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रिपोर्ट

महामंदी की आहट: देश के आठ कोर सेक्टरों का उत्पादन 0.5 फीसदी से भी नीचे

गिरीश मालवीय

देश में आठ कोर सेक्टर माने जाते हैं ‘कोयला, क्रूड ऑयल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी प्रोडक्ट्स, उर्वरक, सीमेंट, बिजली और इस्पात’ यह आठ कोर सेक्टर हैं। इन आठो उद्योगों का उत्पादन इस वर्ष अगस्त में सालाना आधार पर 0.5 फीसदी नीचे रहा यह पिछले 45 माह के सबसे निचले स्तर पर है।

यह स्थिति जब है जब इस महीने के अंत मे दिवाली है कोई ग्रोथ नहीं है कोई डिमांड नहीं है तो सप्लाई कहाँ से बढ़ेगी? फेस्टिवल सीजन के बाद शादी ब्याह का सीजन शुरू हो जाता है और यह सब शुरू होने के ठीक पहले यह हाल है।

वित्त वर्ष की पहली तिमाही में अप्रैल से जून तक विकास दर की पिछले साढ़े छह सालों में सबसे ज्यादा सुस्त रफ्तार देखने को मिली थी। यह 5 प्रतिशत पर आ गयी यह पिछली 25 तिमाहियों में सबसे धीमा तिमाही विकास रहा और ये मोदी सरकार के दौर के दौरान की सबसे कम वृद्धि है. लेकिन कल कोर सेक्टर की ग्रोथ के आंकड़े बता रहे हैं है कि दूसरी तिमाही जो कल 30 सितंबर को खत्म हुई हैं उसमे तो हालात ओर बद से बदतर होते जा रहे हैं, इस तिमाही के आंकड़े वर्स्ट होने जा रहे हैं।

वित्तमंत्री लगातार मंदी की बात नकारती आई है लेकिन संयुक्त राष्ट्र संघ ने अपनी ताज़ा रिपोर्ट ‘UNCTAD ट्रेड एंड डेवलपमेंट रिपोर्ट 2019’ में कहा है कि अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर मंदी का साया गहराता जा रहा है और 2020 मंदी का साल होगा. यह खतरा बढ़ता जा रहा है. यह भारत के लिए बुरी खबर है. रिपोर्ट के मुताबिक भारत में आर्थिक विकास की रफ्तार में गिरावट का असर पूरे एशिया की अर्थव्यवस्था पर होगा. यानी असली बुरा दौर तो अभी आना बाकी है। कोई बताए कि मोदी सरकार इस मंदी से निपटने के क्या उपाय कर रही है उसके सारे उपाय कारपोरेट को सीधा लाभ पहुंचा रहे हैं। डिमांड तो उपभोक्ता पैदा करता है उसके भले के लिए तो कुछ किया ही नहीं गया है अभी तक!

टीवी पर इन सब से ध्यान हटाने के लिए हिंदुस्तान-पाकिस्तान, हिंदू-मुसलमान की बहस बदस्तूर जारी है और जनता को सरकार शेखचिल्ली के सपने देखने दिखाने से बाज नहीं आ रही है। उसे 2024 में नए संसद भवन में जाना है और 5 ट्रिलियन की इकनॉमी 2025 में बनाना है बस उसका यही विजन है, अगली तिमाही में क्या होगा? अगले साल क्या करेंगे, यह सोच नही है!… 5 साल बाद क्या होगा उसके सपने दिखाए जा रहे हैं।

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