लोकवाणी

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रिपोर्ट

गृह मंत्री जी, सरकार CAA पर एक इंच पीछे हटे भी कैसे? पीछे गड्ढे में अर्थव्यवस्था औंधे मुँह पड़ी है!

गुरदीप सप्पल गृह मंत्री ने कहा है कि सरकार CAA पर एक इंच भी पीछे नहीं हटेगी। कैसे हटे? क्योंकि पीछे एक बड़ा गड्ढा जो है, जिसमें अर्थव्यवस्था लुड़की हुई, औंधे मुँह पड़ी है। ज़रा देखें: GST का कलेक्शन ₹1.2…

ग़रीबों-मज़दूरों की थाली से रोटियाँ ग़ायब, पर गोदी मीडिया में ग़रीब ही ग़ायब!

अनुपम जुलाई 2019 में आयी विश्व खाद्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में 19 करोड़ 44 लाख लोग अल्पपोषित हैं, यानी देश के हर छठे व्यक्ति को मनुष्य के लिए ज़रूरी पोषण वाला भोजन नहीं मिलता। इसी तरह…

छपाक रिव्यु: चीख़ में छिपी भाषा भविष्य में सामने आयेगी जब एक संवेदनशील समाज होगा

शुभा “छपाक” इस मायने में एक साहसिक फिल्म है कि यह हिन्दी फिल्मों और समाज में दूर तक छाई हुई उपभोक्तावादी सौंदर्यदृष्टि को किनारे करती है. एक हस्तक्षेपकारी मनुष्य -दृष्टि से काम लेते हुए यह सुन्दरता के प्रति मौजूद रूढ़…

देश की जनता को उलझाने के लिए बीजेपी का अगला दाँव है जनसंख्या नियंत्रण कानून

‘देशभक्ति सिलेबस का ‘जनसंख्या कानून’ एक ऐसा चैप्टर है जिससे अच्छे से अच्छा मोहित हो जाए. विपक्ष के पास भी इसके विरोध में खास तर्क नहीं हैं. ये ऐसा इकतरफा मुद्दा है जिसमें मोदी-शाह की इकतरफा जीत तय है. लेकिन…

देविन्दर सिंह बड़े गेम का बस मोहरा था

देविन्दर सिंह को लेकर तरह तरह के सवाल उठ रहे हैं, उठाए जा रहे हैं। मेरा मानना है कि जो सवाल उठाए जा रहे हैं सचमुच बहुत ही कम है। मैं यह मानने को तैयार नहीं हूं कि मामला इतना…

सौ साल पुरानी क्रोनोलॉज़ी: जेएनयू हिंसा में शामिल अपने कार्यकर्ताओं से ABVP ने पल्ला झाड़ा

ये क्रोनोलॉजी सौ साल पुरानी है. एक आरएसएस है. उसके एक स्वयंसेवक थे नाथूराम गोडसे. गोडसे ने महात्मा गांधी की हत्या कर दी. पकड़े गए. आरएसएस ने कहा कि कुछ समय पहले तक हमसे जुड़े थे, लेकिन अब हमारे नहीं…

‘I am worried about the way this Government has been functioning’

Sharad Yadav I condemn the idea of the Government for unification of services in the Railways with the basic objective of ending departmentalism. It is not a well thought and well perceived decision. Every organization is bound to have departments…

बिहार में पढ़ने वाले बच्चे जेएनयू, जामिया और डीयू को क्यों नहीं समझ पा रहे हैं?

दीपक कुमार कल मैं पटना के एक मॉल में कुछ कपड़े खरीदने पहुंचा था. जहां दो लड़के आपस में मोबाइल नंबर एक्सचेंज कर रहे थे. शायद दोनों दोस्त थे जो बहुत दिनों बाद मिले हों. एक ने व्यंग्य के लहजे…

जेएनयू हमले के बाद ‘दंगाई’ मीडिया के ख़िलाफ़ पत्रकारों का विरोध प्रदर्शन

जेएनयू में गुंडों के हमले के बाद पत्रकार अपने मीडिया मालिकों और एंकरों के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं. 6 जनवरी को दिल्ली स्थित भारतीय जनसंचार संस्थान में रोज़ाना साम्प्रदयिक जहर उगलने वाले टीवी चैनल्स, अख़बारों के ख़िलाफ़ पत्रकारों…

जिसके पास जितना अधिक अधर्म, जितना अधिक असत्य और जितना अधिक अंधकार, विजय भी उसी की!!!

त्रिभुवन भारत में एक समय था ज्ञानोदय का। रिनेसां का। पुनर्जागरण आंदोलन का। लोगों ने स्कूल-कॉलेज विश्वविद्यालय खुलवाए। शिक्षा के लिए जन जागरण किए। कहा गया : शिक्षा आएगी तो तमस हटेगा। उजाला फैलेगा। पूरा देश और समाज ज्योतिर्मय होगा।…