लोकवाणी

मुख़्तलिफ़ आवाज़, निगाह और विचार

समाज

नफरत ने कभी सुखद परिणाम नहीं दिया है, सिवाय बर्बादी, दुख, हिंसा, पीड़ा और अमानवीयता के

कृष्णकांत “नफ़रत की नींव पर तैयार हो रहा यह नया देश तभी तक ज़िंदा रहेगा जब तक यह नफ़रत जिंदा रहेगी, जब बंटवारे की यह आग ठंडी पड़ने लगेगी तो यह नया देश भी अलग-अलग टुकड़ों में बंटने लगेगा.” यह…

रावण सुनाए रामायण

सनातन धर्म से भी पुराना एक और धर्म है।वह है नदी धर्म।गंगा को बचाने की कोशिश में लगे लोगों कोपहले इस धर्म को मानना पड़ेगा। अनुपम मिश्र बिलकुल अलग–अलग बातें हैं। प्रकृति का कैलेंडर और हमारे घर–दफ्तरों की दीवारों पर…

गरीब की चटनी पीस डालें

कनक तिवारी गरीब दुनिया की नेमत और शामत दोनों हैं। भारत में सौ करोड़ से कम नहीं हैं। गरीबी की सीमा सरकारों ने खींच दी है। नीति आयोग के पूर्वज योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेसिंह अहलूवालिया ने कहा मासिक आमदनी…

बजट कम कर, किसानों की आय दुगनी के नाम पर अंधविश्वास का झुनझुना पकड़ाने की तैयारी

मुकेश असीम बजट में किसानों को दुगनी आय का महामंत्र दिया गया है!बताया गया है कि ज़ीरो बजट प्राकृतिक कृषि के जरिये किसान प्राचीन भारतीय ज्ञान की ओर लौटेंगे तो उनकी आय दुगनी हो जायेगी। प्राचीन भारतीय ज्ञान वाली यह…

इतना मुश्किल क्यों है मुस्लिम फंडामेंटलिज़्म पर बात करना

मोहम्मद खान से इफ़्तार के दस्तरख्वान पर तफ़सील से बातचीत हुई. देवबंद के कुछ मौलानाओं ने एक फतवा जारी किया था. फतवे का सुर जैसा कि अमूमन होता है, स्त्रीविरोधी, मर्दवादी था. बातचीत लंबी चली तो आरिफ़ मोहम्मद खान के…

बिहार के कामगारों की जिंदगी-मौत और अपमान इतना सस्ता एवं आसान क्यों है?

सिद्धार्थ रामु शायद ही कोई इस तथ्य से इंकार कर पाए बिहार के कामगारों जितना अपमानित समुदाय भारत में कौन कहे दुनिया में कोई नहीं है। देश के किसी कोने में जब मजदूरों की मौत, हत्या या बुरी तरह से…

अमीर नीता अंबानी का 240 हीरे जड़ा, मगरमच्छ की खाल से बना बैग, जिसकी कीमत 2.6 करोड़ रुपये है

रिलायंस फाउंडेशन की चेयरपर्सन नीता अंबानी के 200 से अधिक हीरे वाले हर्मेस हिमालय बिर्किन बैग की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं, जिसकी कीमत 2.6 करोड़ रुपये से अधिक है। सोशल मीडिया पर पोस्ट की गई तस्वीरों…

भारत का संविधान असहाय खंभे से बंधा है और भीड़ उसे पीट रही है

कृष्णकांत भारत का संविधान असहाय खंभे से बंधा है. भीड़ उसे पीट रही है. संविधान की आत्मा घायल हो गई है. संविधान ने अस्पताल में अंतिम सांस ली है. आपको बताया गया है कि यह तबरेज अंसारी है. यह तबरेज…

पत्रकार, आपातकाल और अघोषित आपातकाल

नितिन ठाकुर 3 साल पहले इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप रामनाथ गोयनका एवॉर्ड बांट रहा था। टाइम्स ऑफ इंडिया के वरिष्ठ पत्रकार अक्षय मुकुल ने पुरस्कार लेने से मना कर दिया क्योंकि वो कार्यक्रम में मौजूद देश के प्रधानमंत्री के विचारों और…

मुजफ्फरपुर: इस देश के नेताओं ने गरीबों और उनके बच्चों को मरने के लिए छोड़ दिया है

हेमंत कुमार झा तीन बातें बिल्कुल साफ हैं और हमें इन्हें स्वीकार कर ही आगे की राह तलाशनी होगी। पहली बात…बावजूद अपनी बढ़ती समृद्धि का ढिंढोरा पीटने के, हमारा देश आज भी बेहद गरीब है, बल्कि बेहद-बेहद गरीब है। दूसरी…