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सोचिए, राहुल गांधी को विदेशी और हेमंत करकरे को देशद्रोही कहने वाले लोग कैसा भारत बनाएंगे!

उर्मिलेश

सत्ताधारी दल के एक प्रवक्ता को अभी टीवी पर बोलते सुना: ‘राहुल गांधी सामने आकर जवाब दें, क्या वो भारत के नागरिक हैं? वो ब्रिटिश नागरिक थे तो भारतीय नागरिक कब और कैसे बने?’

एक पत्रकार की हैसियत से मैं ‘पार्टी-पालिटिक्स’ पर लिखता और बोलता हूं। मेरी एक वैचारिकी या सोच भी है पर अपने 35 साल लंबे पत्रकारीय जीवन में मेरा किसी पार्टी या दल से कभी कोई रिश्ता या सांगठनिक सम्बन्ध नहीं रहा और आगे भी यही संभावना है! पत्रकार के रूप में सभी दलों की आलोचना की और कुछ अच्छा दिखा तो प्रशंसा भी!

दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि बीते पांच साल से मुझे अपने देश की सत्ताधारी पार्टी का रवैया लगातार और अभूतपूर्व ढंग से निराश व परेशान करता आ रहा है! पहले भी सत्ताधारी दलों से कई मुद्दों को लेकर निराशा होती थी! पर मौजूदा सत्ताधारियों के रुख और तौर तरीकों से मैं स्तब्ध हूं! ये कहां ले जा रहे हैं मुल्क को? सबसे दुखद है कि इन्हें समर्थन देने वाले लोगों का बड़ा हिस्सा इनकी करतूतों और ख़तरनाक रवैए से अनजान सा है!

अब देखिए, एक ताजा उदाहरण! मुख्य विपक्षी दल के प्रमुख राहुल गांधी की नागरिकता को ही अब संदिग्ध बनाने के षड्यंत्र में जुटे हुए हैं!

कैसी विडम्बना है, जिनका आजादी की लड़ाई में कहीं कोई उल्लेखनीय योगदान नहीं, जो आधुनिक भारत के निर्माण में शामिल ही नहीं रहे, वे आज किसी की नागरिकता को चुनौती दे रहे हैं तो किसी को पाकिस्तान जाने की सलाह दे रहे हैं! हमेशा हिंसा, सांप्रदायिकता, विभाजन और नफ़रत को जिन्होंने अपनी सियासत का औजार बनाया, आज वे अपने को राष्ट्रवाद के ठेकेदार के रूप में पेश कर रहे हैं!
उन्हें शर्म भी नहीं आती कि वे उस व्यक्ति की नागरिकता पर सवाल उठा रहे हैं, जिसका समूचा खानदान आजादी की लड़ाई का हिस्सा था और जिसके कई सदस्य लंबे समय तक ब्रितानिया हुकूमत की जेल में रहे, जिस खानदान से निकले देश के दो-दो प्रधानमंत्री आतंकी-हिंसा के शिकार हुए!

काश, देश की आम जनता कुत्सित सोच और जहरीले विचार से भरे इन लोगों से अतीत और वर्तमान में इनकी अपनी खतरनाक भूमिका पर सवाल करती! इनकी एक गेरुआधारी-उम्मीदवार जो आतंकी-हिंसा की अभियुक्त है, वह जमानत पर है पर अशोक चक्र से सम्मानित (मरणोपरांत) शहीद हेमंत करकरे को राष्ट्रद्रोही और न जाने क्या-क्या कह रही है! सिर्फ वही नहीं, लोकसभाध्यक्ष जैसे गरिमापूर्ण पद पर बैठीं इस दल की दूसरी नेता भी उसी तरह की शर्मनाक टिप्पणी कर रही हैं!

आप ही सोचिए, ऐसे लोग कैसा भारत बनायेंगे, कैसा शासन चलाएंगे? अच्छा और खुशहाल भारत बनाने के पक्षधर हैं तो जात-पात और धर्म-संप्रदाय से ऊपर उठकर सोचिए!

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