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जर्मन शासकों से प्रेरणा लेकर ही मोदी जी कह रहे हैं कि खाने के लिए रोटी नहीं है तो कसरत करो

कृष्णकांत

जर्मन शासक कहते थे कि जनता को खाने के लिए रोटी नहीं है तो उन्हें सर्कस दो। मोदी जी कह रहे हैं कि खाने को रोटी नहीं है तो कसरत करो।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य सर्वे 2015-16 कहता है कि भारत में 5 साल तक के 60 फीसदी बच्चे और 53 फीसदी महिलाएं कुपोषित हैं। यानी उनको पर्याप्त खाने को नहीं मिलता। वे भुखमरी के शिकार हैं। बच्चों के वजन और लंबाई अपनी उम्र से कम हैं।

लेकिन प्रधानमंत्री जी ने कह दिया है कि फिट इंडिया। कसरत करो। मोटा अनाज खाओ।

पहले की सरकारें भुखमरी और गरीबी का आंकड़ा देती थीं। उनपर चर्चा होती थी। सरकार लोगों को गरीबी रेखा से ऊपर लाने के कार्यक्रम लाती थीं। पोषण देने की योजनाएं चलाई जाती थीं। मोदी सरकार ने छह साल में इस पर कोई चर्चा तक नहीं की।

मनमोहन के समय भोजन का अधिकार कानून आया था, उसका क्या हुआ कोई नहीं जानता। देश मे कितने फीसदी लोग गरीबी रेखा से नीचे हैं, कोई नहीं जानता। आंकड़े छुपाने की परंपरा डाल दी गई। सरकार विकास के झूठे आंकड़े पेश करने में व्यस्त है और जनता हिन्दू मुसलमान में व्यस्त है।

आंगनबाड़ी और मिड डे मील का हाल आप जानते ही हैं कि स्कूल में नमक रोटी खिलाई गई, रिपोर्ट बाहर आई तो पत्रकार पर मुकदमा हो गया।

भारत के गांव में कहावत है- भूखे भजन न होय गोपाला। मोदी जी का विजन गांव के अनपढ़ लोगों से भी गया गुजरा है। वे कह रहे हैं कि अब बिना खाए फिट इंडिया।

करोड़ों नौकरीशुदा लोगों की रोजीरोटी छिन रही है। मोदी जी कह रहे हैं कसरत करो।

सरकार बहादुर को यह बात कौन समझाए कि उल्टी दिशा में बहुत मेहनत करने का परिणाम बहुत बुरा होता है। इसका सबसे सटीक उदाहरण हमारे प्रधानमंत्री जी हैं।

टमाटर और प्याज जैसी सब्जियां 60 से 80 रुपये में बिक रही हैं. सब्जियों फलों के दाम आसमान छू रहे हैं. पैसा मंतरी निर्मला जी कह रही हैं कि कांग्रेस ने महंगाई नहीं रोकी.

महंगाई लगातार बढ़ रही है और अर्थव्यवस्था लगातार चरमरा रही है। जीडीपी ​की विकास दर फिर से गिरी। अप्रैल से जून की तिमाही में जीडीपी विकास दर घटकर 5 फीसदी हो गई है। इसके पहले यह 5.8 फीसदी थी। यह पिछले पांच साल का सबसे निचला स्तर है। अब हमारे प्रधानमंत्री को कौन समझाए कि इस देश में भूखे पेट भजन नहीं होता..

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