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बनारस से दोबारा पर्चा भर दिया मोदी जी, क्या फिर से आपको ‘मां गंगा’ ने बुलाया है?

मोदीजी ने क्योटो से पर्चा दाखिल किया है। 2014 में जब वो यहाँ आए थे तो उन्होंने कहा था न तो मैं आया हूं और न ही मुझे भेजा गया है, मुझे तो मां गंगा ने यहां बुलाया है.’

तो कोई पत्रकार उनसे एक बार पूछ तो ले कि आज 5 सालों बाद उनकी सबसे महत्वपूर्ण माने जाने वाली योजना नमामि गंगे किस हाल में है?

अभी टीवी पर उनके कोई मंत्री बता रहे थे कि मोदी ने 20 हजार करोड़ रुपये इस योजना के लिए रिलीज किये हैं यह बिल्कुल झूठी बात है हांं, बात उन्होंने जरूर बीस हजार करोड़ की की थी.

केंद्र सरकार राज्य सभा में बताती है कि वर्ष 2014 से जून 2018 तक गंगा नदी की सफाई के लिए 3,867 करोड़ रुपये ही राशि खर्च की गयी है. जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण राज्य मंत्री डॉ. सत्यपाल सिंह ने राज्यसभा में यह जानकारी दी थी.

राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने 13 जुलाई 2017 को गंगा की सफाई पर फैसला देते हुए कहा कि गंगा नदी की गुणवत्ता के मामले में रत्तीभर सुधार नहीं दिखा है। पहले राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने गंगा नदी की साफ-सफाई पर असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि नदी की हालात बहुत ज़्यादा खराब है. नदी की सफाई के लिए शायद ही कोई प्रभावी कदम उठाया गया है.

एनजीटी ने 543 पेज के अपने आदेश में कहा कि मार्च 2017 तक 7304.64 करोड़ रुपये खर्च करने के बाद भी केंद्र, राज्य सरकारें और उत्तर प्रदेश राज्य के स्थानीय प्राधिकरण गंगा की सेहत सुधारने में असफल रहे।

NGT ने उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों से सभी महत्वपूर्ण स्थलों पर गंगा जल की गुणवत्ता मासिक आधार पर सार्वजनिक करने के साथ ही यह बताने को भी कहा है कि पानी नहाने और पीने योग्य है या नहीं, सरकार ने तय किया था कि 1,178.78 मिलियन लीटर गंदे पानी को रोजाना साफ़ करेंगे पर अब तक वह क्षमता मात्र 0.06 मिलियन लीटर पहुंची है।

आठ जनवरी 2019 को आरटीआई आवेदन के ज़रिये जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्रालय के अधीन संस्था राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) से मिली जानकारी से खुलासा हुआ कि गंगा नदी पर एम्पावर्ड टास्क फोर्स के गठन के दो साल से ज़्यादा समय बीत जाने के बाद भी इसकी अब तक सिर्फ दो बैठकें ही हुई हैं. जबकि हर तीन महीने में एक बैठक होनी चाहिए।

गंगा सफ़ाई की जिम्मेदारी उमा भारती ने ली थी। उमा भारती ने कहींं यह भी ऐलान किया था कि गंगा की सफाई का काम अगर अक्टूबर 2018 तक नहीं पूरा हुआ तो मैं मरते दम तक अनशन पर बैठूँगी। लेकिन सितम्बर 2017 में उमा भारती को इस मंत्रालय से हटाकर नितिन गडकरी को इस मंत्रालय की जिम्मेदारी दे दी गयी.

गंगा में ऑक्सीजन की मात्रा लगातार घट रही है. गंगा में बैक्टीरिया की मात्रा 58 फीसदी से अधिक हो गई है, पूरी परियोजना को पूरा करने का लक्ष्य 5 साल का रखा गया था। लेकिन अब तक इसके 10 फ़ीसदी प्रोजेक्ट भी पूरे नहीं हुए हैंं। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने दावा किया है कि 2020 तक गंगा की सफाई 70 से 80 फीसदी पूरी हो चुकी होगी जो बिल्कुल झूठी बात है.

पता नहीं हमारा मीडिया जो दिनरात नमोगान में मगन है। कब उनसे ये सवाल पूछेगा?

कार्टून Hemant Malviya

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