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मुसलमान बता कर गाय खरीद लीजिये, अगले दिन अखबारों में आपकी मौत की खबर छप जाएगी

लोकसभा चुनाव के दौरान असम में एक 68 साल के मुस्लिम बुजुर्ग शौकत अली के साथ भीड़ ने मारपीट की। गोमांस बेचने के शक में लोगों की भीड़ ने हमला किया, बुरी तरह पीटा और वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल किया। इतना ही नहीं भीड़ ने मारपीट के बाद सजा के तौर पर सु्अर का मीट भी खिलाया। दूसरी खबर है बनारस में विकास के नाम पर प्राचीन सभ्यता को तोड़ने की। इन दोनों ही खबरों पर हमारे जनकवि नित्यानंद गायेन ने कविताएं लिखी हैं। पढ़ी जाएं…..

मौत की ख़बर

अपराधी बनने के लिए
अपराध करने की जरूरत नहीं
केवल सत्ता से
कोई सवाल कर लीजिये

मैंने तो इससे भी बहुत कम कुछ किया
तुमसे प्रेम किया
और अपराधी घोषित हो गया

अच्छा चलिए
आप न सवाल करिए
न ही प्रेम कीजिये
आप केवल अपनी जमीन
अपना अधिकार मांग के देखिये
आपको पता चल जायेगा
अपराधी कैसे बना दिए जाते हैं
लोकतंत्र में

चलो छोड़ो इन बातों को
आप खुद को मुसलमान बता कर
एक गाय खरीद लीजिये
अखबारों के मुख्य पेज पर
आपकी मौत की खबर छप जाएगी अगले दिन

अभी सिर्फ ‘बनारस’ उजड़ा है

बामियान की बुद्ध प्रतिमा
नेस्तनाबूद कर तालिबान ने
दफ़न कर दिया था एक प्राचीन सभ्यता को
किसी सभ्यता पर यह कोई पहला हमला नहीं था
हजारों सभ्यताओं का क़त्ल हुआ आतंक के हाथों
उनकी कहानियां दर्ज़ तक नहीं हुई इतिहास की किसी किताब में
अब विकास की आंधी में लुप्त हो रही हैं प्राचीन सभ्यताएं
लाखों जन-जातियों को बहुत
पहले ही लुप्त कर दिया गया
खो गई हजारों बोली और भाषाएं
उजाड़ी गईं इंसानी बस्तियां
अब नगर की बारी है
नगर के मंदिर-मस्जिद-चर्च और गुरूद्वारे रहें होंगे ज़रूर
मगर उससे बड़ी बात
उजाड़े गये नगर के लोग कहाँ जायेंगे?
जल, जंगल और जमीन पर तो पूंजी का शिकंजा है
देश-देश चीखने वाले
सभ्यताएं ढहा कर राष्ट्र निर्माण कर रहे हैं
शासक अब व्यापारी नहीं है
वह व्यापारियों का दलाल है
उसे नई मंडी सजाने का ठेका मिला है
अभी सिर्फ ‘बनारस’ उजड़ा है
आगे कई नये हड़प्पा-मोहनजोदड़ो के स्नानागार
उजाड़े जायेंगे
नदी नहीं, अब काल नदी बहेगी इंसानी बस्तियों से

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