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अगर 2024 में चुनाव नहीं होगा तो हमें फ्री की पूड़ी-सब्ज़ी, दारु कौन देगा और नफरत कौन फैलाएगा

“2024 में नहीं होंगे कोई चुनाव”
…अरे डर गए क्या? ना..ना डरे नहीं, चुनाव आयोग ने ऐसा कोई ऐलान नहीं किया है भाई. दरअसल ये धांसू आइडिया हमारे प्यारे, साक्षी महाराज जी के दिमाग़ की उपज है. महाराज जी उत्तर प्रदेश के उन्नाव ज़िले से भाजपा सांसद हैं. फ़िलहाल इस साल यहां से चुनाव लड़ने को उन्हें टिकट मिलता है या नहीं ये अभी साफ़ नहीं है, मामला फंसा है गुरु. अब इसी सब वजह से ये कभी कुछ-कभी कुछ बोल रहे हैं. तीन दिन पहले बोले थे की उनको टिकट न मिला तो नतीजे अच्छे नहीं होंगे पार्टी के लिए. फिर बोले जो होगा, जैसा होगा पार्टी के साथ खड़े रहेंगे. अब तो महाराज बिल्कुल ही अलग आइडिया बताए दिये हैं.

सांसद जी का कहना है कि इस चुनाव के बाद देश में चुनाव ही नहीं होंगे. मतलब ’19’ में मोदी जी को चुनो, फ़िर लाइफ़टाइम ‘मन की बात’ सुनो. (अमां मज़ाक है क्या ?)

अब इसे लेकर तमाम विपक्षी दल ये-वो बोल रहे हैं. केजरीवाल जी का तो कहना है कि ये सब मोदी-अमित की संविधान को बदलने की चाल है. ख़ैर, पक्ष-विपक्ष का तो काम है बोलना. इनको छोड़िये, मैं बड़ी सॉलिड जानकारी बता रहा हूं आपको… इसको समझिए. अग़र चुनाव होने वाक़ई में बंद हो गए तो क्या-क्या गज़ब हो जाएगा, पढ़िए.

चुनाव आयोग का विलोपन
अरे विलोपन माने ग़ायब हो जाना. वोटर लिस्ट से बहुत नाम ग़ायब होते रहते हैं. लाल कलर से नाम के ऊपर ‘विलोपित’ लिख जाता है. अगर चुनाव ही नहीं होंगे, तो आयोग क्या करेगा ? इसलिए इस बयान पर गंभीरता से चुनाव आयोग को ही विचार करना चाहिए. हां भाई, बेरोज़गारी बहुत बढ़ रही वैसे भी. BSNL में क्या चल रहा, सभी जान रहे हैं.

“भारी से भारी मत से विजयी बनाए” लिखा नहीं दिखेगा
चुनाव हो, और गली-नुक्कड़ पे कोई बैनर-होर्डिंग पे ये लिखा ना दिखे… ऐसा कभी हो सकता है भला? हाथ जोड़े, टोपी पहने, सफ़ेद.. लका-झक्क कुर्ते में हंसते हुए प्रत्याशी को देखकर तबियत ख़ुश हो जाती है कसम से. चुनाव के बंद होते ही ये सुख छिन जाएगा हम-सबसे. हालांकि ये आज तक ना समझ में आया की ‘भारी से भारी’ मत क्या होता है? ‘ज़्यादा से ज़्यादा’ तो समझ आता है…भारी का क्या काम है यहां भाई? भाषा वैज्ञानिकों को इसे देखना पड़ेगा बॉस.

चुनाव वाली पूड़ी-सब्ज़ी से महरूम होना
अरे भाई साब, कभी खाये हो चुनावी बस्ते की पूड़ी-सब्ज़ी? कसम से, बहुत सॉलिड रहती है गुरु. मतलब अईसा टेस्ट शादी-ब्याह में भी नहीं मिलता है. अब चुनाव नहीं होंगे, तो चुनावी बस्ते नहीं लगेंगे. बस्ते नहीं लगेंगे, तो पूड़ी-सब्ज़ी क्या ख़ाक मिलेगी. ना-ना, बाकी सब चल जाएगा… मग़र ये पूड़ी-सब्ज़ी वाला मामला बहुत संवेदनशील है भाई. चुनाव ज़रूरी है.

न्यूज़ चैनल चिड़िया-उड़ खेलेंगे क्या
सबसे ज़्यादा चिंता वाली बात न्यूज़ चैनलों के लिए हो जाएगी. ‘कौन बनेगा मुख्यमंत्री’, ‘कौन बनेगा प्रधानमंत्री’ ये सारे शो कैसे होंगे? और ब्रम्हांड का परम ज्ञान रखने वाले एक्जिट पोल का क्या होगा भाई? (वैसे इत्ते साल से वोट डालने जा रहे हैं… कभी कोई एग्जिट पोल को लेकर सवाल पूछता मिला आपको? हमको तो नहीं मिला.)

हां, तो ये कुछ बहुत ही ज़रूरी मुद्दे हैं. उम्मीद है, जो भी चुनाव जीतेगा… चुनाव बंद करने की बात नहीं करेगा.

बाकि अगर आप यह भी जानना चाहते हैं कि साक्षी महाराज जैसों का हमारे समाज में क्या योगदान है और देश का माहौल क्या है? तो जाने-माने रिपोर्टर रणविजय ने जो लिखा है उसे पढ़िए… उन्होंने दो घटनाओं का जिक्र किया है, जिससे आप शायद समझ सकें.

पहली घटना
आज मैं धोबी के पास कपड़े लेने गया. उसकी दुकान पर दो लड़के आये, यही कोई 18-20 साल के होंगे. मुझे देखते ही कहने लगे- मसूद गज़ब ठोका गया है. इस बार चुनाव में मोदी जी को जिताना है. फिर तो एक एक कर ठोकेंगे. इसी बीच एक लड़का कहता है, मोदी जी की वजह से मुल्ले काबू में हैं. वरना न जाने क्या करते. 
यह सारी बात वो मुझे ही सुना रहे थे इस बात का मुझे यकीन तब हुआ जब वो मेरे ओर देख कर ही यह सब कह रहे थे. आप सोच रहे होंगे मुझसे ऐसा कहने की क्या वजह होगी. दरअसल कई बार मेरे पहनावे को लेकर बहुत से लोग मुझे मुसलमान ही समझ लेते हैं. मेरे साथ ऐसा बहुत बार हुआ है. तो ये दोनों लड़के भी मुझे मुसलमान ही समझ बैठे थे.

दूसरी घटना
मैं अयोध्या में एक धार्मिक रैली कवर करने गया था. उस वक्त भी मैंने कुर्ता और गमछा लिया था. इसे कवर करते हुए कई बार ऐसा हुआ कि नौजवानों का गुट मेरे बिल्कुल पास आकर नारेबाजी करता. जैसे बिल्कुल कान के पास कोई चिल्ला रहा हो. कई बार सामने से भी ऐसा ही किया गया. एक बार तो मैंने अपने साथी से कहा- अगर यहाँ माहौल खराब हुआ तो सबसे पहले मैं मारा जाऊंगा. उस रोज ये ख्याल मेरे मन में कई बार आया.

मैं नहीं कहता ऐसी सोच सबकी होगी, लेकिन बीते 5 साल में एक वर्ग ऐसा तैयार हुआ है, एक माहौल ऐसा तैयार हुआ है. और यकीन मानिए ये कहीं से भी सही नहीं है.

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