लोकवाणी

मुख़्तलिफ़ आवाज़, निगाह और विचार

रिपोर्ट समाज

मोदी-मोदी चिल्लाने की बजाय किसानों की हालत को समझिए और सच्चाई को तलाशिए

साकेत आनंद

देश में किसी के साथ अगर सबसे घटिया मज़ाक होता है तो वह किसानों के साथ होता है। खेती-किसानी की समस्या को हल करने के सवाल पर हर सरकार खुलेआम झूठ बोलते आई है। मौजूदा भाजपा सरकार उसी का एक एक्सटेंशन थी। हर रैली और जनसभा में प्रधानमंत्री से लेकर हर छुटभैया नेता किसानों का नाम लेना नहीं भूलता है, लेकिन किसान और किसानी है कि जस का तस।

कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के समय में स्वामीनाथन आयोग बनाई गई। इसके बाद आयोग की सिफ़ारिशें धूल फांकती रही। चुनावी रैलियां किसानों के नाम पर गरमाती रही। मोदी जी आए तो वही मंत्र जपते हुए आगे बढ़े, हुआ कुछ नहीं। पिछले 2 सालों में सिर्फ़ दिल्ली में कई बार देश भर के किसान इकट्ठा हुए। किसानों की मांगें बहुत बुनियादी रही- फसलों का सही दाम (एमएसपी), कर्ज़माफ़ी।

इस बीच किसान आत्महत्या करते रहे, मध्यप्रदेश में किसानों की गोली मारकर हत्या हुई, आंदोलन चलता रहा, महाराष्ट्र के किसान मंडी में 50 पैसे प्रति किलो प्याज बेचते रहे और इधर लोक कल्याण मार्ग में बैठा एक ‘ फ़कीर’ आमदनी दुगुनी करने का सपना दिखाता रहा। अब उस सपने को चुनावी घोषणा पत्र (मेनिफ़ेस्टो) में बेचा जा रहा है।

किसानों की दुर्दशा पिछले 5 साल में कहां से कहां पहुंच गई। खेत में फसल काटते तस्वीर खिंचवाने वाली भाजपा सांसद को उन किसानों की हालत पता है, फिर भी किसानों के साथ क्रूर मज़ाक हुआ। सरकार ने आत्महत्या के आंकड़े जारी करने बंद कर दिए, लेकिन आत्महत्या तो हो रही है। अब भी औसतन देश के 12-13,000 किसान आत्महत्या कर रहे हैं।

कृषि विशेषज्ञ लगातार किसानों की हालत और सरकार की कृषि नीतियों पर लिखते रहे हैं। हरीश दामोदरन, देविंदर शर्मा, अशोक गुलाठी, योगेंद्र यादव जैसों ने झूठे वादों और इरादों पर सरकार का पोल खोला। इसके बावजूद सरकार चुनाव के समय में आकर घोषणाबाजी कर सकी।

योगेन्द्र यादव ने पिछले साल किसानों की समस्या और सरकार के दावों की पड़ताल करते हुए “मोदीराज में किसान: डबल आमद या डबल आफ़त?” नामक एक दस्तावेज़ तैयार किया। उन्होंने ‘द कैरेवन’ के जनवरी अंक में ‘A Plague of Promises’ शीर्षक से आर्टिकल लिखा था। इससे ही कुछ महत्वपूर्ण बातें निकालकर मैं यहां लिख रहा हूं….

  1. सबसे पहली बात तो यह है कि किसानों की आय का कोई नियमित आंकड़ा उपलब्ध ही नहीं है। पिछली बार भारत सरकार के राष्ट्रीय सैंपल सर्वेक्षण ने साल 2012-13 में किसानों की आमदनी का अनुमान लगाया था। उस वक़्त देश के हर किसान परिवार की औसत मासिक आमदनी 6,426 रुपये थी। इसमें आधी से भी कम आमदनी यानी 3,080 रुपया खेती की कमाई थी। बाकी पशुपालन, मजदूरी, व्यवसाय से आमदनी थी।
  2. सरकार ने साल 2016 में किसानों की आय दोगुनी करने की घोषणा की थी। लेकिन किस आधार पर, ये पता नहीं था। फिर सरकार ने 2017 में डबल आमदनी पर एक कमेटी बनाई, जिसने अनुमान लगाया कि 2015-16 में देश में किसान परिवार की औसत मासिक आय 8,058 रुपये है। इस पर योगेन्द्र यादव ने लिखा कि अगर महंगाई के असर को हटाकर देखा जाय तो किसान परिवार की औसत वास्तविक आय 6,175 रुपये ही थी। यानी तीन साल में किसान की वास्तविक आय घट गई थी।
  3. सरकार की समिति ने बताया कि अगर किसानों की वास्तविक मासिक आय को दोगुना करना है तो 2022-23 तक देश के औसत किसान परिवार की वास्तविक आय 14,391 रुपये प्रति महीने होनी चाहिए। लेकिन यह तब जब इस बीच महंगाई बिल्कुल न बढ़े, जो कि व्यवहारिक नहीं है।
  4. समिति ने अनुमान लगाया था कि अगर 6 साल में महंगाई की मौजूदा दर जारी रही तो 2022-23 में हर किसान परिवार की मासिक आय 20,250 रुपये तक बढ़ानी होगी। इसका मतलब है कि हर साल किसान परिवार की वास्तविक आय 10.4 फ़ीसदी की दर से बढ़नी चाहिए।
  5. नीति आयोग ने किसान की वास्तविक आय में वृद्धि को लेकर अनुमान लगाया था। साल 2011-2016 के बीच किसान की वास्तविक आय में वृद्धि 3.8 फ़ीसदी की दर से हुई थी। यानी अगर 2016 के बाद भी अगर यही रफ़्तार होगी तो किसानों की आय दोगुनी करने में 25 साल लगेंगे।
  6. भारत सरकार के आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, मोदी राज में किसानों की आय में वृद्धि दर और घट ही गई। मोदी सरकार के पहले साल 2014-15 में बढ़ोतरी की बजाय 0.2% कमी हुई थी। साल 2015-16 में 0.7 फ़ीसदी की बढ़ोतरी हुई। अगले दो साल में 4.9% और 3.4% की बढ़ोतरी हुई। यानी मोदी सरकार के पहले 4 साल में सिर्फ़ 2.2 फ़ीसदी आय बढ़ी। योगेन्द्र यादव ने लिखा कि इस हिसाब से तो वास्तविक आय डबल करने में 50 साल भी लग सकते हैं।

इसके अलावा बस इतना ही कहूंगा कि मोदी-मोदी चिल्लाने की बजाय किसानों की हालत को समझिए और सच्चाई को तलाशिए। सरकार जो किसानों के साथ मज़ाक कर रही है, उसका जवाब दीजिए। मैनिफेस्टो कल भी वही था, आज भी वही है और 20 साल बाद भी वही रहेगा।

LEAVE A RESPONSE

Your email address will not be published. Required fields are marked *