लोकवाणी

मुख़्तलिफ़ आवाज़, निगाह और विचार

रिपोर्ट

बेटा-बेटी, जवांई, नाती क्या, एक कुनबा काम न आएगा..

वशीम अली माइकल जैक्सन 150 साल जीना चाहता था। किसी से साथ हाथ मिलाने से पहले दस्ताने पहनता था! लोगों के बीच में जाने से पहले मुंह पर मास्क लगाता था ! अपनी देखरेख करने के लिए उसने अपने घर…

बिल चुकाने के लिए पैसा नहीं बचा तो अस्पताल ने 80 वर्षीय मरीज बिस्तर से बांध दिया

बिल चुकाने के लिए पैसा नहीं बचा तो अस्पताल ने 80 वर्षीय मरीज बिस्तर से बांध दिया. इन्हें मध्य प्रदेश के शाजापुर सिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया था. पांच दिन भर्ती रहे. परिजनों ने दो बार में 11 हजार…

नागरिक को अर्द्ध नागरिक में बदलता समय

चंदन श्रीवास्तव लॉकडाऊन के सवा दो माह गुजरने के बाद जब कोई सवाल ये पूछे तो कि देश ने क्या खोया-क्या पाया तो एक खस्ताहाल आम नागरिक का और क्या जवाब होगा भला सिवाय मी’र के इस शे’र के कि…

लॉकडाउन के दौरान बेरोजगार हुए 10 करोड़ लोगों को सरकार ने राम भरोसे छोड़ दिया

महामारी एक है। जर्मनी और अमरीका एक नहीं हैं। रोज़गार और बेरोज़गारी को लेकर दोनों की नीति अलग है। जर्मनी ने सारे नियोक्ताओं यानि कंपनियों दफ्तरों और दुकानों के मालिकों से कहा कि उनके पे-रोल में जितने भी लोग हैं,…

श्रमिक ट्रेनों में अब तक 80 लोगों की मौत, श्रमिक एक्सप्रेस के भूखे यात्रियों से लुटती दुकानों को देख घबराए वेंडर

श्रमिक ट्रेनों में अब तक 80 लोगों की जान जा चुकी है! -लल्लनटॉप, श्रमिक ट्रेनों में सफर करने वाले 80 मज़दूरों की अब तक जान जा चुकी है. 9 से 27 मई के बीच. ये जानकारी मिली है रेलवे प्रोटेक्शन…

गृह मंत्री जी, सरकार CAA पर एक इंच पीछे हटे भी कैसे? पीछे गड्ढे में अर्थव्यवस्था औंधे मुँह पड़ी है!

गुरदीप सप्पल गृह मंत्री ने कहा है कि सरकार CAA पर एक इंच भी पीछे नहीं हटेगी। कैसे हटे? क्योंकि पीछे एक बड़ा गड्ढा जो है, जिसमें अर्थव्यवस्था लुड़की हुई, औंधे मुँह पड़ी है। ज़रा देखें: GST का कलेक्शन ₹1.2…

ग़रीबों-मज़दूरों की थाली से रोटियाँ ग़ायब, पर गोदी मीडिया में ग़रीब ही ग़ायब!

अनुपम जुलाई 2019 में आयी विश्व खाद्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में 19 करोड़ 44 लाख लोग अल्पपोषित हैं, यानी देश के हर छठे व्यक्ति को मनुष्य के लिए ज़रूरी पोषण वाला भोजन नहीं मिलता। इसी तरह…

छपाक रिव्यु: चीख़ में छिपी भाषा भविष्य में सामने आयेगी जब एक संवेदनशील समाज होगा

शुभा “छपाक” इस मायने में एक साहसिक फिल्म है कि यह हिन्दी फिल्मों और समाज में दूर तक छाई हुई उपभोक्तावादी सौंदर्यदृष्टि को किनारे करती है. एक हस्तक्षेपकारी मनुष्य -दृष्टि से काम लेते हुए यह सुन्दरता के प्रति मौजूद रूढ़…

देश की जनता को उलझाने के लिए बीजेपी का अगला दाँव है जनसंख्या नियंत्रण कानून

‘देशभक्ति सिलेबस का ‘जनसंख्या कानून’ एक ऐसा चैप्टर है जिससे अच्छे से अच्छा मोहित हो जाए. विपक्ष के पास भी इसके विरोध में खास तर्क नहीं हैं. ये ऐसा इकतरफा मुद्दा है जिसमें मोदी-शाह की इकतरफा जीत तय है. लेकिन…

देविन्दर सिंह बड़े गेम का बस मोहरा था

देविन्दर सिंह को लेकर तरह तरह के सवाल उठ रहे हैं, उठाए जा रहे हैं। मेरा मानना है कि जो सवाल उठाए जा रहे हैं सचमुच बहुत ही कम है। मैं यह मानने को तैयार नहीं हूं कि मामला इतना…