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भारत का संविधान असहाय खंभे से बंधा है और भीड़ उसे पीट रही है

कृष्णकांत

भारत का संविधान असहाय खंभे से बंधा है. भीड़ उसे पीट रही है. संविधान की आत्मा घायल हो गई है. संविधान ने अस्पताल में अंतिम सांस ली है. आपको बताया गया है कि यह तबरेज अंसारी है. यह तबरेज अंसारी नहीं है. यह भारत का संविधान है जो भारतीय सीमा में हर व्यक्ति को प्राण और दैहिक स्वतंत्रता की गारंटी देता है.

अगर तबरेज को अदालत ने मौत की सजा दी होती तो भारत के संविधान का इकबाल बुलंद होता. लेकिन अदालत से बाहर तबरेज को भीड़ ने मार डाला. संविधान असहाय हो गया.

सवाल सिर्फ तबरेज या तेजबहादुर की जिंदगी का नहीं है, सवाल उस संविधान और देश की गरिमा का है, जिसका इकबाल धूमिल हो गया है. संविधान नागरिकों को जो गारंटी देता है, उसे छीन लिया गया है.

झारखंड लिंच मॉब का स्वर्ग है. झारखंड में संविधान और कानून का शासन नहीं है. झारखंड में लोकतंत्र अंतिम सांसें ले रहा है. झारखंड में अब भीड़तंत्र लागू है. भीड़ जिसे चाहे पीट कर मार सकती है. बीबीसी ने झारखंड जनाधिकार मोर्चा की रिपोर्ट के हवाले से लिखा है कि ‘मौजूदा भाजपा शासन में कम से कम 12 लोग यहां भीड़ द्वारा पीट कर मारे जा चुके हैं. इनमें 10 मुसलमान हैं और 2 आदिवासी. अधिकतर मामलों में धार्मिक वैमनस्यता की बातें उभरीं और आरोपियों का संबंध भाजपा या विश्व हिंदू परिषद और उसके सहायक संगठनों से निकला.’

तबरेज़ अंसारी को गांव वालों ने चोरी का आरोप लगाकर पकड़ा, खंबे से बांधकर पीटा और जय श्री राम व जय हनुमान का नारा लगाने के लिए बोला. तबरेज अंसारी की मौत हो गई है.

हो सकता है कि तबरेज दोषी रहा हो, हो सकता है कि निर्दोष रहा हो. लेकिन भीड़ ने जो उचित समझा वह कर दिया. कानून दोषी आदमी को सजा देता है और उसे अपने बचाव का बार बार मौका देता है. कोई दोषी है तो उसे सजा मिलती है. लेकिन ऐसी भीड़ तैयार कर दी गई है जिसने संविधान को सस्पेंड कर दिया है. अदालत किसी को मौत की सजा दे तो वह न्याय है. भीड़ किसी को गैरन्यायिक ढंग से मार दे तो यह संविधान की हत्या है. जिन्होंने संविधान की शपथ ली है, वे संविधान की मौत पर मौन हैं. यानी वे संविधान को कुचल देने के हिमायती हैं.

यह वही झारखंड है जहां अलीमुद्दीन अंसारी की लिंचिंग के सजायाफ्ता अभियुक्तों को हाईकोर्ट से ज़मानत मिली तो केंद्रीय मंत्री जयंत सिन्हा ने माला पहनाकर अभियुक्तों का स्वागत किया था. यानी सरकार खुलकर लिंच मॉब के साथ है.

भीड़ सिर्फ मुसलमान को नहीं मारती. पाकिस्तान में इसी भीड़ का शासन है. वह भीड़ उन्हीं मुसलमानों को मारती है जिनके नाम पर यह भीड़तंत्र शुरू किया गया था. भारत में भी गाय के बहाने कई हिंदू निपटाए जा चुके हैं. यह भीड़तंत्र एक दिन आपको भी पीटकर मार सकता है.

एक खिलाड़ी के क्षतिग्रस्त अंगूठे पर ट्वीट करने वाले प्रधानमंत्री जी संविधान और कानून की हत्या पर भी मौन कैसे रह सकते हैं? आखिर यह देश सिर्फ तबरेज अंसारी का तो नहीं है! यह देश 137 करोड़ लोगों का है और संविधान सबको जीवन और सुरक्षा की गारंटी देता है. हमारी संसद, हमारे प्रतिनिधि, हमारा प्रशासन संविधान की शपथ लेकर संविधान की ही हत्या कैसे कर रहे हैं?

यह एक जिंदगी का नहीं, एक देश की राष्ट्रीय गरिमा का सवाल है. इसके ध्वस्त होने के बाद आपका भी ध्वस्त होना तय है. एक नागरिक के रूप में आपकी पहचान तभी तक सुरक्षित है, जब तक आपके देश का संविधान और उसका इकबाल सुरक्षित है.

अगर आप चिंतित नहीं हैं तो आपको चिंतित होना चाहिए और अपनी सरकार से हर नागरिक के लिए प्राण और दैहिक स्वतंत्रता की गारंटी मांगनी चाहिए.

(अगर किसी को यह लेख बुरा लगे तो बिना किसी बहस के हमें माफ कर दें.)

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