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रिपोर्ट

बदनाम करने के लिए दीपक चौरसिया ने फेक वीडियो शेयर किया तो रवीश ने कहा फैन्सी ड्रेस वाला जोकर

रवीश कुमार

ट्रोल का नेटवर्क कितना विशाल हो चुका है आपको अंदाज़ा लगता ही रहता होगा। इन्हें लगता है कि ये जब चाहेंगे तभी कुछ भी फैला कर पहले दुनिया को अंधेरे में रखेंगे और फिर उसे कुएँ में धकेल देंगे। मेरे मनीला पहुँचते ही एक योजना के तहत मेरा एक नए और पुराने वीडियो से एक एक लाइन काटकर वीडियो तैयार किया गया। आपमें से कई जानते हुए भी झाँसे में आ गए। दरअसल ये ट्रोल आपकी बुद्धि का अपमान करते हैं। उन्हें लगता है कि आपको कुछ भी झूठ परोसा जा सकता है। सोचिए ऐसे कितने झूठे मेसेज से आपका मत बन चुका होगा। मुझे पता है कि मेरा यह जवाब उन सभी लोगों तक नहीं पहुँच पाएगा जहाँ तक ट्रोल का मेरे ख़िलाफ़ तैयार किया गया प्रोपेगैंडा पहुँचा है।

दो दिन पहले मेरे बारे में एक वीडियो वायरल हुआ। इस वीडियो में ये दिखाने की कोशिश थी कि जीडीपी और अर्थव्यवस्था को लेकर 2013 में मेरा स्टैंड कुछ और था और 2019 में कुछ और हो गया. ये मुझे यूपीए सरकारपरस्त घोषित करने की कोशिश थी. पहली बात तो ये कि 27 फ़रवरी 2013 का ये वीडियो आप लिंक में देख सकते हैं. मुझे ज़्यादा कुछ कहने की ज़रूरत नहीं है. बीबीसी हिन्दी ने दोनों वीडियो को सुनने के बाद पूरी रिपोर्ट प्रकाशित की है। boomlive और alt news ने भी इस प्रोपेगैंडा का पर्दाफ़ाश किया है। peeing human के पेज पर भी है। कुणाल कामरा ने उस वीडियो को ट्विट किया है।

मुझे हैरानी ये है कि पिछले 5-6 साल से आईटी सेल मेरी पत्रकारिता में खोट निकालने की कोशिश कर रहा है लेकिन उन्हें एक भी वीडियो नहीं मिल पायी जिससे वे ऐसा साबित कर सकें. तभी उन्होंने चंद सेकेंड का एक सवाल काट कर ग़लत तरीक़े से पेश किया. ये ट्रोल सेना उन पत्रकारों की हरकत निकाले जो सरकार की ख़ुशामद में भांड हो गए हैं। मैं जानता हूँ कि मोदी जी के समर्थक भी इन लंपट हिन्दी एंकरों को देखकर रोते होंगे। उन्हें भी अच्छा नहीं लगता होगा लेकिन वे इस वक्त मजबूर हैं।

दुख की बात है कि इस बार कुछ पत्रकारों ने भी इसे शेयर किया। ये पत्रकार इसका शिकार ही नहीं हुए बल्कि इसमें शामिल भी हुए। जो ग़लतफ़हमी का शिकार होता है वो ग़लती जानकर उसे सुधार लेता है। लेकिन ऐसा हुआ नहीं हुआ। जैसा कि मैंने कहा है कि अपने वैल्यूज़ को बचाए रखना काफ़ी मुश्किल होता है तो मूल्य बचाने में मेहनत करने की बजाय क्यों ना दूसरे को मूल्यहीन पेश किया जाए। इन एंकरों को अपना वीडियो तो काटने की भी ज़रूरत नहीं पड़ेगी. ये तो स्वघोषित सरकारपरस्त हैं। रोज़ रात को फ़ैन्सी ड्रेस पार्टी के कपड़े पहनकर नौटंकी करते हैं। दस्तानें की जगह सफ़ेद जुराब को पहन लेते हैं। पाँव की चीज़ हाथ में पहन रहे हैं। जल्दी ही ये क़मीज़ को पतलून की जगह पहनेंगे और पतलून को क़मीज़ बना लेंगे। जोकर सब।

आप मेरी बात याद रखिए। हिन्दी अखबार और चैनल आप सभी को झूठ से लैस कर रहे हैं ताकि आने वाली पीढ़ियाँ गटर में चली जाएँ। आप मोदी जी को पसंद करते हैं उसके बहाने ये अपना कचरा आपके घरों तक पहुँचा रहे हैं।

ये पता लगाना बहुत मुश्किल काम नहीं था. जितनी देर में आपमें से कइयों ने मुझ पर ऊँगली उठाने के लिए फ़ेसबुक पोस्ट किया, उतनी ही देर में ये पूरा वीडियो मिल जाता। खुद भी चेक कर सकते थे। शायद आप मेरे साथ खड़े होने में दबाव महसूस करते हैं और इसीलिए झट से इस नामालूम स्त्रोत से आयी वीडियो को शेयर कर दिया और सवाल पूछा ताकि आपके ट्रोल मित्रों को लगे कि आप तो निष्पक्ष हैं।

क्या रवीश कुमार के लिए 2013 में अच्छी थी 5% जीडीपी?
https://www.bbc.com/hindi/india-49608527o

अब आपको पास समय नहीं होगा लेकिन जिन जिन ग्रुप से आप तक मेरे ख़िलाफ प्रोपेगैंडा पहुँचा है उन्हें ये लिंक भेज दें और बता दें कि उन्हें आई टी सेल ने उल्लू बनाया है। एक आदमी के ख़िलाफ़ पूरा सिस्टम लगा रखा है और वो सिस्टम आपकी मदद से बना है।

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