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रिपोर्ट

हरियाणा पुलिस का बजरंग दल को प्यार और उससे पीड़ित कश्मीरी छात्र

14 फरवरी को कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ पर हुए आतंकी हमले में शहीद हुए सैनिकों के सम्मान में पूरे देश की आंखें नम हैं। लेकिन हमले के कुछ ही घण्टों के बाद देशभर से कश्मीरियों पर दक्षिणपंथी संगठनों के हमलों की खबरें आने लगी थीं। ऐसी ही एक खबर हरियाणा के अम्बाला जिले के मुलाना गांव से 16 फरवरी को आई, जहां बजरंग दल और गाँव के सरपंच समेत कुछ लोगों ने सार्वजनिक सभा आयोजित कर गांव की जमीन पर बनी महर्षि मारकंडेश्वर यूनिवर्सिटी में पढ़ने आए कश्मीरी छात्रों को अगले 24 घंटों में गांव खाली करने का अल्टीमेटम दिया।


इस घटना की जानकारी हमें 17 फरवरी को वहां पढ़ने वाले छात्र मंसूर ने दी और हमें वहां आकर रिपोर्ट करने का अनुरोध किया। दिल्ली से करीब साढ़े तीन घण्टे की दूरी तय करने के बाद दिल्ली-चंडीगढ़ हाईवे पर शाहबाद शहर आता है जिसके पश्चिमी छोर पर बहने वाली हरियाणा की बरसाती नदी ‘मारकंडेश्वर’ के पुल को पार करने के बाद दाहिने हाथ को एक सड़क खुलती है जिसपर करीब 30 किलोमीटर चलने के बाद हम मुलाना यूनिवर्सिटी पहुंचे।

हम लगभग 10:30 बजे मुलाना पहुँचे और कश्मीरी छात्रों से बात करने के लिए एमएम यूनिवर्सिटी के हॉस्टल नंबर 12 की ओर बढ़े, जहाँ सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए छात्रों को पुलिस ने रोक रखा था। जिस तरह से कुछ छात्र लगातार हमें फ़ोन कर रहे थे उससे हम समझ गए थे कि वे बहुत असुरक्षित और भयभीत हैं और वे हमसे मिलकर बात करना चाहते हैं ताकि वे अपने परिवारों के पास वापस जा सकें, जहां वे शांति से सुरक्षित और अधिक महसूस करेंगे।
होस्टल के आगे पहुंचने के बाद हमने देखा कि पुलिस ने परिसर को वास्तव में अच्छी तरह से बंद कर दिया था, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि छात्रों को कोई नुकसान न हो। छात्रों से मिलने से पहले ही हमें वहां पुलिस ने रोक लिया और वहां तैनात डीएसपी सुधीर (एक बहुत ही मृदुभाषी अधिकारी) ने हमें रात का हवाला देते हुए अगले दिन सुबह लगभग 10:00 बजे आने को कहा और उन्होंने सुझाव दिया कि हम रात को पास में एक कमरा ले लें ताकि सुबह जल्दी छात्रों से मुलाकात हो सके। 

उस समय हमने देखा कि यूनिवर्सिटी परिसर में स्थानीय छात्र आराम से घूम फिर रहे थे लेकिन कश्मीरी छात्रों को होस्टल में बन्द कर दिया था।
डीएसपी के अनुरोध के बाद हम रात्रि भोज के लिए इस उम्मीद के साथ यूनिवर्सिटी गेट के पास पड़ने वाली स्टूडेंट मार्किट में पहुंचे कि वहां हमें भोजन करते वक़्त कुछ स्थानीय छात्रों से भी बात करने का मौका मिलेगा। वहां हमारी मुलाकात स्थानीय छात्रों से हुई जो हरियाणा के ही दूसरे जिलों से यहां पढ़ने आए थे। 
कश्मीरी छात्रों के बारे में पूछने पर वहां मेडिकल साइंस की पढ़ाई कर रहे जसविंदर सिंह ने हमें बताया, “सर हम मानते हैं कि इन छात्रों के साथ जो हो रहा है वो गलत है, लेकिन ताली एक हाथ से तो बजती नहीं है। इन्होंने हमारे जवानों की मौत को फेसबुक और व्हाट्सअप पर सेलिब्रेट किया और आपस में लड्डू बांटे। अगर ये लोग ऐसी हरकतें करेंगे तो अब आप बताइए लोग क्यों न इन्हें बाहर उठाकर फेंके।”

जसविंदर ने बड़े गुस्से में जवाब दिया। उसके गुस्से भरे जवाब के बाद हमने दोबारा सवाल पूछा कि आपको कैसे पता चला की इन छात्रों ने शहीदों की मौत पर जश्न मनाया है। सवाल सुनकर जसविंदर थोड़े और ज्यादा ताव में आकर कहते हैं, “अरे इनके स्क्रीनशॉट थे हमारे पास। बजरंग दल के अध्यक्ष भानु प्रताप ने खुद इनके स्क्रीनशॉट लेकर हमें भेजे हैं। इनके पर्चे भी गांव वालों को दिखाए हैं उसी के बाद तो गांव वालों ने इन्हें उठाकर बाहर फेंका है। अरे सर भानु प्रताप ने हमें वीडियो भी भेजा जिसमें बताया गया था कि इनमें 3 बड़े आतंकवादियों के तीन छोटे भाई भी हैं। भानु प्रताप समझदार आदमी है वह झूठ थोड़ी न फैलाएगा। अब आप बताओ आतंकवादियों के भाइयों को तो बाहर निकालना ठीक ही है।” 

इतना कहकर जसविंदर गुस्से में वहां से उठकर चले गए। हमारी बातचीत सुन रहे होटल के कर्मचारी ने जसविंदर के समर्थन में बड़ी जोर से हमें कहा,”लड़का ठीक ही तो कह रहा है, उठाकर फेंको बाहर सालों को।” 

खाना खाने के बाद हम पास ही के एक होटल में सोने के लिए चले गए। सुबह उठकर डीएसपी द्वारा बताए गए समय पर ही हम दोबारा होस्टल नम्बर 12 पहुंचे जहां सारे कश्मीरी छात्र बंद थे। हमें बार-बार फोन कर रहे छात्र हमें देखकर गेट पर जमा हो गए और एक सांस यहीं कहने लगे,”भैया हमें अपने घर जाना है। यहां हमें बहुत डर लग रहा है और पुलिस ने हमें जबरदस्ती रोका हुआ है। हम करीब 300 छात्र हैं यहां” छात्र अभी बोल ही रहा था कि पीछे से पुलिस के एक सिपाही ने आकर उसे रोक दिया। सिपाही को देखकर वहां जमा हुए छात्र वापस कुछ दूर रखे अपने बैगों के पास जाकर मायूस खड़े हो गए। 
हमसे 10 फीट दूर बैठे एक अन्य अधिकारी ने हमें तुरंत यह कहते हुए परिसर छोड़ने को कहा कि यह हमारी पहली और अंतिम चेतावनी थी। 5 मिनट बाद जब डीएसपी सुधीर निकल रहे थे तो वह हमारी ओर आया और जैसे ही उसने हमें देखा वह पलट गया और विपरीत दिशा में चलने लगा।

होस्टल के बाहर कुछ समय इंतज़ार करने के बाद हरी टीशर्ट और नीली कैफरी पहने हुए एक गोरा लड़का दिखाई दिया जो एक नज़र देखते ही कश्मीरी जान पड़ता था। उससे पूछने के बाद उसका कहना था कि ” पंचायत द्वारा जारी किये गए अल्टीमेटम के बाद पसे ही हम बहुत परेशान हैं। शनिवार को स्थानीय लड़कों ने हमारे दो साथियों की पिटाई भी है और उनमें से एक के सिर पर 5-6 टांके आए हैं।” इतना कहकर छात्र परेशान हो गया और हमारा हाथ पकड़कर हमें विश्वास दिलाते हुए कहने लगा, “सर पुलवामा हमले के बाद हम भी त्रस्त हैं और एक सच्चे भारतीय के रूप में उतना ही दर्द महसूस करते हैं, जितना आप लोग करते हैं। लेकिन जो हो रहा है उसके बारे में हमने कभी सोचा भी नहीं था। इस तरह की खबरें हमारे घर वालों के पास भी पहुंच रही हैं। हमारे परिवार के सदस्यों को स्थिति के बारे में पता है, तो वे डर गए हैं और हमें वापस घर बुला रहे हैं। लेकिन पुलिस और यूनिवर्सिटी प्रशासन हमें यहीं ठहरने के लिए दबाव बना रहा है। अभी कुछ छात्र यहां से निकल गए हैं और शाम तक शायद यहां कोई भी न रहे। हम लगातार एक ही मांग कर रहे हैं कि हमें सुरक्षा के साथ सिर्फ चंडीगढ़ तक पहुंचा दिया जाए आगे हम खुद चले जाएंगे। मगर हमारी बात न पुलिस सुन रही है और न ही प्रशासन।”

इस मामले को लेकर विश्वविद्यालय के अकादमिक मामलों के डीन डॉ जेके शर्मा का कहना है कि कश्मीरी छात्रों को 12 नम्बर होस्टल में सुरक्षा प्रदान की गयी है। उन्हें डरने की जरूर नहीं है। वो यहीं रहकर पढ़ाई कर सकते हैं।”

डीन ने आगे कुछ भी बताने से इनकार कर दिया। वहीं मुलाना थाना इंचार्ज ने बताते हुए सिर्फ इतना ही कहा, “हमने अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की हैं। पहली प्राथमिकी भारतीय दंड संहिता की धारा 56 के प्रावधानों को दो अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ दर्ज की है। दूसरी प्राथमिकी हमने दंगा, अवैध सभा, नुकसान और आपराधिक कार्यवाही करने के लिए दर्ज की है”

इस संबंध में पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ डीडीआर दर्ज की है लेकिन वीडियो में लोगों को कश्मीरी छात्रों को डराते धमकाते साफ देखा जा सकता है। वीडियो में मुलाना का सरपंच साफ-साफ कश्मीरों को डरा रहा है लेकिन उसका नाम भी डीडीआर में दर्ज नहीं किया है और इस मामले में अभी तक गिरफ्तारी नहीं हुई है.


सोमवार 18 फरवरी को शाम चार बजे ही कश्मीरी छात्रों की मदद करने के लिए दिल्ली से आए अमन बिरादरी ट्रस्ट के आग्नेय बुधराजा को सामान्य फिल्मी अंदाज में 2 पुलिस कारों ने घेर लिया और थाने ले जाकर पूछताछ करने लगे। आग्नेय में हमें बताया, “मैं दिल्ली से अपने साथी के साथ इसलिए यहां आया था क्योंकि हमारी संस्था को छात्रों के घरवालों ने फ़ोन कर मदद मांगी थी। मेरे यहां पहुंचने के बाद से ही पुलिस वाले हमें परेशान करने लगे थे। एसपी, डीएसपी और एसएचओ से लेकर सिपाहियों तक किसी ने भी हमारी बात नहीं सुनी और छात्रों से बात भी नहीं करने दी। बल्कि उल्टा हमें थाने ले जाकर बेमतलब के सवाल पूछ-पूछकर तंग करते रहे।” 

इसे हमारे तंत्र की विडम्बना नहीं तो और क्या कहें। छात्रों को डराने-धमकाने और पीटने वाले तो बाहर घूम रहे हैं और उनकी मदद करने आए लोगों को पुलिस थाने में बैठाकर तंग कर रही है। इस समय प्रधानमंत्री द्वारा दी जाने वाले स्कालरशिप का फायदा उठाकर पंजाब और हरियाणा में करीब 10 हजार कश्मीरी छात्र फंसे हुए हैं। लेकिन पंजाब में सिखों ने छात्रों की मदद के लिए गुरुद्वारे खोल दिए हैं और उन्हें सुरक्षित घर पहुंचाने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दिखा रहे हैं। हरियाणा के कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्र दिल्ली, चंडीगढ़ या पंजाब जाकर शरण ले रहे हैं और मौका मिलते ही घर निकल रहे हैं। 

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