लोकवाणी

मुख़्तलिफ़ आवाज़, निगाह और विचार

इतिहास

चासनाला की खूनी खदान जो 375 मज़दूरों को निगल गई थी, इसी से प्रेरित थी फ़िल्म “काला पत्थर”

27 दिसंबर 1975 को झारखंड के धनबाद से 20 किलोमीटर दूर चासनाला में, कोल इंडिया के अंतर्गत आनेवाली ‘भारत कोकिंग कोल लिमिटेड’ की चासनाला खान के पिट संख्या 1 और 2 के ठीक ऊपर स्थित एक बड़े तालाब में जमा…

जब 2007 वर्ल्ड कप में चिरकुट मानी जाने वाली बांग्लादेश टीम ने इंडियन टीम को हराया था

साल 2007. तारीख़ 17 मार्च. वेस्ट इंडीज़ का पोर्ट ऑफ स्पेन. साढ़े नौ हज़ार के करीब दर्शकों से भरा मैदान. मुक़ाबला था ग्रुप-बी की दो बिल्कुल ही अलग स्तर की टीमों का. भारत और बांग्लादेश. टूर्नामेंट में दोनों ही टीमों…

मंटो का ख़त: जब मंटो ने नेहरू को लिखा, “मैं आपका पंडित भाई हूँ, मुझे बुला लीजिए”

देश के पहले प्रधानमंत्री और कांग्रेस के नेता पंडित जवाहरलाल नेहरू इस समय बहस के केंद्र में हैं। कुछ लोग उन्हें खलनायक साबित करने पर आमादा हैं तो कुछ उनका महिमा गान गा रहे हैं। पंडित नेहरू का व्यक्तित्व बेहद…

सावित्री बाई फुले अकेले ही भारत की करोड़ों औरतों के लिए दीवार बन कर खड़ी हो गई थीं

दो साड़ी लेकर जाती थीं। रास्ते में कुछ लोग उन पर गोबर फेंक देते थे। गोबर फेंकने वाले ब्राह्मणों का मानना था कि शूद्र-अतिशूद्रो को पढ़ने का अधिकार नहीं है। घर से जो साड़ी पहनकर निकलती थीं वो दुर्गंध से…

भारतीय मध्य वर्ग और युद्धोन्मादी अंधराष्ट्रवाद के बारे में कुछ स्फुट विचारणीय बातें …

अंधराष्ट्रवादी युद्धोन्माद की लहर हिन्दी पट्टी में, यानी उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड, बिहार, झारखण्ड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, हरियाणा में ही सर्वाधिक तूफ़ानी बनकर बहती है। दक्षिण के राज्यों में इसका प्रभाव सबसे कम दिखाई देता है। उनमें भी केरल में…

क्या नरेंद्र मोदी भी नेपोलियन की तरह जनता को युद्ध में झोंककर सत्ता में बने रहना चाहते हैं!

देश को युद्ध में डालकर अपने समर्थन में भीड़ जुटाना एक पुरानी रची और मंझी हुई टेक्निक है, नेपोलियन बोनापार्ट की आर्थिक नीतियां जब फेल होने लगीं तो उसकी लोकप्रियता में कमीं आने लगी, जनता का एक बड़ा हिस्सा नेपोलियन…

भगतसिंह का लेख: अछूत समस्या | मोदी ने अगर यह लेख पढ़ा होता तो पांव धोकर हेडलाइन न बनते

काकीनाडा में 1923 मे कांग्रेस-अधिवेशन हुआ। मुहम्मद अली जिन्ना ने अपने अध्यक्षीय भाषण मे आजकल की अनुसूचित जातियों को, जिन्हें उन दिनों ‘अछूत’ कहा जाता था, हिन्दू और मुस्लिम मिशनरी संस्थाओं में बाँट देने का सुझाव दिया। हिन्दू और मुस्लिम…

चौधरी छोटूराम: जिसने आज़ादी से पहले किसान-मज़दूरों के कदमों में सारे हक़ लाकर रख दिए थे

राकेश सांगवान “ खुदा के बन्दे हजारों देखें , बणों में फिरते मारे-मारे मैं तो उसका बंदा बनूँगा जिसको खुदा के बन्दों से होता प्यार “ सैंट स्टीफन स्कूल (दिल्ली) के हॉस्टल में करीब 24 देहाती परिवेश के बच्चे रहते…

दुल्ला भट्टी और लोहड़ी हिन्दू-मुस्लिम-सिख, किसान और मज़दूर एकता की अटूट मिसाल हैं

अकबर के शासन काल में कुछ किसानों ने अकबर के सामने घुटने टेकने के बजाय विद्रोह का रास्ता अपनाया और जंगलों में रह कर शाही फ़ौज के साथ छापे मार लड़ाई की। इन्हीं बगावती किसानों में सबसे ज्यादा प्रसिद्द हुए…

भगत सिंह के विचारों के ख़िलाफ़ संघ ने हमेशा मकड़जाल बुना है

28 सितम्बर को भगत सिंह के जन्मदिन पर भाजपा की आईटीसेल के एक नौजवान कार्यकर्ता का ट्वीट देखा। जिसमें उस नौजवान ने उन्हें नमन करते हुए #RSS #IndianArmy #bhagatsingh ये तीन हैशटैग लगा रखे थे। शायद उस नौजवान को यह नहीं पता…