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हरफूल जाट जुलानी: मिथक, इतिहास और वर्तमान

-राकेश सांगवान डाकू हरफूल सिंह जाट सिख थे ?हमने हरफूल जाट जुलानी वाला का नाम और क़िस्से बहुत सुने हैं। पर हरफूल जाट के नाम के साथ सिख देख कर आप हैरान हुए होंगें, मैं भी हुआ था कि ऐसे…

तीन नए कृषि अध्यादेश बड़े खिलाडियों के लिए हैं

-राकेश सांगवान किसान को अपनी फ़सल बेचने व स्टॉक की छूट! अब किसान अपना उत्पाद स्टॉक कर सकता है और किसी भी राज्य में जहाँ उसे बढ़िया भाव मिले वहाँ बेच सकता है. इस बात का बड़े ज़ोर शोर से…

उमर खालिद की गिरफ्तारी को ऐसे भी देखें

जे सुशील उमर खालिद की गिरफ्तारी को देखने के कई एंगल हो सकते हैं. ये देखने वाले पर निर्भर करता है कि वो इस पूरे मामले को कैसे देखता है. लेकिन पहले थोड़ा व्यापक संदर्भ समझ लेते हैं.पूरी दुनिया समेत…

अग्निवेश : शांत हो जाना वैचारिक अग्नि की एक सम्मोहक लपट का

त्रिभुवन अग्निवेश एक अलग तरह के साधु और एक विलक्षण तरह कर सामाजिक नेता थे। उनके व्यक्तित्व में सम्मोहन और उनकी भाषा में एक ओज था। वे विवादास्पद भी थे। वे विवादों को निमंत्रित भी करते थे। लेकिन सच में…

‘पोस्ट कोरोना वर्ल्ड’ की मार्च-अप्रैल कालीन परिकल्पनाओं का जुलाई आते-आते शीराज़ा बिखरने लगा है

बीते मार्च महीने में, जब कोरोना संकट दुनिया के लगभग तमाम देशों को अपनी चपेट में ले चुका था, एक बहस चलनी शुरू हुई थी कि ‘पोस्ट कोविड-19 वर्ल्ड’ का स्वरूप कैसा होगा। हालांकि, अब जब…जुलाई आधा बीतते दुनिया के…

#जीवनसंवाद: आत्महत्या के विरुद्ध होना क्यों जरूरी!

सुशांत सिंह के साथ खड़े होने से बचिए! हमें आत्महत्या के विरुद्ध होना है. उसके साथ नहीं.हमारी समस्या यह है कि हम जीवित व्यक्ति के साथ कभी समय पर खड़े नहीं होते, लेकिन मातम के वक्त समय पर पहुंच जाते…

देवांगना व नताशा की गिरफ्तारी: देश की होनहार, पढ़ी-लिखी, लड़ाकू लड़कियां जेलों में भरी जा रही हैं

जया निगम इमरजेंसी में कितने लोग जेल में डाले गए थे, हिसाब है किसी के पास? पर एंटी सीएए प्रोटेस्ट वाली लिस्ट बढ़ती जा रही है. लॉक डाउन से पहले पूरे देश से 3000 लोग गिरफ्तार कर लिए गए और…

हम अंतिम दिनों वाले गांधी को याद करने से क्यों डरते हैं?

प्रोफेसर अपूर्वानंद 30 जनवरी को गांधी की शहादत का दिन कहा जाता है. बेहतर इसे गांधी की हत्या का दिन ही कहा जाना होता. लेकिन शायद हत्या को नकारात्मक और शहादत को सकारात्मक मानकर ही दूसरे शब्द को कबूल किया…

ग़रीबों-मज़दूरों की थाली से रोटियाँ ग़ायब, पर गोदी मीडिया में ग़रीब ही ग़ायब!

अनुपम जुलाई 2019 में आयी विश्व खाद्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में 19 करोड़ 44 लाख लोग अल्पपोषित हैं, यानी देश के हर छठे व्यक्ति को मनुष्य के लिए ज़रूरी पोषण वाला भोजन नहीं मिलता। इसी तरह…