लोकवाणी

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कला एवं साहित्य

कश्मीर: कुछ सवाल

महेंद्र सिंह पूनिया ने यह कविता साल 1998 में लिखी थी महेन्द्र सिहं पूनिया क्या चिनार के पेड़ पर एक भी पत्ता नहीं है आबरुरेज़ा दोशीज़ा का तन ढकने को? क्यों झुक गया है पोपलर का आकाश में तना हुआ…

प्रेमचंद आज जीवित होते तो उनकी कलम शूली पर लटका दी जाती या तोड दी जाती!

प्रेमचंद आज जीवित होते तो उनकी कलम शूली पर लटका दी जाती या तोड दी जाती, क्योंकि उनका कहना था… “वास्तव में संस्कृति की पुकार केवल ढ़ोंग है, निरा पाखंड। और इसके जन्मदाता भी वही लोग हैं, जो साम्प्रदायिकता की…

प्रेमचंद जयंती विशेष: सवा शेर गेहूँ

प्रेमचंद की प्रासंगिकता हमारे समाज में तब तक है, जब तक किसान बदहाल हैं। जब तक मज़दूरों को उचित मजूरी नहीं मिलती। जब तक अंधविश्वास लोगों को नहीं छोड़ता। प्रेमचंद की कलम जनपक्षधर थी।–सत्यानंद प्रेमचंद किसी गाँव में शंकर नाम…

नामवर सिंह जन्मदिन विशेष: उन्नीसवीं सदी का भारतीय पुनर्जागरण: यथार्थ या मिथक

आज आलोचक नामवर सिंह का जन्मदिन है। नामवर जी ने राजकोट विश्वविद्यालय के अँग्रेजी एवं तुलनात्मक अध्ययन विभाग में उन्नीसवीं शताब्दी के पुनर्जागरण पर एक व्याख्यान दिया था। यह व्याख्यान हिंदी में तो कहीं प्रकाशित नहीं हुआ, लेकिन अँग्रेजी में…

हे 62 कलाकारों, तुम्हारे कुकर्मों के लिए आने वाली पीढ़ियों को ज़िल्लत भरी ज़िंदगी बितानी न पड़ जाए

49 कलाकारों ने प्रधान मंत्री को पत्र लिखा कि देश में लगातार बढ़ रही ‘मॉब लिंचिंग’ की घटनाएँ रोकी जानी चाहिए, और इस माहौल पर चिंता जाहिर की कि ‘जय श्रीराम’ एक युद्धघोष बनता जा रहा है। इसपर 62 कलाकारों…

गिरफ्तार पत्रकार रूपेश कुमार द्वारा जेल से लिखी गईं कविताएं पढ़िए

उपकारा शेरघाटी (गया, बिहार) से भेजी गई स्वतंत्र पत्रकार रूपेश कुमार सिंह की 5 कविताओं में से दो कविताएं यहां प्रस्तुत की जा रही हैं, पढ़ी जाएं कामरेड जूलियस फ्यूचिक तुम बहुत याद आते हो। जब मुझे और मेरे साथियों…

संवेदनात्मक ब्राह्मणवाद’ परोसती फिल्म- ‘आर्टिकल 15’

पिछड़े मूल्य परोसने वाली बहुत सारी फिल्मों की भीड़ में आर्टिकल 15 अच्छी फिल्म है, जिसमें विदेश में पढ़ा एक ब्राह्मण पुलिस अधिकारी जाति के सवालों से टकराता है और उसे एक नायक की ही तरह अकेले हल भी करता…

फ़िल्म रिव्यु: Article 15

अभिषेक श्रीवास्तव अभी कल ही सफर के दौरान बनारस फ्लाइओवर हादसे पर ओमप्रकाश दीवाना का बिरहा सुनते हुए मन में खयाल आ रहा था कि पॉलिटिक्स को समझाने के लिए कल्चर का फॉर्म यानी सांस्कृतिक स्वरूप और उसे प्रसारित करने…

जन्मदिन विशेष: ओमप्रकाश वाल्मीकि को पढ़कर देखिए, साहित्य क्या होता है? पता लग जाएगा

ओमप्रकाश वाल्मीकि का जन्म 30 जून 1950 को ग्राम बरला, जिला मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश में हुआ। उनका बचपन सामाजिक एवं आर्थिक कठिनाइयों में बीता। उन्हें अनेक आर्थिक, सामाजिक और मानसिक कष्ट व उत्पीड़न झेलने पड़े। हमारे समाज की दिक्कत यह…

बाबा नागार्जुन जन्मदिन विशेष: युगों का यात्री और हमारा आधुनिक कबीर

आज जनकवि बाबा नागार्जुन का जन्म दिन है. हिन्दी कविता के आधुनिक कबीर, जनकवि नागार्जुन 1911 में बिहार के दरभंगा जिले के तरौनी गांव में जन्मे और उन्होंने गांव से निकल कर देशभर में खूब यायावरी की, अनेक जनांदोलनों में उन्होंने…