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पहले ही न्यूज़ चैनल्स क्या कम मोदीजी का प्रचार कर रहे थे जो अब नमो टीवी और शुरू हो गया!

नमो टीवी अपने लोगों के साथ विभिन्न D2H सर्विसेज जैसे टाटा स्काई, डिश टीवी, वीडियोकॉन d2h पर देखा जा रहा है, जबकि 2 दिन पहले यह लोगो हटा लिया गया था. वीडियोकॉन पर तो यह न्यूज़ चैनलों वाले स्लॉट में दिखाया जा रहा है कोई समझाए कि यह किस तरह से पेड न्यूज का मामला नही है?

स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी मतदान के लिए अगर कोई सबसे बड़े ख़तरे के रूप में सामने दिखता है तो वह मीडिया के उल्लंघनों की प्रवृति है. और नमो टीवी चुनाव आयोग की गाइडलाइंस का साफ साफ उल्लंघन कर रहा है.

चुनाव आयोग का मीडिया मॉनिटरिंग सेंटर आखिर किस मर्ज की दवा है?

एक तरफ तो चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट से कहता है कि नेताओं के स्तुति गान करने वाले लेखों को भी पेड न्यूज की श्रेणी में माना जाना चाहिए, क्योंकि इनके जरिये नेता अपनी उपलब्धियों का बखान करते हुए वोटरों को रिझाने की कोशिश करते हैं। दूसरी तरफ नमो टीवी जैसे एक नेता का गुणगान करते चैनल को देखकर अपनी आंखें बंद कर लेता है.

चुनाव आयोग के मतानुसार कोई भी ऐसी खबर, जिसमें राजनेता अपने रिकॉर्ड और उपलब्धियों के आधार पर अपने पक्ष में मतदान की अपील कर रहा हो, उसे पेड न्यूज माना जायेगा.

चुनाव आयोग के मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट में सत्ताधारी दल के लिए कुछ नियम बनाए गए हैं उसमे कहा गया है,
‘The party in power whether at the Centre or in the State or States concerned, shall ensure that no cause is given for any complaint that it has used its official position for the purposes of its election campaign and in particular –

इसकी चौथे पॉइंट में लिखा है
‘Issue of advertisement at the cost of public exchequer in the newspapers and other media and the misuse of official mass media during the election period for partisan coverage of political news and publicity regarding achievements with a view to furthering the prospects of the party in power shall be scrupulously avoided’

नमो टीवी ओर अन्य न्यूज़ चैनल साफ साफ इस नियम को ठेंगा दिखा रहे हैं

द हिन्दू में चार दिन पहले लिखे एक लेख में कहा गया है कि पेड न्यूज के बारे में ईसीआई के दिशानिर्देशों के अनुसार, एक समाचार कार्यक्रम को अधिकतम पांच बार दोहराया जा सकता है, और इसके अलावा, इसे पेड न्यूज के रूप में माना जाएगा, इस प्रक्रिया से जुड़े अधिकारी ने इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के मामले में, रूल स्पष्ट करते हुए कहा, यदि किसी राजनीतिक नेता या पार्टी के बारे में एक समाचार कार्यक्रम पांच बार से अधिक प्रसारित किया जाता है, तो ईसीआई प्रत्येक 10 सेकंड के लिए लगभग media 250 का शुल्क लेता है। प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया के लिए अलग-अलग शुल्क लागू होते हैं जो डीआईपीआर, डीएवीपी या कार्ड दरों पर आधारित होते हैं,

3 मार्च 2014 को चुनाव आयोग ने NBSA ( न्यूज़ ब्रॉडकास्टिंग स्टैंडर्ड ऑथरिटी) को एक पत्र लिख कर चुनाव कवरेज की गाइडलाइंस जारी की थी यह नियम इस चुनाव में भी लागू होते हैं उस लेटर की लिंक नीचे दी है जरूर पढ़ें कि 2019 के चुनाव में इन गाइडलाइंस की न्यूज़ चेंनल्स किस तरह से धज्जियाँ उड़ा रहे हैं.

कुछ नियम पढ़ लीजिए

-न्यूज़ चैनलो को प्रासंगिक चुनावी मामलों, राजनीतिक दलों, उम्मीदवारों, अभियान के मुद्दों और मतदान प्रक्रियाओं के बारे में एक निष्पक्ष तरीके से जनता को सूचित करने का प्रयास करना चाहिए.

समाचार प्रसारकों को अफवाह, आधारहीन अटकलों और विघटन के सभी रूपों से बचने का प्रयास करना चाहिए, खासकर जब ये चिंता विशिष्ट राजनीतिक दलों या उम्मीदवारों की हो।

न्यूज़ चैनल किसी भी तरह की राजनीतिक संबद्धता किसी भी पार्टी या उम्मीदवार के प्रति नही दर्शाएंगे उन्हें स्पष्ट करना होगा कि वह सार्वजनिक रूप से किसी विशेष पार्टी या उम्मीदवार का समर्थन या समर्थन नहीं करते हैं, न्यूज़ चेंनल्स का कर्तव्य है कि वे संतुलित और निष्पक्ष हों, खासकर उनकी चुनावी रिपोर्टिंग में।

मुझे उम्मीद है कि इतना पढ़ते ही आप की हँसी नही रुकेगी. पहले ही न्यूज़ चैनल्स क्या कम मोदीजी का प्रचार कर रहे थे जो अब नमो टीवी और शुरू हो गया. अब तो हर न्यूज़ चेंनल्स मोदी जी का भोंपू बन गया है और चुनाव आयोग धृतराष्ट्र बनकर कौरवों का बचाव करने में लगा हुआ है.

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