लोकवाणी

मुख़्तलिफ़ आवाज़, निगाह और विचार

राजनीति रिपोर्ट

नरेंद्र मोदी का घोर नकली इंटरव्यू: मोदी से जो सवाल पूछे गए, वो पहले से लिखकर दिए गए थे

न्यूज़ नेशन के इंटरव्यू में पीएम नरेंद्र मोदी को उनकी हालिया कविता सुनाने के लिए कहा गया था. मोदी अपनी फाइल मांगते हैं, जो विधिवत रूप से सौंप दी जाती है, और वह पन्नों को पलटना शुरू कर देते हैं. जिस पन्ने पर कविता लिखी होती है, उसी पेज के ऊपर पत्रकार का प्रश्न भी लिखा होता है. सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री मोदी के इंटरव्यू का वीडियो घूम रहा है. इस वीडियो में पत्रकार दीपक चौरसिया उसी सवाल को पूछते हैं और प्रधानमंत्री मोदी उसी लिखे गए जवाब को बांच देते हैं.

स्क्रिप्टेड इंटरव्यू की पोल खुलने के बाद भंवरलाल लिखते हैं, न्यूज़ नेशन के इंटरव्यू में पत्रकारों ने मोदी को कविता सुनाने के लिए कहा। कवि मोदी ने एक काग़ज़ मंगवाकर उस पर लिखी कविता सुनाई। कैमरा क्षणभर के लिए कविता पर ठहरा। नीचे वही पन्ना है। आप ग़ौर से देखिए कि कविता के ठीक ऊपर क्या लिखा है? जी हाँ, पत्रकार का प्रश्न लिखा गया है।

इसका अर्थ है कि पहले प्रश्न दिए जाते हैं। फिर मोदी उनके ज़वाब तैयार करते हैं। फिर घोर स्क्रीप्टड नकली इंटरव्यू होता है। जिसमें मुल्क़ के साथ मसख़री की जाती है।

हैरत है। कुछ तो पर्दादारी रखो।

मोदी के इस घोर नकली इंटरव्यू पर सवाल उठाते हुए युवा लेखक नीलोत्पल मृणाल लिखते हैं,

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से जो सवाल नहीं पूछे गए. कुछ भी बोल देने वाले इस लिजलिजे आदमी की छवि ऐसी बना दी गई है जैसे इनका कोई विकल्प ही नहीं है।

प्रधानमंत्री नें दीपक चौरसिया को दिए साक्षात्कार में कहा कि,

1.वे डिजिटल कैमरा इस्तेमाल करने वाले भारत के शायद पहले व्यक्ति हैं। ये उन्होनें 1986-87 में किया।
2. उन्होनें कहा” इसी डिजिटल कैमरा से रंगीन फोटो खींच 1986-87 उन्होनें इसे दिल्ली e mail किया और दुसरे दिन अखबार में फोटो छ्पी।
3. प्रधानमंत्री के रुप में उन्हें आज भी जो वेतन मिलता है उसका हिसाब और पैसा रखते नही और कर्मचारियों को ही दे देते हैं सब्ज़ी वगैरह लाने के लिये।

एक बार चेक कीजिए कि भारत में डिजिटल कैमरा कब से इस्तेमाल शुरु हुआ पब्लिक के लिये? कब से मार्केट में बिकने लगा? मोदी जी जब मुख्यमंत्री बनने के पहले सदा संत की तरह जिए तो आखिर किस हैसियत से बाज़ार में बिक्री के लिये लांच होने से पहले ही भारत में बतौर पहले व्यक्ति के तौर पर उन्होनें कैसे इसका इस्तेमाल किया जबकि देश में एक नामदार और विलासी परिवार मौजुद था, जिसके यहां हवाई जहाज़ तक चलाने वाले लोग थे।

एक बार तो पूछिए ही कि जब पहली बार भारत में सन 1986-87 के ही आसपास पहली बार शुरुआती रूप में नेशनल कमीशन ऑफ़ सॉफ़्टवेयर टेक्नोलोजी और IIT मुंबई के बीच पहला e mail भेजा गया और बाद में साल भर बाद फिर प्रयोग के तौर IIT मद्रास और IIT मुंबई के बीच e-mail भेजा गया तो मोदी जी ने कैसे 1986-87 में ही e-mail इस्तेमाल किया और दूसरी तरफ़ एक अखबार वाले ने receive भी किया।

भारत में पहली बार e mail पब्लिक इस्तेमाल के लिये 1995 में खुलता है vsnl (विदेश संचार निगम लिमिटेड) के साथ। आज से 33-34 साल पहले आखिर एक संत की तरह विलासिता से कोसो दूर हिमालय और जन जन के बीच भिक्षाटन कर जीवन यापन करने वाला योगी संत व्यक्ति कैसे देश में IIT से पहले और संग ही e mail उपयोग करता है? ये क्यों नही पूछना चहिए आपको।और ये तथ्य कोरा झूठ निकलने पे क्यों नही इस व्यक्ति को या तो मूर्ख या तो धूर्त और झुठा क्यों नही बोलना चहिए।

पर्स नही रखने के तर्क के रुप में मोदी जी ने बताया कि पहली बार तो उन्हें थोड़ी बहुत मात्रा में पैसा विधायक बनने के बाद 2000 ईस्वी में मिला। इसलिए पर्स नही रखा कि वे पैसे खर्च ही हो जाते थे, फिर आज भी सारे पैसे इधर उधर सब्जी वगैरह में खर्च हो जाते हैं इसलिए पर्स की जरुरत नही पड़ती। आप क्या नही पूछेंगे कि 1986 में ही डिजिटल कैमरा इस्तेमाल करने वाले पहले भारतीय ने पैसे के अभाव के कारण कैसे पर्स नही रखा? एक इतने गरीब व्यक्ति ने भारत में डिजिटल कैमरा इस्तेमाल करने वाले प्रथम व्यक्ति बनने का सौभाग्य पाया कैसे?

क्या देश का प्रधानमंत्री अपने वेतन से पैसे निकाल सब्जी मंगवाता है? या उसे सरकारी सुविधा के रूप में भोजन देने का प्रावधान है? या नही भी है तो भोजन का भुगतान वेतन के पैसे से क्या रोज दिया जाता है बतौर राशन और सब्जी? या जैसे देश के हॉस्टल तक में मेस का बिल महीने में भरा जाता है तो pm का दैनिक क्यों? भाई आप चाहे किसी भी दल के हों, जिसके भी समर्थक हों,लेकिन एक होशो हवास में जीने वाले सामान्य बुद्धि के भी नागरिक के तौर पर क्या प्रधानमंत्री के कहे इन बातों पर दो मिनट भी नही सोचेंगे?

महराज प्लीज़, आपने हमने इन्हें देश सौंप दिया था चलाने, प्लीज़ इतना तो चेक करना बनता है कि देश कहीं टोटल पप्पू के हाथ तो नही, या झूठे के हाथ। मैं सिद्ध नही कर रहा झुठा, बस कह रहा हूँ कि दी गई हैरतनंगेज़ (not हैरतअंगेज) जानकारी एक बार क्रॉस चेक तो कर लिजिये। कहीं आपके 99 percent वाले बच्चे e mail का भारत में जनता द्वारा प्रयोग 1986 लिख आये तो! क्या फायदा जीनियस होने का। उत्तर तो 1995 होगा। जय हो।

देखिये वायरल वीडियो

LEAVE A RESPONSE

Your email address will not be published. Required fields are marked *