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इतिहास

नरेंद्र मोदी का बयान, पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी और राजनीति के पेंच

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के बारे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बेहद अशोभनीय बयान दिया है. इस संदर्भ में स्वर्गीय गांधी के कार्यकाल और तत्कालीन राजनीतिक परिदृश्य तथा पत्रकारिता पर एक लंबी टीप Prakash K Ray पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी…

कार्ल मार्क्स जन्मदिन विशेष: मार्क्स क्रान्तिकारियों के शिक्षक और गुरु

विल्हेल्म लीबनेख़्त “मूर” (दोस्तों के बीच मार्क्स का नाम) हम “तरुणों” से 5 या 6 साल ही बड़े थे, लेकिन हमारे सम्बन्ध में अपनी परिपक्वता की गुरुता का उन्हें पूरा एहसास था और हम लोगों की, ख़ासकर मेरी, जाँच के…

मज़दूर दिवस विशेष: क्या है मई दिवस की कहानी?

मज़दूरों का त्योहार मई दिवस आठ घण्टे काम के दिन के लिए मज़दूरों के शानदार आन्दोलन से पैदा हुआ। उसके पहले मज़दूर चौदह से लेकर सोलह-अठारह घण्टे तक खटते थे। कई देशों में काम के घण्टों का कोई नियम ही…

मज़दूर दिवस विशेष: वानर के नर बनने में श्रम की भूमिका – फ्रेडरिक एंगेल्स

फ्रेडरिक एंगेल्स (1876) मनुष्य के हाथ श्रम की उपज हैं। अर्थशास्त्रियों का दावा है कि श्रम समस्त संपदा का स्रोत है। वास्तव में वह स्रोत है, लेकिन प्रकृति के बाद। वही इसे वह सामग्री प्रदान करती है जिसे श्रम संपदा…

व्लादिमीर लेनिन जन्मदिन विशेष: जब भगतसिंह ने कहा, ‘बस, ज़रा लेनिन से मिल लूँ’

लेनिन के आदर्शों पर भगत सिंह के भरोसे और ख़ुद को फाँसी नहीं गोली से उड़ाने की लिखित अपील। भगत सिंह, सुखदेवा और राजगुरु की फाँसी के लिए 24 मार्च की सुबह का समय तय किया गया था, लेकिन देश…

हिटलर भी बिन परिवार का फ़कीर था, विध्वंस कर झोला उठाकर चला गया

नितिन ठाकुर/नवमीत नव आज एडोल्फ हिटलर का जन्मदिन है। वरिष्ठ पत्रकार नितिन ठाकुर लिखते हैं कि हिटलर को इसलिए याद रखना चाहिए ताकि दुनिया में हमारी लापरवाही के चलते फिर कभी कोई हिटलर ना पैदा हो जाए। हिटलर पर कुछ…

चंद्रशेखर संसद में डिग्निटी के साथ बहस करना और उसका हिस्सा होना जानते थे

पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर का अपना पैमाना है, वो मेयारे-ज़माना से कभी घबराए नहीं। वो एक बात अक्सर कहते थे, “तानाशाही और लोकतंत्र में समझौता नहीं हो सकता”। कई बिंदुओं पर उनसे बेहद गहरी मतभिन्नता के बावजूद उनकी बेबाकी को सलाम…

जाट और आरएसएस (संघ) का संग? चौधरी छोटूराम ने कैसे संघ की खाट खड़ी कर दी थी

राकेश सांगवान आजकल देश में हर तरफ आरएसएस यानि संघ के चर्चे हैं. आज से कुछ साल पहले तक आरएसएस शहरियों का संगठन कहलाता था, देहात में तो शायद ही इसके बारे में लोग जानते थे, पर अब इससे देहात…

जलियांवाला बाग हत्याकांड के 100 साल पूरे: क्या आज भी काले कानूनों के जरिए जनता का दमन जारी है

आज बैशाखी ही है, 13 अप्रैल 1919 को भी बैशाखी ही थी, जब लोग जलियांवाला बाग में इकट्ठा होकर अंग्रेजी निज़ाम की ज़्यादतियों और काले कानूनों पर चर्चा कर रहे थे। लेकिन अंग्रेजी निज़ाम सत्ता के नशे में चूर था।…

जन्मदिन विशेष: महात्मा ज्योतिबा फुले के ये आठ किस्से हर भारतीय को पढ़ने चाहिए

आज जब संघी फासीवादी जातिप्रथा व पितृसत्ता के आधार पर व साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण से दलितों, स्त्रियों व अल्पसंख्यकों पर हमले तीव्र कर रहे हैं तब फुले को याद करने का विशेष औचित्य है। -Mukesh Aseem लेखक: प्रद्युम्न यादव ज्योतिबा फुले…