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राजनीति रिपोर्ट

इस तथाकथित ‘सर्जिकल स्ट्राइक 2.0’ से भारत को क्या हासिल हुआ?

सेटेलाइट इमेज साफ बता रही है कि बालाकोट में मदरसे की बिल्डिंग बिल्कुल अक्षुण्ण खड़ी हुई है, हम सेना पर संदेह बिल्कुल नही कर रहे क्योंकि यह बिल्कुल सही बात है कि हमने पाकिस्तान पर अटैक किया है और हमने बम भी गिराए हैं। इस संदर्भ में वायुसेना अध्यक्ष की बात बेहद महत्वपूर्ण है जो उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कही थी कि ‘हमें जो टारगेट दिया वो हमने हिट किया’ ……… इस बात का मतलब आप समझ रहे हैं?

प्रतिष्ठित समाचार एजेन्सी ‘रॉयटर्स’ और खाड़ी के चैनल ‘अल जज़ीरा’ के संवाददाताओं ने घटनास्थल से जो रिपोर्ट भेजी है। वह भी यही कह रही है कि पहाड़ी पर बनी जिस इमारत को जैश का आतंकी शिविर बताया जाता है, वह वहाँ जस की तस खड़ी है।

सुरक्षा मामलों के अमेरिकी थिंक टैंक अटलाँटिक काउंसिल की डिजिटल फ़ॉरेन्सिक रिसर्च लैब (डीएफ़आर लैब) ने सैटेलाइट इमेजरी को देख हैरानी जतायी कि बम जैश के आतंकी ठिकाने से इतनी दूर क्यों गिरे? उसने कहा कि यह वाक़ई बड़ा रहस्यमय है। कुल मिला कर इसमें कोई सन्देह नहीं है कि भारतीय वायुसेना ने बड़ी बहादुरी से जाबा पहाड़ी पर धावा बोला और बम गिराये, लेकिन बम असली लक्ष्य से काफ़ी दूर गिरे।

सत्य हिंदी न्यूज़ वेबसाइट ने DFR लैब के हवाले से लिखा है कि ‘डीएफ़आर लैब का कहना है कि मौक़े पर पड़े बमों के टुकड़ों से साफ़ पता चलता है कि भारतीय वायु सेना ने इज़रायल निर्मित स्पाइस-2000 प्रिसीज़न बम का इस्तेमाल किया। इस बम की ख़ूबी यह है कि इसे इस्तेमाल करने से पहले इसमें अक्षांश और देशांतर की सटीक जानकारी डाल दी जाती है। यह बम जीपीएस सिस्टम पर काम करता है और इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल प्रणाली का इस्तेमाल करता है। यानी यह बम छोड़े जाने के बाद ठीक उसी अक्षांश और रेखांश पर पहुँचता है, जो इसकी प्रणाली में फीड किया गया हो। साथ ही जिस जगह को निशाना बनाना है, उस जगह की तसवीर भी इसमें पहले से फ़ीड कर दी जाती है और बम अपने निश्चित निशाने पर पहुँच कर इसमें फ़ीड की गयी तसवीर का मिलान निशाना बनाये जाने वाली जगह के वास्तविक दृश्य से करता है और दोनों का मिलान हो जाने पर निशाने पर वार करता है’।

‘स्पाइस-2000 प्रिसीज़न बम जिस इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल प्रणाली का इस्तेमाल करता है, वह इतनी सटीक है कि इसके निशाने में ज़्यादा से ज़्यादा 100 मीटर तक की चूक ही हो सकती है। तो फिर सवाल उठता है कि बम इतनी दूर जा कर कैसे गिरे?’

यानी क्या यह कहना सही होगा कि टारगेट ही गलत दिए गए, इसमें हमारे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की कितनी भूमिका है ?

गोयबल्स ने कहा है कि एक झूठ को सौ बार दोहराइए वह सच बन जाता है। भारतीय मीडिया ने तो दसियों हजार बार हमले में 300 आतंकवादी के मरने का झूठ दोहराया है। आप किसी भी सड़क चलते शख्स से बात कर लीजिए वह आपको यही बताएगा कि पाकिस्तान पर मोदी ने हमला कर 300 आतंकवादी मार दिए हैं।

आज इन्होंने अपने झूठ को सच साबित कर दिया है….. आज तो नहीं लेकिन कुछ सालों बाद यही जनता जब पुलवामा, एयर स्ट्राइक और भारत पाक की सेनाओं के मध्य हुई झड़पों पर जब गंभीरता से सोचेगी तब पाएगी कि इन 16 दिनों में भारत ने अपने 62 सैनिकों को गवाया था, पाकिस्तान ने भारत का एक पायलट अपने कब्जे में कर लिया और तीसरे दिन उसे छोड़कर अंतराष्ट्रीय स्तर पर अपने आपको शांति का पुजारी साबित करने का प्रयास किया… तो इस पूरे प्रकरण में नुकसान किसका हुआ?

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