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बेगूसराय में जिग्नेश मेवाणी को थप्पड़ मारने की खबरें क्यों फैला रहे हैं संघी?

लेखक: श्रवण यादव

पहले तो जिग्नेश मेवाणी की अफवाह के बाद तंग दिमाग लोगों की प्रतिक्रियाएं पढ़िए,

अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा के उपाध्यक्ष गौरव चतुर्वेदी लिखते हैं,

जिग्नेश मेवाणी को बेगूसराय में किसी ने थप्पड़ मार दिया, ई साल थप्पड़ मार के ही छोड़ दिया डमरू बना देते डमरू😂

इन्द्रकांत झा लिखते हैं,

जिग्नेश मेवाणी को बेगूसराय में किसी ने थप्पड़ मार दिया है
हमको पता था ई साला होकर रहेगा 😆🤣 बेगूसराय से रुझान आने चालू। कन्हैया पहला चाटा खाकर, 3/0 से आगे चल रहा है….|

प्रशांत श्रीवास्तव लिखते हैं,

जिग्नेश मेवाणी को बेगूसराय में किसी ने थप्पड़ मारा….मैं इस खबर को सुनकर आहत हूं जो बंदा लात-घूसा और गोली खाने की काबिलियत रखता है उसके साथ ऐसा अन्याय क्यों.?

अब पूरे मसले को समझिए

फेसबुक पर संघियों ने अफवाह उड़ाई है कि बेगूसराय में जिग्नेश को थप्पड़ पड़े हैं। हालाँकि अफवाह ही है क्योंकि जिग्नेश पिछले दो दिनों से बेगूसराय में है ही नहीं, वह माले लिबरेशन के उम्मीदवार के लिए प्रचार करने व चंदू-श्यामनारायण की शहादत कार्यक्रम में भाग लेने सिवान में है।

लेकिन इस अफवाह पर वाम के प्रति कुंठा से भरे कई “सामाजिक न्याय” का मुखौटा पहने लोग बड़े खुश होकर चटकारे ले रहे हैं।
मेरा सवाल यही है कि इतनी “तलब” क्यों मची है जिग्नेश को थप्पड़ मारने की? क्या उसने समाज को तोड़ने वाली, नफरत दंगा फसाद फैलाने वाली कोई बात की है? मैंने तो आजतक उसे मज़दूरों, किसानों, दलित आदिवासियों के मुद्दे, रोजगार के मुद्दे पर ही बात करते देखा है।

उसके अपने राजनीतिक झुकाव हैं, और यह उसका लोकतांत्रिक अधिकार है कि वह किसका समर्थन करे, किसका विरोध। आपकी उससे असहमति है तो जनता के बीच अपनी असहमति रखने का आपको भी पूरा अधिकार है। लेकिन ये थप्पड़ लप्पड़ वाली अफवाहों पर खुश होकर ताली पीटकर आप अपनी विकृत मानसिकता और घोर प्रतिक्रियावादी होने का परिचय दे रहे हैं।

यदि थप्पड़ मारने की इतनी “चुल्ल” मची है, तो ज़रा बेगूसराय जाकर गिरिराज को थप्पड़ मारने की हिम्मत दिखाइए न, जो आज शेल्टर होम बलात्कार कांड की अभियुक्त मंजू वर्मा और दादरी लिंचिंग कांड के मुख्य आरोपी विशाल सिंह के साथ मंच साझा कर रहा है और हद दर्जे के जहरीले बयान उगल रहा है। ज़रा अपनी चुल्ल शांत करने के लिए गिरिराज के मंच पर चढ़िए और उसे भी दो चार थप्पड़ लगाकर अपनी वीरता का परिचय दीजिए न, पर वो आप करेंगे नहीं क्योंकि यदि ऐसा किया तो वहाँ से आपको संघी लोग सिंगल पीस लौटने नहीं देंगे, ये आप भी जानते हैं।

इसीलिए जनता के बीच डायरेक्ट जाकर संवाद कर रहे एक पढ़े लिखे, जागृत, दलित समाज से आने वाले कार्यकर्ता जिग्नेश के बारे में ही थप्पड़ पिटाई टाइप की वाहियात अफवाहें फैलाकर अपनी विकृत मानसिकता की नुमाइश कीजिए और अपने “सामाजिक न्याय” के मुखौटे के पीछे के असली चेहरे को उजागर करिए।

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