लोकवाणी

मुख़्तलिफ़ आवाज़, निगाह और विचार

रिपोर्ट

बिहार के 3.5 लाख नियोजित टीचर्स को लगा बड़ा झटका!

गुंजन

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बिहार के 3.5 लाख नियोजित टीचर्स को लगा बड़ा झटका। ये वो बात बात है जो आज सुबह से खबरों में चल रही है। पर इसके पीछे एक लंबा संघर्ष है। जिसे देखेंगे तो पाएंगे कि चीजें इतनी आसान नहीं है जितनी लग रही है।

ये लड़ाई 10 साल पुरानी है, जब 2009 में बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ ने बिहार में नियोजित शिक्षकों के लिए समान काम समान वेतन की मांग पर एक याचिका पटना हाइकोर्ट में दाखिल की थी।

आठ साल तक चली लंबी सुनवाई के बाद पटना हाइकोर्ट ने साल 2017 में अपना फैसला बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के पक्ष में दिया और कहा कि बिहार के नियोजित शिक्षकों को सामान्य शिक्षकों की तरह ही समान काम के लिए समान वेतन मिलना चाहिए। पटना हाई कोर्ट के इस फैसले से बिहार सरकार पर 20,800 करोड़ों का अतिरिक्त बोझ आता।

फिर पटना हाईकोर्ट के इस फैसले के विरोध में नीतीश कुमार की बिहार सरकार सुप्रीम कोर्ट चली गई।

इसी साल जनवरी में प्रशांत किशोर के साथ हुई मुलाकात में उन्होंने बताया था कि किस तरह से बिहार में शिक्षा को लेकर राजनीति की जा रही है। शुरुआत में जब बिहार में सर्व शिक्षा अभियान के तहत विद्यालय बनने लगे उस वक्त बिहार में पढ़ाने के लिए शिक्षक नहीं थे। तो बिहार सरकार ने पंचायत स्तर पर कॉन्ट्रैक्ट बेस पर शिक्षकों की नियुक्ति करने का फैसला किया।

इस फैसले में बिना किसी मापदंड के, बिना किसी शर्त के शिक्षकों को ₹3000 महीने के मानदेय पर भर्ती किया गया। ऐसे शिक्षकों की संख्या 3 से 5 साल में 3.5 लाख हो गई। धीरे धीरे इन शिक्षकों ने आपस में संघ बनाया और एकजुट होकर समान काम के लिए समान वेतन की मांग उठा दी।

बिहार सरकार ने इन शिक्षकों को राहत देने का प्रयास किया जिसके तहत इन शिक्षकों को 3000 से बढ़ाकर 18000 से ₹22000 महीने दिए जाने लगे। उसके बावजूद इन शिक्षकों ने पटना हाई कोर्ट का रुख किया और समान काम के लिए समान वेतन की मांग पर अड़े रहे।

वर्तमान में बिहार सरकार का शिक्षा बजट 34,798 करोड़ का है। अगर कोर्ट का फैसला शिक्षकों के पक्ष में जाता तो इस बजट को 20,800 करोड़ और बढ़ाना पड़ता।

LEAVE A RESPONSE

Your email address will not be published. Required fields are marked *