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बजरंग दल अपनी संस्कृति को बचाने और वामपंथी पूंजीवादी सोच भगाने के लिये एक साथ मैदान में उतरे

फरवरी महीने की शुरूआत में बजरंग दल ने ‘कपल की पिटाई परियोजना’ के तहत 14 फरवरी की तैयारी करते हुए इंटर्नशीप के फार्म निकाले थे जिसके लिए लाखों कुंठित सिंगल युवाओं ने अप्लाई किया था। लेकिन बजरंग दल में चल रही फंड की कमी के कारण बहुतेरे युवा इस महत्वपूर्ण कार्य में भाग नहीं ले पाएंगे।

अभी तक पार्कों से कपल पीटने की कोई खबर नहीं आई है। बजरंग दल की धीमी गतिविधियों को लेकर हमने बजरंग दल के श्याम सिंह मथुरा वाले से बात की तो उनका कहना था,

“देखिए आज के दिन संस्कृति को बचाने और मोहब्बत का व्यापार करने वाली पूंजीवादी सोच का विरोध करने के लिए वामपंथियों से हमारा गठबंधन हुआ था लेकिन वामपंथी अभी तक पार्कों में नहीं पहुंचे हैं। अगर वो नहीं आए तो हम गठबंधन तोड़ देंगे।”

सवाल: बजरंग दल में फंड की कमी का क्या कारण है?

इस सवाल पर श्याम का कहना था, “देखिए इलेक्शन का साल है इसलिए हमारा सारा फंड भाजपा के अमित मोटा भाई ले उड़े हैं और भाजपा को सबसे अमीर पार्टी बना दिया है। इसलिए हमें थोड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।”

सवाल: आपने अमित मोटा भाई को बजरंग दल के पैसे ले उड़ने का विरोध नहीं किया।

इस सवाल के जवाब में बजरंग दल का कहना था, “भाजपा हमारे लिए गैर थोड़ी न है। आखिर भाजपा ने ही तो हम सिंगल लौंडों के भगवान नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाया है। आप यह मत सोचिए की जज लोया वाले कांड की वजह से हम अमित मोटा भाई से डर गए हैं। नहीं नहीं। अमित जी अच्छे आदमी हैं उन्होंने हमें इलेक्शन तक चुप रहने के लिए कहा है, इसलिए हम चुप हैं।”

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