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रिपोर्ट

पत्रकारों, लेखकों व सामाजिक कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारियां एक खतरनाक ट्रेंड है

रोहिन कुमार

एक महिला दावा करती है कि वो यूपी के मुख्यमंत्री से साल भर से वीडियो चैट कर रही है और उनसे मिलना चाहती है. स्थानीय पत्रकारों ने उसका बाइट लिया. वही एक क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हुई जिसे प्रशांत ने ट्वीट किया. उसका कैप्शन था, “इश़्क छिपाए नहीं छिपता योगीजी.”

अब देखिए, इस ट्वीट पर एफआईआर किसने करवाया? यूपी पुलिस के दारोगा विकास कुमार ने.

सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री कार्यालय ने एसएसपी को कार्रवाई करने को निर्देशित किया. एसएसपी ने साइबर सेल और पुलिस की ज्वाइंट टीम बनवाई और प्रशांत को दिल्ली से गिरफ्तार किया.

पुलिसवाले सिविल ड्रेस में थे. प्रशांत की पत्नी के मुताबिक, पुलिस ने अरेस्ट वारंट नहीं दिखाया. यूपी पुलिस दिल्ली में गिरफ्तारी करती है लेकिन दिल्ली पुलिस का कोई जवान साथ नहीं था. प्रशांत किबतारः ही नोएडा से गिरफ्तार किए गए पत्रकार अनुज शुक्‍ला और इशिता सिंह की गिरफ्तारी भी इसी मामले से जुड़ी हुई है।

कल लखनऊ में ही समाजवादी फ्रैंक हुजूर की किताबें रोड पर फेंकी गई। दिलकुशा कॉलोनी लखनऊ स्थित समाजवादी विचारक चिंतक और लेखक फ्रैंक हुजूर का बंगला खाली कराने के नाम पर यूपी पुलिस ने उनके आवास के सभी सामानों को बाहर निकालकर सड़क पर फेंक दिया।

यह एक खतरनाक ट्रेंड है. कल ही गया, शेरघाटी से दो सामाजिक कार्यकर्ताओं को नक्सली बताकर गिरफ्तार किया गया है. आज भीमा कोरेगांव में हुई गिरफ्तारियों को साल गए हैं और हालात और बिगड़ते ही जा रहे हैं. कल को सत्ता अगर आपको फंसाना चाहे तो किसी भी तरह से आपको फंसा सकती है.

प्रशांत कैसा है, कैसा नहीं यह फिलहाल उसकी क्लास नहीं है. ये पत्रकार व लेखक कैसे हैं, इनकी विचारधारा क्या है, जय जरूरी नहीं है। मामला क्या है, उन्हें गिरफ्तार क्यों किया गया है- यह सबसे महत्वपूर्ण है. कोई व्यक्ति महत्वपूर्ण नहीं है हुजूर, महत्वपूर्ण यह है कि कल को आप भी उठा लिये जाएंगें और आपकी फेसबुक/ट्विटर खोदी जाती रहेगी.

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