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पी. चिदंबरम: भ्रष्टाचार के बहाने मज़लूमो की हाय का शिकार, गिरफ्तार हुए तो इनके चेहरे खिल उठे

अन्सार इन्दौरी चौबीस घंटे से अधिक हाई प्रोफइल ड्रामे के बाद सीबीआई ने बुधवार को भारत के पूर्व गृहमंत्री पी. चिदंबरम को गिरफ्तार कर लिया। ये वही पी. चिदंबरम हैं जिनका अपने ज़माने में सोचना था कि हमारे यहां आतंकवाद…

मोदी जी भ्रष्टाचार पर जनता को न उल्लू बनाओ और न कानूनों को कमजोर करो

कृष्णकांत भ्रष्टाचार एक ऐसी लड़ाई है जो भारत में जनता को उल्लू बनाने के लिए लड़ी जाती है। मजे की बात है कि नरेंद्र मोदी एक भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के बाद, भ्रष्टाचार को ही मुद्दा बनाकर प्रधानमंत्री बने। वे आज…

एकता थोपी हुई नहीं होती और अगर थोपी जाती है तो वह एकता नहीं होती

हेमंत कुमार झा जो लोग “एक विधान, एक निशान” की बातें करते हुए उत्साह और उन्माद से भर कर इसे राष्ट्रीय एकता से जोड़ते हैं वे अर्द्धसत्य ही नहीं, भ्रामक सत्य का प्रचार कर रहे हैं। एकता थोपी हुई नहीं…

विलय के बाद भी कश्मीर भारत का क्यों न हो सका?

राहुल कोटियाल ‘मैं सोने जा रहा हूं. कल सुबह अगर तुम्हें श्रीनगर में भारतीय सैनिक विमानों की आवाज़ सुनाई न दे, तो मुझे नींद में ही गोली मार देना.’ यह बात आज से ठीक 70 साल पहले, 26 अक्टूबर 1947…

ट्रंप को माथे पर बिठाने से यही हासिल होना था!

अनिल जैन कश्मीर मसले को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता करने संबंधी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बयान सच हो या झूठ, फिलहाल तो उसने भारतीय कूटनीति और नेतृत्व को सवालों के घेरे और बचाव की मुद्रा में…

भाजपा-कर्नाटक और अनैतिक खेल, समय कम और उद्देश्य बड़ा है

हेमन्त कुमार झा वे अपने राजनीतिक इतिहास के सबसे खुशनुमा दौर से गुजर रहे हैं। अपेक्षाओं से भी अधिक जनसमर्थन मिला है उन्हें। केंद्र के साथ ही अधिकतर राज्यों में उन्हीं की सरकारें हैं। फिर… वे इतने हलकान क्यों हैं?…

सरकार मेहरबान तो बाबा पहलवान, किसान बेशक रहे परेशान

योग को घर-घर पहुंचाते हुए योग गुरु रामदेव न केवल योग के, बल्कि मैंगो कैैंडी से लेकर नूडल्स, बिस्किट, कपड़ों और आयुर्वेदिक दवाओं के व्यापारी भी बन गए। बहुत जल्द उन्होंने अपने व्यापार को करोड़ों के टर्नओव्हर तक पहुंचा दिया…

सबकुछ काफी ठीक है बस अर्थव्यवस्था में नौकरी, सैलरी और सरकार के पास पैसे नहीं हैं

रवीश कुमार जून में निर्यात का आंकड़ा 41 महीनों में सबसे कम रहा है। आयात भी 9 प्रतिशत कम हो गया है। जो कि 34 महीने में सबसे कम है। सरकार मानती है कि दुनिया भर में व्यापारिक टकरावों के…

लोकतन्त्र के ढहते स्तम्भ, मरते बच्चे और बढ़ता विकास

सीमा आजाद विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका और प्रेस-इन चारों को लोकतन्त्र का चार स्तम्भ माना गया है, जो आज एक-एक कर ढहता हुआ साफ दिखाई दे रहा है। खासतौर पर पिछले महीने में पत्रकारों पर जिस तरीके के हमले किये गये…

राहुल गांधी को सफलता-असफलता की बातें छोड़ संघर्ष जारी रखना होगा

कृष्णकांत विभाजन की असफलता के बाद भी गांधी, पटेल, नेहरू आधुनिक भारत के नायक बने. मात्र 23 साल की उम्र में जिस बच्चे ने माफी की ​जगह फांसी चुनी, वह इस देश का हीरो है. पोरस, महाराणा प्रताप, रानी लक्ष्मीबाई,…