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चौटाला परिवार ने महाभारत से प्रेरणा ले अपना भट्टा बैठा लिया!

ओमप्रकाश चौटाला परिवार के टूटने के बाद अजय चौटाला व अभय चौटाला परिवार खुद को कौरव, पांडव, द्रौपदी और महाभारत की चुटकुलानुमा बयानबाज़ी में फंसा बैठा। चौटाला की दोनों ब्रांचों में यह होड़ सी हो गयी थी कि कौन ज्यादा बढ़िया तंज कसेगा। इनके महाभारत युगीन तंजों का नतीजा अब आपके सामने है। इनसे हुए नुकसान को फूल मलिक समझा रहे हैं अपने इस लेख से, पढ़ा जाए।

फूल मलिक

चौटाला परिवार ने महाभारत से प्रेरणा ले भट्टा बैठा लिया अपना:

महाभारत का जो भी परिवार अनुसरण करेगा, वह खंड-खंड हो रहेगा. ताजा, सबसे बड़ा व अनुकरणीय उदाहरण है चौटाला परिवार. जब तक महाभारत परिवारों में रहेगी, किसी युवा को अभिमन्यु तो किसी बहु को द्रोपदी बनने की व किसी को दुर्योधन ठहराने-समझने की प्रेरणा दे, घर-सत्ता-पावर यूँ ही तुड़वाती रहेगी जैसा इस परिवार के साथ हुआ. जो यह बात जितनी जल्दी समझ लेगा कि यह उपन्यास फंडी(अंधविश्वास) का आपकी एकता-सत्ता-घर-पावर में पाड़ लगाने का सबसे बड़ा साइकोलॉजिकल हथियार है वह उतना फायदे में रहेगा. वैसे भी इसमें स्थापित उदाहरण आप किसान-मज़दूरों के पुरखों के सिद्धांतों के बिलकुल विपरीत हैं, जिसको यह नहीं पता; उनके लिए दो-एक तो यहीं लिख देता हूँ:

1) आपके कल्चर-इतिहास-मान्यता में कोई ऐसी पंचायत नहीं हुई जो दो घरों का मसला सुलझाने बैठी हो और सुलझाने की बजाये उल्टा झगड़ा लगवा के उठी हो जैसे इसमें वर्णित कुरुक्षेत्र का कल्पनिक युद्ध.

2) आप अपनी बहन को कभी अपनी बुआ या मामा के लड़के से नहीं ब्याहोगे. किसी ने ब्याह दी तो वह समाज में साइड कर दिया जायेगा. जबकि इसमें कृष्ण अपनी बुआ कुंती के लड़के अर्जुन के साथ अपनी सगी बहन सुभद्रा को भगा देते हैं. कई इस पर तर्क करते हैं कि कुंती उसकी सगी नहीं धर्म की बुआ थी. भाई थी तो सगी ही परन्तु आपकी बात भी ऊपर रख लें तो इस पर जानिये कि हमारे कल्चर में एक बार जो धर्म की भी बुआ बोल दी तो उसके बच्चे सगी वाले के ही बराबर ट्रीट किये जाते हैं. उसके सगे भाईयों के साथ बराबर पाटड़े पे खड़ा हो भात भरे जाते हैं हमारे कल्चर में ना कि उसके बेटे के साथ अपनी बहन भगाई जाती हो और जो हो ऐसा तो एक उदाहरण दिखा दो?

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