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रिपोर्ट

बीजेपी, शिक्षा और नये मंत्री की फर्जी डिग्री: फेक डिग्री वालों को बीजेपी मंत्री क्यों बनाती है?

कृष्णकांत

कुछ साल पहले मैंने अपने सीनियर पत्रकार से पूछा, संघ परिवारियों को शिक्षा और ज्ञान से इतनी नफरत क्यों है? सीनियर एबीवीपी में रह चुके हैं, भाजपा के समर्थक हैं और पत्रकार के रूप में आलोचक भी हैं. उन्होंने एक किस्सा सुनाया. ‘एक बार गुरु गोलवलकर संघ के कार्यालय में पहुंचे तो उन्हें आता देखकर एक स्वयंसेवक ने किताब उठा ली और पढ़ने लगा. उसने सोचा कि पढ़ता देख गुरु जी सराहेंगे. गुरु जी पास पहुंचे तो उसके हाथ से किताब छीन ली और फेंक दिया. बोले, यहां पढ़ने लिखने वालों की ज़रूरत नहीं है. जाओ शाखा लगाओ.’

संघ लोगों को अपने तरीके से साक्षर बनाना चाहता है लेकिन उन्हें शिक्षित नहीं देखना चाहता. इसीलिए संघ के पास बुद्धिजीवियों की कमी है. शिक्षित लोग सवाल करते हैं. सत्ता को कभी सवाल पसंद नहीं होते. इसलिए संघ को भी सवाल पसंद नहीं हैं. एक बार मुझसे निजी बातचीत में राकेश सिन्हा ने कहा था, ‘हां, यह सही है कि हमारे पास बुद्धिजीवी नहीं हैं. यह हमारी कमजोरी है.’ संघ उस कमजोरी को ही अपनी महानता मानता है. 

पहली बार सत्ता में आते ही संदिग्ध डिग्रीधारी को शिक्षा का प्रभार दिया गया. शिक्षा बजट घटाया गया, हर बच्चे को मिला शिक्षा का अधिकार प्राथमिकता सूची से हटाया गया, स्कॉलरशिप बंद की गई, देश भर के विश्वविद्यालयों में सीटें घटाई गईं, फेलोशिप में कटौती की गई, संसाधनों में कटौती की गई, बच्चों के पढ़ाई के वक्त और निजता में कटौती करके उन्हें बस में भर भर कर रैलियों में ले जाया गया. कॉलेजों की स्वायत्तता में कटौती की गई. कॉलेजों विश्वविद्यालयों के माहौल में खलल डाला गया. 

अब नई सरकार बनी है तो रमेश पोखरियाल निशंक को एचआडी मंत्रालय सौंपा गया है. निशंक वही नेता हैं जो पिछली बार सरकार बनने के बाद कह रहे थे कि कणाद ऋषि ने दूसरी सदी में परमाणु परीक्षण किया था. निशंक जी ज्योतिष से भूकंप की भविष्यवाणी कराने वाले महान विश्वगुरुओं में से एक हैं. 

उनके नाम के आगे डॉक्टर लगा है. वे श्रीलंका स्थित एक अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय से दो-दो मानद डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त कर चुके हैं. लेकिन यह कथित विश्वविद्यालय श्रीलंका में पंजीकृत ही नहीं है.

प्रधानमंत्री जी की बच्चों की पढ़ाई लिखाई से इतनी दुश्मनी क्यों है? गुरु गोलवलकर की तरह वे भी जानते हैं कि पढ़े लिखे और तार्किक हो चुके बच्चे धार्मिक उन्माद का साथ नहीं देंगे, न ही हिंदू-मुस्लिम मुद्दे पर वोट करेंगे. पढ़े-लिखे बच्चे बेरोजगारी दर, विकास दर, कृषि और उद्योगों की बर्बादी पर सवाल पूछेंगे. अनपढ़ों की भीड़ ऐसा कभी नहीं करेगी. 

लेकिन लोगों को इन सब बातों से कोई फर्क नहीं पड़ता. इस देश के लोग अजब हैं. अभी देखिएगा कोई युवा ही आएगा और कहेगा कि तुम मोदीजी से जलते हो, मोदीजी ठीक कर रहे हैं.

निशंक जी के टैलेंट की कीमत तुम क्या जानो राम बाबू

निशंक जी एचआरडी मिनिस्टर बने तो मुझे पांच साल पुराना निशंकज्ञान स्मरण हो आया. 
तो हुआ यूं कि जम्बूदीप में पैदा हुआ अल्फ्रेड नोबेल वह महान भारतीय है जिसने दुनिया में भारत का नाम रोशन किया. उसका असली नाम अली फरीद नीबूवाला था और वह एक महान गुजराती था. दूसरी सदी में जब रमेश पोखरियाल निशंक जी परमाणु आयोग के अध्यक्ष बने, तो उनके निर्देशन में महर्षि कणाद ने परमाणु परीक्षण किया था. तब अली फरीद नीबूवाला कणाद मुनि का रिसर्च स्कॉलर था.

बाद में बाबा रामदेव के पतंजलि आकाशीय वायुविकार शोध संस्थान ने गेंदा और गुलाबों से एक वायुयान बनाया तो उसी वायुवान पर लाद कर भारत से विश्वगुरु निर्यात होने लगे. इस विमान सेवा का नाम था- पतंजलि गेंदा गुलाब एयरवेज. इसी पर बैठकर अली फरीद गुजरात से स्वीडन गया और भारतीय ज्ञान का प्रसार किया. अली फरीद ने दानवों के विनाश के लिए आग्नेयास्त्र बनाया था जिसका नाम रखा दानवमीत. कमबखत फिरंगियों ने अली फरीद नीबूवाला का नाम अल्फ्रेड नोबेल रख दिया और दानवमीत नामक आग्नेयास्त्र का नाम डायनामाइट रख दिया. यह सिलसिला अब भी चल रहा है. पाणिनि और पतंजलि दोनों के आदिगुरु बाबा रामदेव के आविष्कार योग को फिरंगियों ने योगा बना दिया. अब जब निशंक जी मंत्री बन गए हैं तब बच्चों को असली इतिहास बताने का समय है.

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