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रिपोर्ट

मोदी सरकार ने की इसरो के वैज्ञानिकों की तनख्वाह में कटौती

एक तरफ तो जहाँ इसरो के वैज्ञानिक चन्द्रयान -2 मिशन को सफल बनाने के लिए जी-जान से जुटे हैं और वहीं मोदी सरकार उनकी तनख्वाह काटने में लगी है।

केंद्र सरकार ने एक आदेश जारी कर इसरो वैज्ञानिकों व इंजीनियरों को वर्ष 1996 से दो अतिरिक्त वेतन वृद्धि के रूप में मिल रहे प्रोत्साहन अनुदान बंद कर दिया गया है।

आदेश के मुताबिक अंतरिक्ष विभाग के सभी डी, ई, एफ और जी श्रेणी के वैज्ञानिकों को यह राशि अब 1 जुलाई से नहीं मिलेगी। वैज्ञानिकों को प्रोत्साहित करने, इसरो की ओर आकर्षित करने और संस्थान छोड़कर नहीं जाएं इसके लिए यह राशि देने की शुरुआत 1 जनवरी 1996 को की गई थी।

उदाहरण के तौर पर डी श्रेणी के एक वैज्ञानिक को लगभग 4 हजार रुपए प्रति माह प्रोत्साहन राशि के साथ महंगाई भत्ता आदि जोड़कर लगभग साढ़े ६ हजार रुपए मिलते थे जो अब नहीं मिलेंगे।

दरअसल छठे वेतन आयोग की सिफारिशों के आधार पर वित्त मंत्रालय और व्यय विभाग ने अंतरिक्ष विभाग को सलाह दी है कि वह इस प्रोत्साहन राशि को बंद करे। इसकी जगह पर परफार्मेंस रिलेटेड इनसेंटिव स्कीम (पीआरआइएस) लागू की गई है। हालांकि, इसरो वैज्ञानिकों को यह दोनों सुविधाएं सरकार दे रही थी लेकिन अब केंद्र सरकार ने फैसला किया है कि अतिरिक्त वेतन के तौर पर दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि 1 जुलाई से नहीं दी जाएगी।

बेहद कम तनख्वाह में काम करने की वजह से अनेक वैज्ञानिक पहले भी इसरो छोड़कर चले गए हैं। एक आरटीआई के जवाब में उपलब्ध कराए गए इसरो के आंकड़ों से पता चलता है कि 2012 से 2017 (मई) के बीच पूरे देश में फैले 25 संस्थानों के 289 वैज्ञानिकों ने इसरो से इस्तीफा दिया है।

लेकिन अब इस नए आदेश की वजह से अनेक वैज्ञानिक निराश महसूस कर रहे हैं। इसरो के एक वैज्ञानिक ने कहा कि दिन-रात मेहनत कर इसरो के हर मिशन में सौ फीसदी सफलता सुनिश्चित करने के बावजूद सरकार का यह निर्णय मनोबल तोडऩे वाला है।

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