लोकवाणी

मुख़्तलिफ़ आवाज़, निगाह और विचार

रिपोर्ट

क्यों डराते हो…!

अहमद मोबीन

सूना जंगल रात अंधेरी छाई बदली काली है

सोने वालों जागते रहियो चोरों की रखवाली है

शहद दिखाए ज़हर पिलाए  डाइन क़ातिल शौहर कुश

 इस मुरदार पे क्या ललचाया दुनिया देखी भाली है_रज़ा

लोकतंत्र का महोत्सव चल रहा है. अगर बीजेपी खुद को लोकतान्त्रिक मानती है तो उसे विरोध को स्वीकार करना होगा. पुलिस को इतना भी रगड़ रगड़ कर मत इस्तेमाल करो कि वो भी आप के खिलाफ हो जाये. अरे! वो भी इंसान हैं और इसी समाज से आते हैं… उन्हें भी पता है क्या चल रहा है? यही कारण है कि (दि प्रिंट के मुताबिक़) जंतर मंतर पर दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को जलपान के साथ साथ फ्रूटी पेश करना शुरू कर दिया.

सिर्फ चंद लोगों ने हक तुम्हारा छीना हैखाक ऐसे जीने पर ये भी कोई जीना है_हबीब जालिब

…ये चंद लोग नहीं जानते कि ये लोकतंत्र वाली इक्कीसवीं शताब्दी है। वो जो करना चाहते हैं उस के लिए उन्हें डेढ़ दो सौ साल पहले पैदा होना था। वो अपनी पैदाइश में पिछड़ गए। पैदा हुए तो लिखने पढ़ने में पिछड़ गए। ये पिछड़े काले अंग्रेज़ कुछ भी कर लें मगर भारत की सौगंध! संविधान के लिए हम खून का आखिरी कतरा तक देंगे। अच्छा होगा वही बता दें कि बाबा साहेब आंबेडकर के संविधान को बचाने के लिए हमें फासीवाद की कितनी गोलियां खानी होंगी। कर्नाटक, उत्तर प्रदेश और दिल्ली समेत कितने शहरों में हमे संविधान के लिए कितना बलिदान देना होगा….हम तय्यार हैं। 

सर फरोशी की तन्ना अब हमारे दिल में है

देखना है ज़ोर कितना बाजू ए क़ातिल में है_पंडित बिस्मिल

आखिर हम भी तो देखें! यहां का हजारों वर्ष पुराना सनातन कितना बूढ़ा हो गया है और अस्सी या नव्वे बरस का हिंदुत्व कितना जवान हो गया है! राम के मानने वाले कब तक खामोश रहते हैं! मर्यादा पृष्वोत्तम श्री राम में कुछ तो बात होगी कि “सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्ताँ हमारा” जैसा राष्ट्रवाद का उच्चतम राष्ट्रीय गीत लिखने वाले ने ऐसा क्या पाया था कि “इमामुल हिन्द” कह दिया!

वो सुब्ह कभी तो आएगी

इन काली सदियों के सर से जब रात का आँचल ढलकेगा

जब दुख के बादल पिघलेंगे जब सुख का सागर छलकेगा

जब अम्बर झूम के नाचेगा जब धरती नग़्मे गाएगी

वो सुब्ह कभी तो आएगी _ साहिर लुधियानवी

बीजेपी दुनिया की सब से बड़ी पार्टी है मगर आप को हैरत होगी की उसके पास कोई इकोनॉमिस्ट (सुब्रमण्यम स्वामी अपवाद हैं जिनकी अपनी अलग ही कहानी है) नहीं है. वाजपेयी जी के साथ भी यही मसला रहा और इसी वजह से “शाइनिंग इंडिया” का माहौल बनाने के बावजूद वो हार गए.

कौन नहीं जनता! कि प्रमोद महाजन डॉक्टर मनमोहन सिंह और पी चिदंबरम के पास गए थे और उन्हें ऑफर दिया कि कांग्रेस छोडो बीजेपी में आ जाओ और वित् मंत्रालय संभालो मगर इन दोनों ने मना कर दिया था.

साथियों! हमें खूब मालूम है…अभी भी गांव में है कहीं कहीं कि कोई भी हो अगर “राम राम” कह कर अभिवादन करता है तो उसे भी “राम राम” कह कर ही अभिवादन मिलता है…इसी तरह सलाम का जवाब सलाम से. मेरे पिता जी से एक तिलक धारी पंडित जी मिलने आते थे. वो कई भाषाएँ जानते थे. पिता जी से काफी बात करते रहते. चाय पे चाय चलती. अभी भी हमारे गांव में बीजेपी के जो लीडर हैं वो ईद के दिन “ईदी मिलने” ज़रूर आते हैं.

हमें एक बार ठहर कर सोचना होगा क़ि हम जा कहाँ रहे हैं? हमारे वर्तमान से अच्छा हमारा अतीत क्यों है?  अतीत से अच्छा वर्तमान और वर्तमान से अच्छा भविष्य…यही दुनिया की जद्दो जहद है जो कि विश्व गुरु भी नहीं है और हम विश्व गुरु होते हुए भी मालूम नहीं किस के साज़ पर…किस धुन में अपने गौरव को अपने पैरों तले रौंद रहे हैं. अच्छे से याद रखिये… भविष्य की नीवं वर्तमान से पड़ती है. इतिहास इस लिए है कि हम उससे रोशनी लें और भविष्य उज्ज्वल करें न कि खुद भी जीते जी इतिहास बन जाएँ. मुझे बताइये! कितने मुस्लिम हैं जिन्हे आप जान कर उनसे नफरत करते हैं?

राम मंदिर का रास्ता साफ हो गया. मुसलमानों ने सर -ए- तस्लीम ख़म कर लिया और कहा कि चलो…अब छुट्टी मिली…अब देश आगे बढ़ेगा. हमारी तवज्जो पाकिस्तान के बजाए चीन पर रहेगी कयोंकि हमारी जीडीपी के मुक़ाबले पाकिस्तान की इकोनॉमी हेच है मगर मीडिया अपना किरदार अदा करने से वंचित कर दिया गया है. किसी पत्रकार से कभी पूछिए…वो आपको बताएगा कि वो क्या करना चाहता है और उस से नौकरी का डर दिखा कर क्या करवाया जा रहा है???

अर्थववस्था पर सवाल न उठे और लोग हिन्दू मुस्लिम में फंसे रहें….बीजेपी और उसके आकाओं का यही मक़सद है.

सोचिये! मीडिया प्याज़ और आलू पर स्टोरी क्यों नहीं कर रहा है? स्टॉक होने के बावजूद प्याज़ सौ रुपए से लेकर डेढ़ सौ रूपए तक क्यों बिक रही है? स्टील के बड़े बड़े प्लांट बंद क्यों हो गए या हो रहे हैं? ऑटो मोबाइल सेक्टर जो अनपढों से लेकर बड़े बड़े पढ़े लिखों को नौकरी देता है अत्यधिक मुश्किल हालत से क्यों गुज़र रहा है? पार्ले जी ने अपने हज़ारो मज़दूरों को क्यों हटा दिया? खुद बीजेपी ने उत्तर प्रदेश में हज़ारो होमगार्ड को क्यों निकाल दिया? लाखों लोग जो काम कर रहे थे उन के पास अब काम है ही नहीं. नए लोगों को रोज़गार कहाँ से मिलेगा?

IIT  और IIM के स्टूडेंट खुदकुशी क्यों कर रहे हैं? वो भविष्य से भयभीत क्यों हैं?  कयोंकि वो लाखों का क़र्ज़ लेकर पढ़ रहे हैैं और नौकरियां हैं ही नहीं तो वो अपने घर को क्या जवाब दें? इतना पढ़ लिख जाने के बाद भी वो घर कैसे बैठें?  इसी शर्म से मर जाना उन्हें आसान लगता है. मौजूदा परस्तिथियों में बताइये! जिसे भी नागरिकता मिलेगी वो क्या करेगा? कैसे जियेगा? अगर धर्म ही आधार है और आप को हिन्दू धर्म के लिए ही काम करना है तो बहुत से हिन्दू हैं जो बेहद ग़रीब हैं. आप का इलज़ाम है कि उन्हें लालच देकर, उनके लिए स्कूल और अस्पताल निर्माण द्वारा ईसाई बनाया जा रहा है तो सीधी सी बात है आप उन लोगों को फ्री स्कूल और अस्पताल बना कर दो. अगर हिन्दुओं की भलाई मक़सद होता तो यही हो रहा होता मगर यहाँ खेल ये है कि वंचित को वंचित, ग़रीब को अधिक ग़रीब बनाये रखा जाये और सदियों सदियों से जैसे मलाई खाते आ रहे हैं… खाते रहें. अपना काम बनता, भाड़ में जाये जनता.

राम मंदिर के फैसले के बाद हर किसी ने ठंडी साँस ली थी कि चलो अब हम आगे बढ़ेंगे मगर कौन है जिसे हमारा आगे बढ़ना मंज़ूर नहीं?

बीजेपी को डर है कि अगर लोग अपने खून पसीने के उन टैक्स के पैसों पर सवाल उठाना शुरू कर देंगे जो वो डाइरेक्ट इन-डायरेक्ट अपने बच्चों के दूध, साग-सब्ज़ी, जूते-चप्पल, कपड़े और सर्विस(सरकारी गैर सरकारी नौकरियों) पर दे रह हैं तो उसका क्या होगा?

कितना दर्दनाक है! झारखण्ड में लोग भूख से मर जाएँ,असम में पत्ते खा कर जियें और हज़ारो टन अनाज गोदाम में पड़े पड़े सड़ जाए. हमारे नेता सवा सौ करोड़ जनता के लाखों करोड़ डकार जयें और किसी को खबर तक न हो!

ये मिलें ये जागीरें किस का ख़ून पीती हैं

बैरकों में ये फ़ौजें किस के बल पे जीती हैं

किस की मेहनतों का फल दाश्ताएँ खाती हैं

झोंपड़ों से रोने की क्यूँ सदाएँ आती हैं

जब शबाब पर आ कर खेत लहलहाता है

किस के नैन रोते हैं कौन मुस्कुराता है

काश तुम कभी समझो…काश तुम कभी समझो

काश तुम कभी जानो सौ करोड़ इंसानो!_हबीब जालिब

#CAA2019 संविधान की अवधारणा, प्रस्तावना, आर्टिकल14 और बुनयादी ढांचे के खिलाफ है. संविधान और सुप्रीम कोर्ट का अब इम्तेहान है कि किसी को बताकर उसके साथ सौतेला बर्ताव किया जाये. हमारे पास है ही क्या? सिवाए संविधान के! संविधान है तो हम हैं…ये नहीं तो हम भी नहीं. ये CAA2019 “फूट डालो और राज करो” अधिनियम है. 

अपने आप से पूछिए कि नेताओं के लिए कितना आसान होता आप पर एहसान लादते रहना अगर संविधान ने राशन के मिलने को आपका मूल अधिकार न घोषित किया होता!.

हिंदुस्तान की जनता…हिन्दू, मुस्लिम, सिख और ईसाई को नागरिकता दिए जाने के खिलाफ नहीं है. वो इस बात के खिलाफ है कि अगर पड़ोसी देशों के पीड़ित अप्ल्संख्यकों को नागरिकता देनी है तो ये बताइये कि पड़ोसी देश कितने हैं? पड़सी देश श्रीलंका, बर्मा और चीन भी हैं और यहाँ जो भी अल्पसंख्यक है वो किस तरह से पीड़ित है… ये हम सब जानते हैं. और नागरिकता देना है तो धर्म के आधार पर मत दो पीड़ित होने के ही आधार पर दो. हिन्दू मुस्लिम मत करो…हिन्दू मुस्लिम बहुत हो गया…हिन्दू मुस्लिम बंद करो!

वसुधैव कुटुम्बकम् सनातन धर्म के मूल संस्कार को न भूलो. हिन्दुत्व छोड़ो…. सनातनी बनो!

@MobeenJamei

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