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‘पोस्ट कोरोना वर्ल्ड’ की मार्च-अप्रैल कालीन परिकल्पनाओं का जुलाई आते-आते शीराज़ा बिखरने लगा है

बीते मार्च महीने में, जब कोरोना संकट दुनिया के लगभग तमाम देशों को अपनी चपेट में ले चुका था, एक बहस चलनी शुरू हुई थी कि ‘पोस्ट कोविड-19 वर्ल्ड’ का स्वरूप कैसा होगा। हालांकि, अब जब…जुलाई आधा बीतते दुनिया के…

#जीवनसंवाद: आत्महत्या के विरुद्ध होना क्यों जरूरी!

सुशांत सिंह के साथ खड़े होने से बचिए! हमें आत्महत्या के विरुद्ध होना है. उसके साथ नहीं.हमारी समस्या यह है कि हम जीवित व्यक्ति के साथ कभी समय पर खड़े नहीं होते, लेकिन मातम के वक्त समय पर पहुंच जाते…

देवांगना व नताशा की गिरफ्तारी: देश की होनहार, पढ़ी-लिखी, लड़ाकू लड़कियां जेलों में भरी जा रही हैं

जया निगम इमरजेंसी में कितने लोग जेल में डाले गए थे, हिसाब है किसी के पास? पर एंटी सीएए प्रोटेस्ट वाली लिस्ट बढ़ती जा रही है. लॉक डाउन से पहले पूरे देश से 3000 लोग गिरफ्तार कर लिए गए और…

हम अंतिम दिनों वाले गांधी को याद करने से क्यों डरते हैं?

प्रोफेसर अपूर्वानंद 30 जनवरी को गांधी की शहादत का दिन कहा जाता है. बेहतर इसे गांधी की हत्या का दिन ही कहा जाना होता. लेकिन शायद हत्या को नकारात्मक और शहादत को सकारात्मक मानकर ही दूसरे शब्द को कबूल किया…

ग़रीबों-मज़दूरों की थाली से रोटियाँ ग़ायब, पर गोदी मीडिया में ग़रीब ही ग़ायब!

अनुपम जुलाई 2019 में आयी विश्व खाद्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में 19 करोड़ 44 लाख लोग अल्पपोषित हैं, यानी देश के हर छठे व्यक्ति को मनुष्य के लिए ज़रूरी पोषण वाला भोजन नहीं मिलता। इसी तरह…

देश की औरतें जब बोलती हैं तो शहर-शहर शाहीन बाग हो जाते हैं

शाहीन बाग में चल रहे प्रदर्शन को एक महीने से ज़्यादा वक्त बीच चुका है। इस बीच दिल्ली के पारे का रिकॉर्ड कई बार टूटा, सत्ता का दमनचक्र कई बार आक्रामक हुआ, आंदोलन को भटकाने की कई बार कोशिश की…

हिंदुस्तान की कहानी: मतिबर रहमान के शंकर भगवान

भारत के पूर्वोत्तर का राज्य असम। वही असम जहां से हमारी सरकार ने हिंदू-मुस्लिम छांटना शुरू किया है। यहां गुवाहाटी में एक गांव है रंगमहल। गांव में भगवान शिव का एक मंदिर है। बताते हैं कि मंदिर 500 साल पुराना…

रोहित वेमुला का आखरी खत: ‘मनुष्य को कभी एक मस्तिष्क की तरह बरता ही नहीं गया’

रोहित वेमुला के आखिरी ख़त का अनुवाद – जब आप यह ख़त पढ़ेंगे, उस वक़्त मैं यहां नहीं रहूंगा। मुझ पर नाराज़ न हों। मुझे पता है कि आप में से कुछ लोग वाकई मेरी परवाह करते हैं, मुझ से प्यार…

हिंदू पिता के मुस्लिम बेटे

गुजरात का अमरेली जिला. सावरकुंडला कस्बे में एक थे भीखू कुरैशी. उनके दोस्त का नाम था भानुशंकर पांड्या. दोनों की दोस्ती आज से करीब 40 साल पहले हुई थी. जीवन की गाड़ी आगे बढ़ी. दोनों का वक्त एक जैसा नहीं…