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क्या महात्मा गांधी ने भगत सिंह को बचाने के कोई प्रयास नहीं किये?

नितिन ठाकुर

“गांधी पर भगत सिंह को ना बचाने के आरोप पर इतिहासकार सुधीरचंद्र साफ़ कहते हैं कि….

गांधी ने लॉर्ड इरविन से तीनों क्रांतिकारियों की फांसी माफ़ करने के लिए अनुरोध किया था, मगर वो नाकाम रहे. अंग्रेज़ों ने साफ़ कहा था कि पॉलिटिकल बंदियों को छोड़ा जा सकता है, लेकिन फौजदारी के मुकदमे ख़त्म नहीं किए जा सकते.

खुद भगत नहीं चाहते थे कि वो बचाए जाएँ. उन्हें लगता था कि उनकी मौत से वो संदेश दूर तक जाएगा, जिसे वो फैलाना चाहते थे. भगत सिंह को ये आइडिया, AUGUST VAILLANT नाम के फ्रांसीसी अराजकतावादी से मिला था, जिन्होंने 9 दिसंबर 1893 को चेंबर ऑफ डेप्युटीज़ में धमाके किए. बाद में उन्हें 3 फ़रवरी, 1894 को मौत की सज़ा दे दी गई थी.

भगत ने ख़ुद ख़त में अपने पिता को लिखा था कि यदि आप वकील की मदद से मुझे बचा लेना चाहेंगे, तो मैं आपको देशद्रोही मानूंगा.

उधर जिन्ना तक ने एसेंबली में भगत समेत सभी क्रांतिकारियों के लिए ज़ोरदार बहस की, जिसके कुछ अंश ‘जिन्ना-एक पुनर्दृष्टि’ में छपे हैं.

सीधी-साफ़ बात है, भगत ने ख़ुद माना कि उन्होंने वो किया, जिसका उन पर आरोप है. वो चाहते थे कि सज़ा हो.

हां, ये अलग बात है कि भगत की मौत से आक्रोशित बहुत लोगों का नजला कांग्रेस नेतृत्व पर गिरा, जिन्हें लगता था कि पर्याप्त प्रयास नहीं किए गए.

आज गांधी-नेहरू-विरोधी सिर्फ़ चरित्र-हनन की कुत्सित कोशिशों में ये इल्ज़ाम चस्पां करते हैं.”

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