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मोदी सरकार का महाघोटाला: जेट एयरलाइंस की बर्बादी के पीछे का असली खेल

जब सारा मीडिया मोदी मोदी उदघोष में डूबा हुआ था तब इस बीच सुब्रमण्यम स्वामी का एक ट्वीट फ्लैश हुआ और बात आयी गयी हो गई. ट्वीट यह था “मैं नमो से अपील करता हूं कि वे जेटली और जयंत सिन्हा को जेट एयरवेज को स्पाइसजेट के हाथों बेचने के प्रयासों से बाज आने की हिदायत दें। इस मामले में पक्षपात और सरकारी पद के दुरुपयोग की बू आ रही है जिससे भाजपा की प्रतिष्ठा को नुकसान होगा।”

आखिरकार यह मामला क्या है जिस पर स्वामी अपनी ही सरकार के मंत्रियों पर निशाना साध कर बैठ गए हैं? कल क्विंट ने इस घोटाले (जी हां यह घोटाला ही है) की परतों को खोलने का प्रयास किया है। क्विंट ने बताया है कि यदि कोई एयरलाइंस बन्द होती है तो उसके विमानों द्वारा जिन रुट पर सर्विस दी जा रही होती हैं उसे दूसरी विमानन कंपनी को किस तरह से अलॉट किया जाए इस संबंध में कुछ नियम और गाइडलाइंस बनाए गए हैं जो 2003 में बनाए गए थे। यह नियम कहते हैं कि पहले पुरानी एयरलाइंस को स्लॉट देंगे. फिर नई एयरलाइंस को देंगे.

जब से जेट एयरवेज बन्द हुई है। इस नियमों की जमकर धज्जियाँ उड़ाई जा रही है और विस्तारा ओर एयरइंडिया की जगह नयी कम्पनी स्पाइस जेट को मनचाहा फायदा पहुंचाया जा रहा है।

सारे महत्वपूर्ण रुट स्पाइस जेट को दिए जा रहे हैं। विमानन उद्योग से जुड़े लोग जानते हैं कि एक बार स्लॉट पर कब्जा हो जाने पर आप एयरलाइंस को अचानक इससे हटा नहीं सकते हैं।

स्पाइसजेट के पास अब जेट के बंद हुए स्लॉट का बड़ा हिस्सा और कारोबार जा रहा है. इस पर इंडिगो और विस्तारा ने कड़ी आपत्ति जताई है।

जेट बन्द होने पर जेट कर्मियों ने स्टेट बैंक प्रमुख रजनीश कुमार पर भी एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी। जंतर मंतर पर भी जेटकर्मी रजनीश कुमार से नाराज थे। बहुत से लोग यह समझ नहीं पा रहे थे कि इसमे रजनीश कुमार की क्या भूमिका है?

कल उसे भी स्पष्ट करते हुए क्विंट ने लिखा है कि जेट में पचास फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी एसबीआई और एक सरकारी संस्था एनआईआईएफ के पास हैं। एसबीआई को पता था कि एयरलाइन डूब रही है. लेकिन तब भी एसबीआई ने वक्त पर एक्शन नहीं लिया.

‘जब संकट बढ़ गया, तो एसबीआई ने कहा, हम नए बिडर लाएंगे. इनवेस्टर लाएंगे और जरूरत पड़ी तो 1000-1500 करोड़ डाल भी देंगे, लेकिन एयरलाइंस सिक्योरिटी देगी तब, लेकिन डूबती हुई एयरलाइंस सिक्योरिटी कहां से लाती एसबीआई ने सोचा पैसा दे देंगे, तो हमारे ऊपर सीबीआई जांच बैठ जायेगी। लेकिन एसबीआई को ये समझ में नहीं आया कि उसके कारण ही एयरलाइन डूबी. डूबी तो उसका भी पैसा भी डूबा पर SBI ने नया इमरजेंसी फंड नहीं डाला’

SBI ने कुछ नहीं किया. उसने अपनी भूमिका सही ढंग से नहीं निभाई. जेट एयरवेज दर्दनाक तरीके से बंद हुई. अब जिस तरह का घटनाक्रम सामने आ रहा है उससे यह समझ मे आ रहा है कि यह व्यक्ति विशेष को फायदा पुहचाने के लिए किया गया जो स्पाइसजेट का मालिक है और जिसका नाम अजय सिंह है। अजय सिंह भाजपा से प्रमोद महाजन के जमाने से जुड़े हुए हैं। 2014 में ‘अबकी बार मोदी सरकार’ का नारा भी अजय सिंह का ही गढ़ा हुआ था. वो लगातार बीजेपी के साथ काम करते रहे हैं।

क्विंट अजय सिंह की इतनी ही कहानी बताता है। लेकिन यह नहीं बताता कि अजय सिंह और भाजपा की सफलता की कहानी एक साथ चलती है। आज वे देश के उन सर्वोच्च तीन उद्योगपतियों में एक हैं, जिन्होंने मोदी सरकार के पिछले तीन साल में अपने कारोबार में 600 फीसदी से ज्यादा रिकॉर्ड मुनाफा कमाया है। 2017 में जब मोदी सरकार ने NDTV के मालिक प्रणव राय के ठिकानो पर छापा मारा था और NDTV मुश्किल में था तब भी यह खबर आई थी कि अजय सिंह ने NDTV के बहुत सारे शेयर खरीदे हैं।

बहरहाल अजय सिंह ने जैसे ही 2015 में मारन परिवार से स्पाइस जेट को खरीदा। उसके बाद से ही स्पाइस जेट का शेयर बाजार में कुलांचे मारने लगा। इन तीन वर्षों में स्पाइस जेट का शेयर महज 14 रुपये से 118 रूपए तक पहुंच गया है. एयरलाइन के धंधे में ऐसा लाभ अब तक किसी कम्पनी को नहीं हुआ है।

जिस वक्त 2015 में स्पाइसजेट बिका था उस वक्त बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने इस सौदे पर सवाल खड़े किए थे। उन्होंने अजय सिंह द्वारा स्पाइसजेट को खरीदने को एक घोटाला बताया था। अब 2019 में स्वामी वही बात फिर दोहरा रहे हैं।

अजय सिंह 2004 में तब सुर्खियों में आए जब एनडीए सरकार में सूचना और प्रसारण मंत्री रहे प्रमोद महाजन ने उन्हें OSD यानी ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी बनाया। अजय सिंह ने बड़ी चालाकी से चाल चलते हुए डूबती हुई एयरलाइंस मोदीलुफ्थ की 20 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी। मोदिलुफ्त कंपनी का नाम बदलकर ही स्पाइसजेट किया गया। अजय सिंह धीरे धीरे उसके सर्वेसर्वा बन बैठे। UPA सरकार के समय अजय सिंह ने अपनी सारी हिस्सेदारी कलानिधि मारन को बेच दी जो यह कम्पनी घाटा खाते हुए 2015 तक चलाते रहे।

2015 में स्पाइस जेट में ऐसा ही खेल खेला गया जो आज जेट के साथ खेला जा रहा है। स्पाइस जेट भी 2015 में आज की जेट एयरलाइंस की तरह तेल कंपनियों, एयरपोर्ट अथॉरिटी और विमान पट्टे पर देने वाली कंपनियों के भुगतान का लगातार डिफॉल्ट कर रही थी। उस वक़्त भी स्टेट बैंक की अरुंधति भट्टाचार्य ने भी रजनीश कुमार उसे और लोन देने से इनकार कर दिया था।

प्रधानमंत्री मोदी भी जैसे आज जेट की चिंता कर रहे हैं वैसे ही 2015 में स्पाइसजेट के भविष्य को लेकर चिंतित बताये जा रहे थे।

यहाँ नरेश गोयल थे। वहां कलानिधि मारन थे (सन टीवी वाले) देश के 38वें सबसे अधिक अमीर कलानिधि मारन ने स्पाइसजेट में अपने स्वामित्व अधिकार 1,500 करोड़ रुपये में अजय सिंह को बेचने का समझौता किया था लेकिन बाद में दिल्ली हाई कोर्ट में खुलासा किया गया कि अजय सिंह ने सिर्फ दो रूपए में स्पाइसजेट के मारन से 53% शेयर खरीद लिए और बाकी शेयर विदेशी कम्पनी को बिकवा दिए।

यह बहुत बड़ा घोटाला था जिस तरह से मोदी सरकार ने स्पाइसजेट को बिकवाने के लिये अजय सिंह के पक्ष में बैटिंग की थी तब भी सुब्रमण्यम स्वामी ने इसे घोटाला बताया था। लेकिन तब भी बात दबा दी गई।

आज ठीक उसी तरह से घटनाएं घट रही हैं जैसे 2015 में स्पाइसजेट के बिकने के समय घटी थी तब भी अजय सिंह को ही फायदा पुहचाया गया आज भी वहीं हो रहा है। अजय सिंह को अपने संपर्कों के जरिए ऊंट किस करवट बैठेगा इसका अंदाजा बहुत अच्छी तरह से था। उसने जेट एयरलाइंस के ही 22 विमानों को सबलीज पर लिया और 200 जेट कर्मियों ओर 100 के लगभग जेट के पायलटों को आधी तनख्वाह देकर अपने यहाँ काम दिया और कुछ बोइंग ओर अलग से खरीदे और अपना बिजनेस चमका लिया।

अब एक बार फिर स्पाइसजेट का शेयर बाजार में नई ऊंचाइयों को छुएगा और अजय सिंह फिर किसी बड़े कारपोरेट समूह को अपना माल महंगी कीमत में बेचेंगे और एक बार फिर सारा माल समेट कर निकल लेंगे। कालांतर में वह विमानन कम्पनी फिर डूबेगी फिर से 2 रुपये में उसे अजय सिंह जैसे लोग खरीदेंगे और फिर से मोटा माल कमाएंगे। ऐसा ही बार बार होगा क्योंकि आप जैसे लोग समझते हैं कि मोदी सरकार में कोई भ्रष्टाचार का मामला तो सामने आया ही नही?

यह कहलाता है क्रोनी कैपटलिज्म जिसमें, मोदी जी ने पीएचडी की डिग्री हासिल की है।

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