लोकवाणी

मुख़्तलिफ़ आवाज़, निगाह और विचार

कला एवं साहित्य

गिरफ्तार पत्रकार रूपेश कुमार द्वारा जेल से लिखी गईं कविताएं पढ़िए

उपकारा शेरघाटी (गया, बिहार) से भेजी गई स्वतंत्र पत्रकार रूपेश कुमार सिंह की 5 कविताओं में से दो कविताएं यहां प्रस्तुत की जा रही हैं, पढ़ी जाएं कामरेड जूलियस फ्यूचिक तुम बहुत याद आते हो। जब मुझे और मेरे साथियों…

संवेदनात्मक ब्राह्मणवाद’ परोसती फिल्म- ‘आर्टिकल 15’

पिछड़े मूल्य परोसने वाली बहुत सारी फिल्मों की भीड़ में आर्टिकल 15 अच्छी फिल्म है, जिसमें विदेश में पढ़ा एक ब्राह्मण पुलिस अधिकारी जाति के सवालों से टकराता है और उसे एक नायक की ही तरह अकेले हल भी करता…

फ़िल्म रिव्यु: Article 15

अभिषेक श्रीवास्तव अभी कल ही सफर के दौरान बनारस फ्लाइओवर हादसे पर ओमप्रकाश दीवाना का बिरहा सुनते हुए मन में खयाल आ रहा था कि पॉलिटिक्स को समझाने के लिए कल्चर का फॉर्म यानी सांस्कृतिक स्वरूप और उसे प्रसारित करने…

जन्मदिन विशेष: ओमप्रकाश वाल्मीकि को पढ़कर देखिए, साहित्य क्या होता है? पता लग जाएगा

ओमप्रकाश वाल्मीकि का जन्म 30 जून 1950 को ग्राम बरला, जिला मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश में हुआ। उनका बचपन सामाजिक एवं आर्थिक कठिनाइयों में बीता। उन्हें अनेक आर्थिक, सामाजिक और मानसिक कष्ट व उत्पीड़न झेलने पड़े। हमारे समाज की दिक्कत यह…

बाबा नागार्जुन जन्मदिन विशेष: युगों का यात्री और हमारा आधुनिक कबीर

आज जनकवि बाबा नागार्जुन का जन्म दिन है. हिन्दी कविता के आधुनिक कबीर, जनकवि नागार्जुन 1911 में बिहार के दरभंगा जिले के तरौनी गांव में जन्मे और उन्होंने गांव से निकल कर देशभर में खूब यायावरी की, अनेक जनांदोलनों में उन्होंने…

लघुकथा: अल्लाह करे तुम सबकी ‘लिंचिंग’ हो जाए

असग़र वजाहत बूढ़ी औरत को जब यह बताया गया कि उसके पोते सलीम की ‘लिंचिंग’ हो गई है तो उसकी समझ में कुछ न आया। उसके काले, झुर्रियों पड़े चेहरे और धुंधली मटमैली आंखों में कोई भाव न आया। उसने…

#KabirSingh: ‘रेप की कोशिश’ करने वाला हीरो कैसे बना?

 सिन्धुवासिनी “अगर वो मेरी नहीं हुई तो उसे किसी और की नहीं होने दूंगा.” “और अगर तेरी हो गई तो सबकी होने देगा?” हाहाहहाहाहा! ‘जोक’ पढ़ लिया, अब आगे पढ़िए. वैधानिक चेतावनी: इस फ़िल्म की शूटिंग के दौरान किसी महिला…

सुरजन: सफर 1947 शेखुपुरा से करनाल

                     इतिहास हमें जहां जीवन में एक अच्छा और मजबूत बनाने की शिक्षा देता है, वही ये भी सिखाता है कि हम कोई ऐसी गलती ना दुबारा ना दोहराएं जो हमारे,…

जन्मदिन विशेष: नरगिस को भारतीय सिनेमा का चांद कहें या सूरज या भारतीय सिनेमा की सम्पूर्ण अभिनेत्री

सुनील दत्ता ———————————–पंक्षी बनू उडती फिरू मस्त गगन आज नया राग हूँ दुनिया के चमन में कजरारी आँखों में सम्पूर्ण भाव अभिव्यक्ति के साथ मोहक अंदाज में अपनी मुस्कान लिए हिंदी सिनेमा की एक दिलकश व निराली व्यक्तित्व की मलिका…

प्रेस क्लब का दारोगा

चंद्र प्रकाश झा हिन्दुस्तान के किसी सूबे की राजधानी में कभी किसी राष्ट्रीय समाचार संस्थान के एक ब्यूरो प्रमुख थे. सब उन्हें ठाकुर साहिब कहते थे. वह उस संस्थान के किसी जिले के अंशकालिक संवाददाता के काम से उसके राज्य…