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चुनाव आयोग के अधिकारी गले में मोदी के नाम का पट्टा बांध लें!

लगभग सभी न्यूज़ वेबसाइट पर खबर है कि नमो टीवी का प्रसारण बन्द कर दिया है। खुद चुनाव अधिकारियों ने सामने आकर कहा था कि मोदी की बायोपिक फिल्म पर दिया गया। आदेश नमो टीवी पर भी लागू होगा, नमो टीवी के प्रसारण को चुनाव के दौरान अनुमति नहीं दी जा सकती. अधिकारियों ने उस वक्त आदेश के एक पैराग्राफ का संदर्भ देते हुए कहा था, ‘पहले से प्रमाणित किसी भी प्रचार सामग्री से जुड़े पोस्टर या प्रचार का कोई भी माध्यम, जो किसी उम्मीदवार के बारे में चुनावी आयाम का प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से चित्रण करता हो, चुनाव आचार संहिता के दौरान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा.’

लेकिन कुछ घण्टो के बाद ही चुनाव अधिकारी अपने कहे से पूरी तरह पलट गए अब वह कहने लगे कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आधारित फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगाने वाले आयोग के आदेश का नमो टीवी से कोई लेना-देना नहीं है. अधिकारियों ने कहा कि बायोपिक पर दिए गए आदेश को उन्होंने ‘गलत समझ’ लिया था।

जाहिर है इस बीच मोदी ने चुनाव आयोग को फटकार लगाई होगी इसीलिए एक बार फिर चुनाव आयोग ने नमो टीवी की तरफ से निगाहें फेर ली गई ओर से क्लीन चिट दे दी।

हम जानते हैं कि नमो टीवी के पास न तो लाइसेंस है, न ही लाइसेंस के लिए आवेदन किया है चैनल पूरी तरह पीएम मोदी के भाषणों और रैलियों को समर्पित है. इसे आवश्यक सुरक्षा क्लीयरेंस प्राप्त नहीं है और ना ही इसके स्वामित्व को लेकर स्पष्टता है.

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के एक अधिकारी की मानें तो भारत के प्रसारण इतिहास में संभवत: यह पहला मौका है जब किसी चैनल ने बिना सरकारी अनुमति के या यहां तक कि अनुमति के लिए आवेदन किए बिना प्रसारण शुरू कर दिया है।

चुनाव आयोग को अपने ही मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट में सत्ताधारी दल के बनाए गए नियम की संख्या 4 के नियम को पढ़ना चाहिए जिसमें स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि ‘misuse of official mass media during the election period for partisan coverage of political news and publicity regarding achievements with a view to furthering the prospects of the party in power shall be scrupulously avoided’

यह किस तरह का चुनाव आयोग है? यह कैसे निष्पक्ष चुनाव है? जब चुनाव आयोग जैसी सवैधानिक संस्थाओं को इस तरह के दबाव में काम करना पड़ रहा है तब हमें तानाशाही की आमद साफ दिखाई दे रही है।

2019 के चुनाव में अब यह प्रश्न नही है कि मोदी वापस आएंगे या नहीं बल्कि यह प्रश्न है कि भारत एक लोकतांत्रिक गणराज्य रहेगा या नहीं।

चुनाव आयोग को अब चाहिए कि 23 मई का इंतजार न करे और कल ही मोदीजी को भारी मतों से विजयी होने का सर्टिफिकेट दे देवे और उन्हें प्रधानमंत्री के पद पर बैठा दे, क्योंकि उसने तो प्रण कर लिया है कि मोदी ओर भाजपा जो भी करे उस पर आँख मूंद ही लेना है। आचार संहिता के कागज की भोंगली बना कर तो भाजपा उसमे रोज चने मुरमुरे खा रही है। जब धृतराष्ट्र बनना ही है तो अब इतना भी क्या बेइज्जत होना।

मोदी जी रैलियों में रोज सेना के नाम पर वोट माँग रहे हैं। रोज हमारे घर पर नमो टीवी पर ‘मेरा बूथ सबसे मजबूत’ कार्यक्रम का प्रसारण हो रहा है, बचा ही क्या है।

पिछली बार एक मित्र ने चुनाव आयोग की ऐप cvigil पर इसकी शिकायत की थी तो उसे चुनाव आयोग से जवाब आया था कि नमो टीवी पर सरकारी योजनाओ का प्रचार प्रसार होता है इसलिए यह आपत्ति निरस्त कर दी जाती है।

लेकिन अब तो ‘मेरा बूथ सबसे मजबूत’ कार्यक्रम नमो टीवी पर दिखाया जा रहा है वह किस प्रकार की सरकारी योजना है। जब इस बात की शिकायत मैंने की तो कहा गया कि इस संबंध में प्रतिवेदन दे दिया हैं और चुनाव आयोग द्वारा निर्णय लिया जाएगा।

न्यूज़ चैनलों और नमो टीवी को भी आप छोड़ दीजिए अब तो ‘भाभी जी घर पर हैं’ के मशहूर किरदार ये बता रहे हैं कि मौजूदा सरकार के आते ही देश में अब तक 9 करोड़ से ज्यादा टॉयलेट बनकर तैयार कर दिए हैं. उसके किरदार का डायलॉग है.”एक वो आदमी है जो दिनभर देश की अखंडता और स्वच्छता की बात करता है।”

”जैसे हमारी आज की सरकार पूरे जोश और खरोश से लगी हुई है कि भारत की एकता और अखंडता को खतरा न पहुंचे. हम लोग स्वच्छ अभियान की बातें कर रहे हैं. आज एक कर्मठ, ज्ञानी और अतुल्य पुरूष की वजह से हम स्वच्छता के वातावरण में सांस ले रहे हैं.

यह क्या है? कभी आपने ऐसे चुनाव आपने देखे हैं जिसमे सत्तासीन दल इस कदर घटिया हथकंडे अपनाने पर उतर आया हो और चुनाव आयोग अंटा गाफ़िल होकर पड़ा हो।

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