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बिहार के कामगारों की जिंदगी-मौत और अपमान इतना सस्ता एवं आसान क्यों है?

सिद्धार्थ रामु

शायद ही कोई इस तथ्य से इंकार कर पाए बिहार के कामगारों जितना अपमानित समुदाय भारत में कौन कहे दुनिया में कोई नहीं है। देश के किसी कोने में जब मजदूरों की मौत, हत्या या बुरी तरह से पिटाई की खबर आती है, तो अक्सर यह पता चलता है कि सभी मजदूर या अधिकांश बिहार के थे।

पुणें दीवार गिरने से मरने बाले 15 मजदूरों की लाशें बिहार के विभिन्न जिलों में पहुंच रही हैं। रोते-बिलखते मां-बाप, चिघ्घाड़ती पत्नी और सुबकते बच्चे की तस्वीरें दिल दहला देने वाली हैं। बिहार में कामगारों की लाशें देश के कोने-कोने आती ही रहती हैं, कभी लावारिश घोषित कर वहीं कहीं फेंक दी जाती हैं।

यहीं नहीं जब देश के किसी कोने से कामगारों की हत्या की खबर आती है, जैसे असम या कश्मीर से तब भी मरने वाले अक्सर बिहार के कामगार ही होते हैं।

जब महाराष्ट्र या गुजरात में बाहरी के नाम पर किसी को गालियां दी जाती हैं, पीटा जाता है या हत्या की जाती है, या मार कर भगाया जाता है, तो अक्सर बिहार के कामगार ही इसके शिकार बनते हैं।

देश में कोई झुंग्गी-झोपड़ी नहीं, जहां बिहार के कामगारों की बस्तियां न मिल जाए।

सच तो यह है कि देश में जिसे सबसे ज्यादा गंदा काम कहा जाता है, वह करने वाले भी बिहार के लोग ही होते हैं। सबसे कठिन परिश्रम वाले काम बिहार के लोग देश के कोने-कोने में करते हैं।

मौत, हत्या और पिटाई ही नहीं, सबसे ज्यादा अपमान अगर कहीं के कामगारों का होता है, तो वे बिहार के ही होते हैं। यह अपमान स्टेशन पर ट्रेन पकड़ने के लिए आने के साथ शुरू हो जाता है, पुलिस का सिपाही डंडा लिए, गालियां देते लाईन लगाता है। ट्रेन में बैठने के साथ अपमान का सिलसिला आगे बढ़ता है, जिस तरह वे ट्रेन में जाते हैं, कोई देखकर भी कांप उठे। वापस घर आने तक यह अपमान विभिन्न रूपों में जारी रहता है, कहीं अबे वो बिहारी या किसी अन्य रूप में। चूंकि अधिकांश कामगार दलित एवं अति पिछड़ी जातियों के होते हैं, तो गांव में वापस आने पर जातीय आधारित अपमान का सामना करना पड़ता है।

बिहार ने लंबे समय तक कांग्रेस के नेतृत्व में सवर्णों का शासन देखा, लालू यादव जी के नेतृत्व में सामाजिक न्यायवादियों या पिछड़ों का शासन देखा, दलित के नाम पर रामविलास पासवान भी विभिन्न सरकारों में हिस्सेदार रहे, सामाजिक न्यायवादी पिछड़े नीतीश और भाजपा के हिंदुत्व के कॉकटेल वाली सरकार भी 14 सालों से बिहार में सत्तारूढ़ है। आखिर इन लोगों ने इतने सालों तक क्या किया?

आखिर क्यों बिहार के कामगार बिहार छोड़कर पलायन करने और मौत, हत्या और अपमान सहने के लिए विवश हैं?

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