लोकवाणी

मुख़्तलिफ़ आवाज़, निगाह और विचार

राजनीति

मोदी को मिले जनादेश के साथ ‘प्रचंड’ विशेषण जुड़ना कोई कामयाबी है या चिंता?

हेमंत कुमार झा विश्व इतिहास के कई अध्याय हमें सचेत करते हैं कि हर जनादेश स्वागत के लायक नहीं होता, भले ही लोकतांत्रिक विवशताओं और मर्यादाओं के तहत आप सिर झुका कर उसे स्वीकार करें। ऐसे जनादेश के साथ अगर…

अतिशी या दीपेंदर हूडा जैसे प्रत्यशियों की हार और प्रज्ञा ठाकुर की जीत से क्या साबित हुआ?

श्याम मीरा सिंह पिछले दो लोकसभा चुनावों से साफ हो चुका है कि आम चुनावों में विचारधाराएं महत्वपूर्ण हो चली हैं। जहां प्रत्याशी गौण होता जा रहा है। यही कारण है कि आतिशी हारती हैं और प्रज्ञा भारती और साक्षी…

2002 का ‘घृणा का नायक’, 2014 का ‘सबका साथ-सबका विकास’ और अब ‘डिवाइडर इन चीफ’

मनीष सिंह मीडिया का फैसला वही हैं, जिनकी उम्मीद थी। मीडिया के ताजे इतिहास को देखते हुए एग्जिट पोल के ऐसे आंकड़े अचम्भे की बात नहीं है। सवाल तो अब भी मौजूं है कि 23 को मोदी सरकार रीपीट होगी…

अगर ईवीएम से चुनाव परिणाम प्रभावित हुए तो दोष भाजपा का नहीं, बल्कि विपक्षी दलों का है

न न! इस बार ईवीएम पर कुछ भी नहीं लिखूंगा चाहे कुछ भी परिणाम आए! कैसे भी तथ्य सामने आएंं! ऐसा नहीं है कि मैं यह मानने लगा हूँ कि ईवीएम पवित्र है और ईवीएम में छेड़छाड़ नहीं हो सकती,…

एग्जिट पोल: मीडिया 5 सालों से टुकड़ों पर पल रहा है तो कैसे रिजल्ट से पहले ही गुर्राने लगे?

ये एग्जिट पोल है, पोस्ट पोल सर्वे नहीं है. पोस्ट पोल हमेशा मतदान के अगले दिन या फिर एक-दो दिन बाद होते हैं। इसके माध्यम से वोटर की राय जानने की कोशिश की जाती है। कहा जाता है कि पोस्ट…

शिव का अनादर है प्रधानमंत्री का लाल कालीन पर चलकर उन तक जाना

रवीश कुमार सब कुछ ड्रामा जैसा लगता है। सारा ड्रामा इस यक़ीन पर आधारित है कि जनता मूर्ख है। उसे किसी बादशाह पर बनी फिल्म दिखाओ या ऐसा कुछ करो कि जनता को लगे कि वह किसी बादशाह को देख…

प्रेस कॉन्फ्रेंस के नाम पर की गई नौटंकी के लिए नरेंद्र मोदी को याद किया जाएगा!

श्याम मीरा सिंह इस तस्वीर को सेव कर लीजिए। तानाशाही के दौर की ये अबतक की सबसे खूबसूरत तस्वीर है। कल्पना कीजिए किसी यूरोपीय देश की जनता ने किसी शख्स को 5 साल शासन करने के लिए चुना होता। पांच…

साफ नहीं है आम चुनाव के बाद की तस्वीर

चंद्र प्रकाश झा सत्रहवीं लोक सभा चुनाव के सातवें एवं अंतिम चरण में सात राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश की 59 सीटों के लिए रविवार 19 मई को वोटिंग समाप्त होते ही सदन के कुल 543 निर्वाचन क्षेत्रों में…

भारतीय लोकतंत्र की व्यावहारिक परिभाषा, ‘अमीरों का, अमीरों के लिए, मगर गरीबों द्वारा’ है!

कृष्ण कांत आदरणीय प्रधानमंत्री जी, नमस्ते. आप और राहुल गांधी जब गरीब किसान और आम आदमी की बातें करते हैं, तो यह बेहद अश्लील लगता है. मौजूदा लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा और कांग्रेस के 83 फीसदी से ज्यादा प्रत्याशी…

ईश्वर चंद्र विद्यासागर की मूर्ति तोड़ने वाले संघी समाज को अंधविश्वासों में फंसाना चाहते हैं!

पश्चिम बंगाल में कल अमित शाह के रोड शो के दौरान BJP-TMC कार्यकर्ताओं में लड़ाई हो गई. इसी दौरान उपद्रवियों ने विद्यासागर कॉलेज में ईश्वर चंद्र विद्यासागर की प्रतिमा को तोड़ दिया. शाह की रैली के बाद हुई हिंसा और…