लोकवाणी

मुख़्तलिफ़ आवाज़, निगाह और विचार

रिपोर्ट

‘मंदिर वहीँ बनाएंगे, तारीख नहीं बताएंगे’ भाजपा को घेरने के लिए उछाले गए इस नारे में आप खुद फंस बैठे हैं

‘मंदिर वहीँ बनाएंगे, तारीख नहीं बताएंगे.’

आपने जब भी ये नारा भाजपा को घेरने के लिए उछाला, आप खुद भाजपा के बिछाए जाल में घिरते चले गए. पहला तो इस नारे में यह स्वीकारोक्ति थी कि मस्जिद गिराना अब गौण हो चुका है. इस नारे से ये सवाल ही बेमानी हो गया कि मस्जिद गिराने के अपराधियों को सज़ा कब होगी? जबकि इस सवाल को वैधता मिल गई कि आख़िर मंदिर कब बनेगा? यही भाजपा चाहती थी.

दूसरा, भाजपा लगातार कहती थी कि इस देश कि लिए मंदिर का मुद्दा सबसे अहम है. आपने तारीख पूछ-पूछ कर साबित भी कर दिया कि मुद्दा वाकई अहम है.

तीसरा, इस नारे में एक उकसावा था. यह उकसावा आप तो भाजपा को दे रहे थे लेकिन भाजपा बेहद चतुराई से इसे उन करोड़ों लोगों तक सरकाती रही, जिनके लिए राम और उनका मंदिर ‘जुनूनी आस्था’ के प्रतीक हैं. इसलिए उन करोड़ों लोगों की भौं कभी उस भाजपा पर नहीं तनी जिसने ‘राम लहर’ पर सवार होकर दो सीटों से तीन सौ सीटों तक का राजनीतिक सफ़र तय कर लिया, बल्कि उनकी भौं आप पर तनी क्योंकि आपकी बातें उन्हें अपनी आस्था को उकसावा देती नज़र आई.

अब यह मान भी लीजिये कि ‘राम मंदिर’ के मुद्दे पर चित भी भाजपा की है और पट भी भाजपा की. मंदिर अगर बना तो उसे भाजपा की ही ‘कामयाबी’ माना जाएगा. और जब तक नहीं बनेगा तब तक ‘मंदिर वहीं बनाएंगे’ का नारा बुलंद करने का मौक़ा भी भाजपा के पास ही है.

आप ये लड़ाई उसी दिन हार चुके थे जिस दिन आपने तारीख़ पूछना शुरू किया था।

LEAVE A RESPONSE

Your email address will not be published. Required fields are marked *