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राजनीति रिपोर्ट

सरकार की नाक के नीचे माल्या, चौकसी और नीरव मोदी से बड़ा घोटाला IL&FS ने किया है!

अब पछताए का होत है जब चिड़िया चुग गयी खेत……..

दो दिन पहले ईडी ने IL&FS कंपनी के पूर्व चेयरमैन रवि पार्थसारथी के ठिकानों पर छापा मारा है। अधिकारियों ने बताया कि ईडी ने कथित पेमेंट डिफॉल्ट मामले में प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ट्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत केस भी दर्ज किया है, दरअसल कुछ दिनों पहले खबर आयी थी कि आईएल एंड एफएस पर काले धन को सफेद बनाने का संदेह है। यह बहुत गंभीर बात है क्या नोटबन्दी के दौरान IL&FS काले को सफेद बना रहा था?

वित्त वर्ष 2013-14 में IL&FS का कर्ज 48672 करोड़ रुपए था क्या किसी ने सवाल उठाया कि यह कर्ज मोदी सरकार में 91 हजार करोड़ से भी अधिक कैसे पहुंच गया जबकि यह न खाऊंगा न खाने दूँगा वालों की सरकार है?

यह मामला नीरव मोदी, मेहुल चोकसी, ललित मोदी और विजय माल्या के घोटालों से भी बड़ा हैं लेकिन इस ओर मीडिया बिल्कुल ध्यान ही नहीं दे रहा है। IL&FS पर 91 हजार करोड़ रुपये से भी अधिक का कर्ज है। पिछले 2 महीने से आईएल एंड एफएस लगातार पेमेंट डिफॉल्ट कर रहा है

सबसे महत्वपूर्ण बात तो यह है कि संकट से जूझ रही IL&FS के तत्कालीन चेयरमैन रवि पार्थसारथी का कुल वेतन वित्त वर्ष 2017-18 में 144% बढ़ा था। इस दौरान प्रबंधन से जुड़े कर्मचारियों के वेतन में औसतन 66% जबकि गैर-प्रबंधकीय कर्मचारियों के वेतन में 4.44% की वृद्धि की गई, यानी एक अरसे से इस कंपनी का मैनेजमेंट लूट और अय्याशी में लगा हुआ था, तो मोदी सरकार आँख बन्द कर के क्यों बैठी हुई थी, कोई ध्यान क्यों नहीं दे रहा था?

आईएल एंड एफ़एस के चैयरमैन रवि पार्थसारथी ने अपने पद से स्वास्थ्य का हवाला देते हुए इस्तीफ़ा दे दिया, और लंदन जाकर बस गए इसके बाद IL&FS रेटिंग गिरी. अगस्त महीने में इक़रा और मूडी जैसी संस्थाओं ने इसकी रेटिंग AAA से घटाकर AA+ कर दी थी. बाद में इसे एक झटके में इस रेटिंग को सबसे डाउन कर दिया गया इसमे 14 लाख कर्मचारियों के पेंशन ओर प्रोविडेंट फंड मैनेज करने वाले ट्रस्टों के पैसे फंस गए, जिसकी गारंटी देने से अब वित्त मंत्रालय भी इंकार कर रहा है।

अब IL&FS संकट को लेकर जो तस्वीर उभर कर सामने आ रही है उसमें सरकार कुल 91 हजार करोड़ रुपये में से मुश्किल से करीब 40 हजार करोड़ ही बचा पायेगी, बाकी 50 से 55 हजार करोड़ रुपया डूब जाएगा। इस IL&FS में 40 फीसदी हिस्सेदारी सरकारी बैंकों और एलआईसी जैसी कंपनियों की है.

यह अर्थव्यवस्था के लिए बहुत बड़ा झटका साबित होने जा रहा है और अब छापे मारकर मोदी सरकार सिर्फ धूल में लट्ठ मार रही है.

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