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भारतीय लोकतंत्र की व्यावहारिक परिभाषा, ‘अमीरों का, अमीरों के लिए, मगर गरीबों द्वारा’ है!

कृष्ण कांत

आदरणीय प्रधानमंत्री जी, नमस्ते.

आप और राहुल गांधी जब गरीब किसान और आम आदमी की बातें करते हैं, तो यह बेहद अश्लील लगता है. मौजूदा लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा और कांग्रेस के 83 फीसदी से ज्यादा प्रत्याशी करोड़पति हैं. भाजपा ने सबसे ज्यादा 363 करो​ड़पतियों को टिकट दिए हैं. दूसरा नंबर कांग्रेस का है, जिसने कुल 349 करो​ड़पतियों को टिकट दिए हैं.

मायावती की बसपा ने 129 करोड़पतियों को टिकट दिया है. तेलुगु देशम पार्टी, शिरोमणि अकाली दल और एआइएडीएमके के सभी प्रत्याशी करोड़पति हैं. डीएमके के 96 फीसदी प्रत्याशी करोड़पति हैं. आरजेडी के 90.4 फीसदी प्रत्याशी करोड़पति हैं. वाईएसआर कांग्रेस के 88 फीसदी प्रत्याशी करोड़पति हैं. भाजपा के कुल प्रत्याशियों में करोड़पतियों का प्रतिशत 83.4 है, जबकि कांग्रेस के 83.1 फीसदी प्रत्याशी करोड़पति हैं. इन करोड़पतियों में तमाम तो ऐसे हैं जिनकी संपत्ति कई सौ करोड़ में है. आम आदमी की टोपी पहनकर राजनीति करने आई ‘AAP’ ने भी आम आदमी को टोपी पहना दी है, उसके भी 60 फीसदी प्रत्याशी करोड़पति हैं.

यूं तो आदमी के पास संपत्ति होना कोई बुरी बात नहीं है, लेकिन भारत में 50 प्रतिशत संसाधनों पर एक प्रतिशत लोगों का कब्जा है. भारतीय जनता की प्रतिनिधि संस्था संसद पर भी इन्हीं करोड़पतियों का कब्जा है.

मौजूदा संसद के 521 सांसदों में से 83% यानी 430 करोड़पति रहे हैं. इनमें भाजपा के 227, कांग्रेस के 37 और अन्नाद्रमुक के 29 सांसद हैं. अब अगली लोकसभा के लिए चुनाव हो रहे हैं और यह चुनाव दुनिया का सबसे महंगा चुनाव है. सभी पार्टियां चुनाव को नियमों को ताक पर रखकर सीमा से बहुत बहुत अधिक पैसा बहा रही हैं. उम्मीद है आने वाली लोकसभा में 90 प्रतिशत या उससे अधिक करोड़पति भर जाएंगे.

आपने इस अमीरतंत्र को आगे बढ़ाने के लिए चुनावी चंदे को इलेक्टोरल बॉन्ड सिस्टम के जरिये ऐसा बना दिया कि चोरों की चांदी हो गई. नतीजतन देश भर की सब पार्टियों को जितना कॉरपोरेट चंदा मिला, आपको उन सबको मिलाकर, उससे करीब दोगुना या इससे भी अधिक चंदा है. संभवत: आपकी पार्टी दुनिया की सबसे अमीर पार्टी हो! जो दिख रहा है वह तो दिखाने दांत हैं.

आपने भ्रष्टाचार दूर करने और पारदर्शिता लाने के ​नाम उससे बड़ा धोखा किया, जो अब तक होता रहा था. अगर कांग्रेस भ्रष्टाचार और अमीरतंत्र के लूटखसोट की जनक है तो आप उसके सजग प्रहरी बनकर खड़े हुए और चुनाव सुधार की कोई पहल करने की जगह आपने चुनावी चंदे के तंत्र को ब्लैक होल बना दिया जिसका ठीक ठीक अंदाजा लगाना ही मुश्किल है.

यह सब सजरा इसलिए सुना रहा हूं, क्योंकि मैं सोच रहा हूं कि 130 करोड़ जनता का इस धनतंत्र में क्या है, सिवाय उल्लू बनकर वोट देने के?

व्यावहारिक तौर पर भारतीय लोकतंत्र की परिभाषा हो सकती है, ‘अमीरों का, अमीरों के लिए, मगर गरीबों द्वारा. चुनाव संपन्न होने को हैं, गालियों का क्लाउड इतना बढ़ गया है कि जनता का रडार इसे रोक नहीं पाएगा. आप ईमानदार, दानी और पारदर्शी होकर भी ढाई करोड़ के मालिक हैं.

मैं तो बस यह सोच रहा हूं कि अगर हम जैसे करोड़ों लोग कभी अपने देश की संसद में जाने की सोचें तो पहले देश लूट कर करोड़पति बनना पड़ेगा. आप सभी करोड़पतियों, अरबपतियों और खरबपतियों को यह धनतंत्र मुबारक! सबको विजयश्री की शुभकामनाएं!

नोट: सभी आंकड़े एडीआर के हैं और इनमें कुछ भी क्लाउडी नहीं है. इसलिए अपने अपने रडार निष्क्रिय रखें, शक होने पर गूगल देवता की शरण में जाएं.

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