लोकवाणी

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इतिहास

क्या महात्मा गांधी ने भगत सिंह को बचाने के कोई प्रयास नहीं किये?

नितिन ठाकुर “गांधी पर भगत सिंह को ना बचाने के आरोप पर इतिहासकार सुधीरचंद्र साफ़ कहते हैं कि…. गांधी ने लॉर्ड इरविन से तीनों क्रांतिकारियों की फांसी माफ़ करने के लिए अनुरोध किया था, मगर वो नाकाम रहे. अंग्रेज़ों ने…

भीड़ हिंसा एक राष्ट्रीय बीमारी का लक्षण: महात्मा गांधी

अव्यक्त तबरेज़ को पीट-पीटकर मारनेवाली भीड़वादी मानसिकता पर मन-ही-मन क्रूरतापूर्वक मुस्कुरा रहे लोग खुद अपने लिए भी ऐसी ही मौत चुन रहे हैं। वे अपने मासूम बच्चे-बच्चियों के लिए भी ऐसी ही मौत चुन रहे हैं। क्योंकि एक बार जब…

जन्मदिन विशेष: चे ग्वेरा की भारत यात्रा, कुछ ऐसा दिखा था चे ग्वेरा को भारत

नितिन ठाकुर बेतरतीब दाढ़ी, सितारे लगी टोपी, मुंह में सिगार और पांव में ऊंचे जूते.. ये आदमी कई पीढ़ियों के ज़हन में है। भले नाम तुरंत याद ना आए तो भी कोई नहीं कह सकता कि मैंने इस आदमी को…

चौधरी चरण सिंह पुण्यतिथि विशेष: किसानों को सत्ता तक पहुंचाने वाले राजनीति के असली चौधरी

अभिषेक लाकड़ा/मनोहर सैनी चौधरी चरण सिंह का जन्म 1902 में उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के नूरपुर में एक मध्यम वर्गीय किसान परिवार में हुआ था। उन्होंने 1923 में विज्ञान से स्नातक की एवं 1925 में आगरा विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर…

जयंती विशेष: सावरकर को वीर कहना इस विशेषण के साथ अन्याय है

आज विनायक दामोदर सावरकर की जयंती है। संघ समर्थित सरकार और विचारधारा ग्रस्त लोग उन्हें लगातार वीर की उपाधि से नवाज़ते रहे हैं। ऐसे में जरूरी हो जाता है कि उनके जीवन पर नज़र डाली जाए। यहां उनके जीवन पर…

नेहरू को सलीब पर टांग दिया गया है और गिद्ध उनका मांस नोच रहे हैं, फिर भी नेहरू कभी मरेंगे नहीं

पीयूष बबेले नेहरू की कथा कहता हूं जब जब नेहरू का जिक्र आता है तो मुझे यूनान के एक पुराने देवता प्रोमीथियस, जिसे हिंदी में प्रमथ्यु भी कहते हैं, की कथा याद आती है. प्रोमीथियस स्वर्ग से धरती को देखता…

नरेंद्र मोदी का बयान, पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी और राजनीति के पेंच

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के बारे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बेहद अशोभनीय बयान दिया है. इस संदर्भ में स्वर्गीय गांधी के कार्यकाल और तत्कालीन राजनीतिक परिदृश्य तथा पत्रकारिता पर एक लंबी टीप Prakash K Ray पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी…

कार्ल मार्क्स जन्मदिन विशेष: मार्क्स क्रान्तिकारियों के शिक्षक और गुरु

विल्हेल्म लीबनेख़्त “मूर” (दोस्तों के बीच मार्क्स का नाम) हम “तरुणों” से 5 या 6 साल ही बड़े थे, लेकिन हमारे सम्बन्ध में अपनी परिपक्वता की गुरुता का उन्हें पूरा एहसास था और हम लोगों की, ख़ासकर मेरी, जाँच के…

मज़दूर दिवस विशेष: क्या है मई दिवस की कहानी?

मज़दूरों का त्योहार मई दिवस आठ घण्टे काम के दिन के लिए मज़दूरों के शानदार आन्दोलन से पैदा हुआ। उसके पहले मज़दूर चौदह से लेकर सोलह-अठारह घण्टे तक खटते थे। कई देशों में काम के घण्टों का कोई नियम ही…

मज़दूर दिवस विशेष: वानर के नर बनने में श्रम की भूमिका – फ्रेडरिक एंगेल्स

फ्रेडरिक एंगेल्स (1876) मनुष्य के हाथ श्रम की उपज हैं। अर्थशास्त्रियों का दावा है कि श्रम समस्त संपदा का स्रोत है। वास्तव में वह स्रोत है, लेकिन प्रकृति के बाद। वही इसे वह सामग्री प्रदान करती है जिसे श्रम संपदा…