीं किया जा सकता है.

यह अरावली क्षेत्र वन भूमि का क्षेत्र है, यह गांव की साझा भूमि है. यह जमीन ऐसी जमीन है जिसपर ना तो खेती, व्यवसाय किया जा सके और ना ही किसी को कब्जा दिया जा सकता है. लेकिन उसके बावजूद केन्द्र और राज्य सरकार के नियमों में झोलझाल का फायदा उठा कर पतंजलि ग्रुप ने यहां की जमीन अधिग्रहित कर ली है। कहा जा रहा है कि इस भूमि का लेन-देन 2014 से 2016 के दौरान हुआ है।

2011 में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि गांव की साझा जमीन को ग्राम पंचायतों को वापस कर जाए और इसके साथ ही ऐसी किसी भी सेल को अवैध करार दिया था उसके बावजूद बाबा रामदेव की पतंजलि ने शैडो कंपनियां बना कर जमीन को अपने कब्जे में कर लिया.

बड़े से बड़ा मेगा फ़ूड पार्क तो 40 से 45 एकड़ में बनाया जा सकता है तो आखिर इन्हें इतनी जमीन किस लिए चाहिए?

हमने भी बहुत पहले ही लिख दिया था कि ‘लाला रामदेव देश के सबसे बड़े जमीन हड़पने वाले बाबा है, पहले के जमाने मे बाबा छोटे बच्चों को झोले में छिपाकर उठा ले जाते है, अब मॉडर्न बाबा बड़े ठसके के साथ देश के हर छोटे बड़े राज्य में जाते है और वहाँ के मुख्यमंत्री और प्रशासनिक अमले को इन्वेस्टर समिट में पटा कर ज़्यादा से ज्यादा जमीन कबाड़ता है, और उद्योग लगाने के नाम पर दस तरह के धतकरम करता है।’

कुछ साल पहले जब मध्यप्रदेश सरकार ने इसे मेगा फ़ूड पार्क के लिए पीथमपुर में 45 एकड़ जमीन देने की घोषणा की तो बाबा रामदेव ने इन्वेस्टर समिट के मंच पर बैठे उद्योगपतियों को शर्मसार करते हुए मध्यप्रदेश सरकार को ताना मारा क़ि, 45 एकड़ जमीन पर तो वह कबड्डी खेलते हैं।

दरअसल हर जगह इन्हें आवश्यकता से अधिक जमीन चाहिए और इस जमीन का टाइटिल भी अपने नाम पर रजिस्टर्ड चाहिए फ़ूड पार्क के नाम पर देश के हर बीजेपी शासित राज्य में इनके नाम जमीन कर दी गयी है। हिमाचल में 38 एकड़, मध्यप्रदेश में 40 एकड़, महाराष्ट्र में 600 एकड़, असम में 3800 हैक्टयर ओर भी राज्यो में बहुत सी जमीन यह अपने नाम अलॉट करवा चुके हैं। यहाँ तक कि नेपाल में 2007 में ट्रस्ट को रियायती दर पर मिली जमीने बिल्डर्स को बेच चुके हैं। राजस्थान में वसुंधरा सरकार द्वारा दी गयी जमीन का किस्सा तो ओर भी दिलचस्प है कभी फुर्सत में लिखुंगा। पर यदि आप जानना चाहते हैं कि हरियाणा में 400 एकड़ जमीन को कैसे पतंजलि ने एक्वायर्ड किया तो न्यूज़ क्लिक का यह वीडियो अवश्य देखें

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