लोकवाणी

मुख़्तलिफ़ आवाज़, निगाह और विचार

राजनीति समाज

पाकिस्तान-भारत की लीडरशिप प्रोपेगेंडाबाज़ और जालसाज है, दोनों हुकूमतों की नूरां कुश्ती से बचिए

वर्तमान पाकिस्तानी लीडरशिप को इतना भी सीधा मत समझिए। पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने CNN को एक इंटरव्यू दिया है। इस इंटरव्यू में उन्होंने कई महत्वूवर्ण बातें कही हैं। कुरैशी ने एक तरफ बोला है कि वो किसी भी प्रकार के युद्ध में ना पड़कर पाकिस्तान से गरीबी और अशिक्षा को दूर करना चाहते हैं, पाकिस्तान का सम्पूर्ण विकास करना चाहते हैं। जनता ने उनकी पार्टी को इसलिए ही चुना है। दूसरी तरफ कुरैशी ने स्वीकारा है कि जैश का सरगना मसूद अजहर पाकिस्तान में ही मौजूद है। बकौल कुरैशी मसूद अजहर इतना बीमार और असहाय है कि अपने घर से भी नहीं निकल पाता है।

कुरैशी ने इस इंटरव्यू में कहा है कि पाकिस्तानी सरकार मसूद अजहर पर कार्रवाई करने को तैयार है, लेकिन इसके लिए उसे भारत की तरफ से पक्के सबूत चाहिए। ऐसे सबूत जिनके आधार पर पाकिस्तानी न्यायव्यवस्था को अजहर के खिलाफ कनविंस किया जा सके।

अब देखिए, सारा खेल यहीं पर है। पाकिस्तान को कौन से सबूत चाहिए। संयुक्त राष्ट्र ने जैश को एक आतंकी संगठन माना हुआ है। इसका सरगना मसूद अजहर है। पुलवामा से लेकर तमाम आतंकी हमलों में जैश का हाथ रहा है, ये उसने खुद कबूल किया है। मसूद के तमाम ऐसे वीडियो मौजूद हैं जिसमें वो साफ-साफ आतंक फैलाने की वकालत कर रहा है। अगर इन सबको भी पाकिस्तान की सरकार और न्यायव्यवस्था पर्याप्त सबूत नहीं मान सकती तो फिर इसका मतलब तो यही है कि पाकिस्तानी की नई हुकूमत अपने पूर्ववर्तियों की तरह इन आतंकी हमलों को कश्मीर में आजादी की लड़ाई के तौर पर ही देखती है। जबकि इन धार्मिक कट्टरपंथी हमलों को आजादी की लड़ाई के तौर पर कतई नहीं देखा जाना चाहिए।

असल में पाकिस्तान में इमरान खान के नेतृत्व में जो नई हुकूमत आई है उसने सत्ता में आने के लिए इस्लामिक कट्टरपंथियों से हाथ मिलाने में जरा भी हिचक नहीं दिखाई है। सत्ता में आने से पहले इमरान खान ने जनता से जितने भी पॉपुलिस्ट वादे किए हैं, उनको पूरा करने के लिए ना तो उनके पास कोई रोडमैप है और ना ही संसाधन। चीन और अब सऊदी अरब को छोड़कर दूसरा कोई देश पाकिस्तान में इन्वेस्ट भी नहीं कर रहा है। तो ऐसे में इस नई हुकूमत के लिए फायदेमंद यही है कि वो जनता को इस भ्रम में डाले रहे कि पूर्वी सरहद पर तनाव की वजह से विकास कार्यों को पूरा करना संभव नहीं हो पा रहा है; हम तो विकास करना चाहते हैं लेकिन भारत की हुकूमत युद्ध चाहती है। ये बात कमोबेश सही भी है। नरेंद्र मोदी भी अपनी भारी विफलता को छुपाने के लिए जबरन तनाव को और बढ़ा रहे हैं। दोनों हुकूमतों को इस तनाव से फायदा मिल रहा है। हथियार बेचने वालों को भी फायदा हो रहा है। बस इस फायदे में मारे निर्दोष जा रहे हैं।

रही बात सरहदों की तो उसे समझाने के लिए मेरे पास एक कथा है, “पृथ्वी नाम का एक ग्रह है। उसपर मनुष्य रहते हैं। मनुष्यों ने ग्रह पर जगह-जगह रेखाएं खींच दी हैं। एक रेखा में रहने वाला आदमी दूसरी तरफ चला जाता है तो उसको वापस लाने के लिए तरह-तरह की कागजी कार्यवाहियां करनी पड़ती हैं। एक राष्ट्र के लोगों को दूसरे राष्ट्र के उन लोगों से लड़वाया जाता है, जिनसे वे कभी मिले ही नहीं होते हैं। ये है आपकी सभ्यता का अब तक का लेखा-जोखा।”

खैर इन सबके बीच बेहद खुशी की बात यह है कि अभिनंदन वापस आ गए हैं। उनके वापस आने पर उनका वीडियो खूब वायरल हो रहा है। वीडियो वायरल होने पर वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार लिखते हैं,

“लोग वीडियो यह दिखाने के लिए वायरल कर रहे हैं कि अभिनंदन ने भारतीय मीडिया के बारे में कुछ कहा है। हमें यह बात ध्यान में रखनी चाहिए कि अभिनंदन से ये बातें कहलवाई गईं हैं। जब उन्होंने कहा तब वे पाकिस्तान के क़ब्ज़े में थे। ऐसा वीडियो बनवा कर पाकिस्तान ने सही नहीं किया और आप भी इसे शेयर कर बेवजह उसके प्रोपेगैंडा का शिकार न हों। क्या विंग कमांडर वहाँ न्यूज चैनल देख रहे थे? उन्हें कैसे पता कि भारतीय मीडिया में क्या बताया जा रहा है और पाकिस्तानी मीडिया में क्या बताया जा रहा है। इसलिए व्हाट्स एप पर पाकिस्तान के भेजे गए इस प्रोपेगैंडा को प्रचारित न करें। देखें ज़रूर कि कैसे प्रोपेगैंडा होता है। लेकिन उसे लेकर अपनी किसी ललक को शांत न करें। बाकी मीडिया के बारे में जो बातें हैं वो सही हैं लेकिन वो दोनों मुल्कों के मीडिया के लिए सही है। मगर पाकिस्तान के इस प्रोपेगैंडा वीडियो को आप मीडिया पर की गई टिप्पणी के लिए न देखें बल्कि दोनों देशों के बीच अहं की लड़ाई के संकेत के रूप में देखें।

आपको याद है नेपाल भूकंप के वक़्त भारत ने काफ़ी मदद की थी। भारत के मीडिया में इतनी वाहवाही होने लगी कि अति पार हो गई। उससे वहाँ के लोग भड़क उठे और भारतीय मीडिया के बहिष्कार की बात करने लगे। मीडिया ने पतन का प्रमाण तो दिया है लेकिन ये बात पाकिस्तान ने अपने कब्ज़े में सैनिक से कहलवाकर ठीक नहीं किया है। एक अच्छी परंपरा को बनाने का मौक़ा गँवा दिया। कोई भी देश ऐसा ही करता लेकिन तब तो ऐसे के जवाब में वैसा ही होता रहेगा। यह ख़त्म कब होगा।”

इसलिए आखरी में यही कहूंगा कि भारत और पाकिस्तान दोनों सरकारें प्रोपेगेंडाबाज़ हैं दोनों से बचना जरूरी है।

LEAVE A RESPONSE

Your email address will not be published. Required fields are marked *