लोकवाणी

मुख़्तलिफ़ आवाज़, निगाह और विचार

राजनीति हास्य-व्यंग्य

नरेंद्र मोदी न देश है, न भगवान है!

नरेंद्र मोदी भगवान नहीं है। वह भी हमारी तरह छींकता है, पादता है। वह भी नाक में उंगली डालता होगा। सस्ती वाली मशरूम से उसे भी कब्जी होती होगी। वह भी कांख खुजलाता होगा।
उसका जो प्रभामण्डल मीडिया और भक्तों ने तैयार किया, उसका दुष्परिणाम यह हुआ है कि यह आदमी से देश में परिवर्तित हो गया। आज ‘नरेंद्र मोदी मुर्दाबाद’ को ‘हिंदुस्तान मुर्दाबाद’ मान लिया गया है। यह खतरनाक है। साल 19 में अगर यह आदमी दुबारा प्रधानमंत्री बन गया तो मैं दावा कर सकता हूँ कि यह अपने ही मुँह से ‘अह्म ब्रह्मास्मि’ की घोषणा कर देगा। इसके संकेत अपने भाषणों में देता रहता है।
………………………………..
अभी तक भारतीय इतिहास में क्रेडिट पाने का इतना भूखा प्रधानमंत्री नहीं हुआ। प्रधानमंत्री शोहदों की तरह घूम-घूम कर हत्या का न केवल जश्न मनाता रहा, बल्कि ‘आज खुश बहुत होंगे आप, आपका मिजाज बदला बदला है’ जैसी बातों से पब्लिक को भी इसमें इन्वॉल्व करता रहा।

कारगिल युद्ध के बाद इनके ही आदर्श अटलजी के मुँह से कभी नहीं सुना कि उन्होंने युद्ध जीता, बल्कि वे हमेशा अपनी सेना की बात करते रहे। इंदिरा गांधी को तो इनसे कंपेयर करना ही मूर्खता होगी। जब पूरा देश सकते में था, यह आदमी शर्मनाक तरीके से शहीदों की लाश पर वोट गिन रहा था, अपना बूथ मजबूत करने में लगा हुआ था। इत्तेफाक से यह मेरे देश का प्रधानमंत्री है। मेरे देश का मीडिया उसकी अक्षोहिणी सेना है।

मेरे गाँव का श्योपत राम ठीक कहता है कि “पाकिस्तान के पास आतंकी (जैश ए मोहम्मद) है, हमारे पास बातंकी (नरेंद्र मोदी) है।”

भारत के मीडिया ने सेना का सहारा लेकर हमारे प्रधानमंत्री के पक्ष में खूब हवा बनाई। सेना ने एयर स्ट्राइक किया, पाकिस्तान में जाकर बमबारी की। यह सच है। लेकिन पूरी दुनिया का मीडिया एक भी आतंकवादी के हताहत होने की पुष्टि नहीं करता, भारत के मीडिया ने तीन चार सौ के मरने की झूठी सूचना घर घर में फैला रखी। आतंकवाद से शुरू हुई यह डिबेट मुसलमानों और कश्मीरियों को टारगेट करती हुई वैमनस्य और साम्प्रदायिक उन्माद को बढाने में कामयाब हुई। मुसलमानों के प्रति नफरत का माहौल इस देश में कुछ कट्टर संगठनों ने पहले से बना रखा था, उसी के क्रम में फिर से पुष्टि की गई कि मुसलमान ही आतंकी हैं। जिसका डर रहा उसी को हर चैनल पर बार-बार दोहराया गया। दूसरी बात, मीडिया ने झूठ फैलाया कि 300 आतंकी मारे गए। वह ‘सूत्र’ कौन था जिसके बिहाफ पर झूठ परोसा गया। इस झूठ से सूचना तंत्र की गम्भीरता की हत्या हुई है। भारतीय सर्वोच्च न्यायालय को इस मामले में स्वतः संज्ञान लेना चाहिए।
……………………………….

विंग कमांडर बनाम डींग कमांडर

विंग कमांडर अभिनन्दन के स्वदेश वापसी की खुशी है। सेना ने अपना काम किया, जो पहले भी करती आई है और आगे भी करती रहेगी। इसमें कोई संदेह नहीं है। उसके जज्बे और निष्ठा को सलाम।

कल अभिनन्दन को जब भारत आना था तो मेरे गाँव के एक किसान ने कहा कि मोदीजी खुद लेने आएंगे। मैंने कहा कि अन्तर्राष्ट्रीय सन्धि के तहत ऐसा नहीं हो सकता। किसान ने कहा कि सन्धि-फन्धि को पढा-लिखा आदमी जाने, मोदी को अगर लग गया कि जवान को रिसीव करने से 50 वोट बढ़ेंगे, तो यह बन्दा वाघा बॉर्डर पर आएगा। यह स्तर है अम्बानीसखा का।
………………………………
दिलीप मंडल ने ठीक लिखा कि देश में इतना संवेदनशील माहौल के बावजूद सब अपना एजेंडा ठीक से चला रहे हैं। मोहन भागवत अपने पेज पर सड़ा हुआ कैलेंडर अपलोड कर रहा, नरेंद्र मोदी अपना जवान दुश्मन के कब्जे में है, ऐसी सूचना पाकर भी ‘मेरा बूथ सबसे मजबूत’ जैसा चुनावी कार्यक्रम बदस्तूर चला रहा। तो दलित, आदिवासी और पिछड़ा अपना एजेंडा क्यों छोड़े!
…………………………….
जरूरी है कि OBC, SC, ST 13 पॉइंट रोस्टर की बात करे। आदिवासी अपनी जमीन की बात करे। राहुल गांधी राफाल की बात करे। केजरीवाल पूछते रहें कि CRPF के जवानों को पेंशन क्यों नहीं मिलती! और सब मिलकर पूछें कि कितने आतंकी मारे, इसकी सूचना सरकार खुद जनता को दे।

अब साहेब दो काम करेंगे

पहला, चुनावी रैलियों में घूम-घूम कर तालियाँ पीट-पीट कर छाती कूट कूट कर भाषण मारेंगे, “कि मैंने पंडोंसी देंश कों घुंटनों पंर लां दियाँ। कि मेरें रहतें मेरें फौजी भाईयों कों कोईं दिक्कत नहीं हों सकतीं। कि मैं ही हूँ वहं नूर जों हंर ज़र्रे कों रोशन करतां हैं। भाइयों और बहनों। मित्रों। मैं। मैं। मैं।

दूसरा, सिंपल है। जेएनयू-जेएनयू खेल सकते हैं। जेएनयू में साहेब के प्यादों ने माहौल सिरज रखा है।

पहले के आसार ज्यादा है, दूसरा मुद्दा पहले वाले के स्थायी भावों को उद्दीप्त करने के काम आ सकता है। अधिक उद्दीपन के लिए साहेब घड़ियाल की एक्टिंग करेंगे।

राम मंदिर, पाँव-पूजन, नेहरू, कांग्रेस, नामदार…ये सब संचारी भावों की तरह बीच-बीच में आते-जाते रहेंगे।

बेरोजगारी, दलित, किसान, आदिवासी, मुस्लिम, आरक्षण ये कहीं नहीं होंगे, इसकी भी गारंटी लेता हूँ।

LEAVE A RESPONSE

Your email address will not be published. Required fields are marked *